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खाते में सवा चार करोड़ रुपये, फिर भ्ाी नलों में पानी नहीं

Sat, 09 Dec 2017 11:29 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Sat, 09 Dec 2017 11:29 PM IST
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crore in the account of four crore rupees, then no water in the taps.
पानी - फोटो : अमर उजाला
पडरौना। जनपद के 99 ग्राम पंचायतों में 50 अधिकारियों से कराई गई हैंडपंपों की जांच में बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। अभी भी इन 99 ग्राम पंचायतों के खाते में 4.29 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि उपलब्ध है, फिर भी न तो खराब पड़े इंडिया मार्क टू हैंडपंपों को शत प्रतिशत रीबोर कराया गया है और न ही उनकी मरम्मत कराई गई है। डीएम ने हैंडपंपों की मरम्मत में खर्च हुई धनराशि के संबंध में अभिलेख मंगाकर जांच कराने को कहा है। वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने पर संबंधित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों और ग्राम प्रधानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
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डीएम आंद्रा वामसी ने बीते सात दिसंबर को 50 अधिकारियों को जनपद के 99 ग्राम पंचायतों में भेजकर इंडिया मार्क टू हैंडपंपों का सत्यापन कराया गया था। भौतिक सत्यापन में पाया गया कि इन 99 ग्राम पंचायतों में अभी 528 हैंडपंप रीबोर योग्य हैं। जबकि 209 को रीबोर कराया गया है। इसी तरह 898 हैंडपंप मरम्मत योग्य हैं, जबकि 1228 हैंडपंपों की मरम्मत कराई जा चुकी है। जांच रिपोर्ट के बाद डीएम ने बताया कि 99 ग्राम पंचायतों में अभी चार करोड़ उन्नतीस लाख तीन हजार सात सौ अस्सी रुपये अवशेष हैं। इसके बावजूद ग्राम प्रधानों और सचिवों के स्तर से न तो शत प्रतिशत हैंडपंप रीबोर हुए हैं न ही उनकी मरम्मत हुई है। हालांकि इसके लिए तीन माह पहले ही कड़े निर्देश दिए गए थे। इसके लिए ग्राम निधियों में पर्याप्त धन भी भेजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि सभी अवशेष हैंडपंपों को 10 दिनों में रीबोर व मरम्मत कराने का निर्देश दिया गया है। 
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डीएम का कहना था कि जिन हैंडपंप की मरम्मत और रीबोर कराई गई है, उनके खर्च से संबंधित ब्यौरा तलब किया गया है। उसका सत्यापन करके बिंदुवार जांच की जाएगी कि हैंडपंप के किस पार्ट को कहां से कितने में खरीदा गया है और मजदूरी के तौर पर कितना खर्च किया गया है। यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता उजागर होती है तो संबंधित ग्राम प्रधान व सचिव के साथ एडीओ पंचायत का उत्तरदायित्व तय करके थाने में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। ग्राम प्रधान को पदच्युत करते हुए सचिव को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। एडीओ को दंडित करने के साथ ही संबंधित सभी दोषियों से अनियमितता की धनराशि भू राजस्व की भांति वसूल की जाएगी। 
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