खुलेआम चल रही बिना डिग्री वालों की सर्जरी
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खड्डा क्षेत्र के करदह गांव के एक व्यक्ति की बेटी की तबीयत खराब हुई तो उसे लेकर खड्डा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने मरीज को जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। तभी वहां उसे एक एजेंट मिल गया और बेहतर इलाज का झांसा देकर खड्डा के एक निजी अस्पताल में ले गया।
वहां मरीज को भर्ती कराया गया। जहां किसी बड़े डॉक्टर ने नहीं बल्कि अप्रशिक्षित व्यक्ति ने ऑपरेशन कर दिया। नतीजा यह हुआ कि बीमारी ठीक होने की बजाए और बढ़ गई। नौ दिन तक अस्पताल में रखने के बाद उसे कहीं और ले जाने की सलाह दी गई। गोरखपुर के अस्पताल ले जाने पर मालूम चला कि आपरेशन गलत हुआ था। एक माह के इलाज में लगभग एक लाख रुपये खर्च करके परिजन उसे बचा सके।
क्षेत्र के एक मरीज और उसके घरवालों के साथ घटी यह घटना तो बानगी भर है, ऐसे तकरीबन 12 अस्पताल खड्डा सीएचसी क े निकट हैं। इसके साथ ही नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में लगभग 18, बेलवनिया में लगभग छह सहित इस तहसील क्षेत्र में कई ऐसे अवैध अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं, जहां बिना लाइसेंस के बड़े सर्जन का बोर्ड लगाकर अप्रशिक्षित लोग बच्चेदानी, हाइड्रोसील, पथरी और बवासीर के ऑपरेशन कर कई रोगियों को गंभीर स्थिति तक पहुंचा चुके हैं।
कमीशन के खेल में दांव पर लगा रहे जिंदगी ः खड्डा और नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में कुकुरमुत्ते की तरहफैले इन अवैध अस्पतालों में हर काम नियमविरुद्ध तरीके से हो रहा है। मरीजों के लिए सादी पर्चियों पर दवा लिखी जाती है। ताकि मरीज के साथ कोई अनहोनी होने पर वह दावा न कर सके। ऑपरेशन करने वाले इन अप्रशिक्षित लोगों का कुछ चिह्नित मेडिकल स्टोर्स पर कमीशन बंधा हुआ है, जो इनकी जरूरत की सभी वस्तुएं जरूरत पड़ते ही मुहैया करा देते हैं। मरीजों को झांसा देकर ऐसे अस्पतालों को लेकर आने वाले एजेंटों का कमीशन के रूप में मोटी रकम दी जाती है।
कार्रवाई शुरू कर दी गई है : सीएमओ
खड्डा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता का कहना है कि मामला जानकारी में है। इसके लिए मैंने रिपोर्ट भी भेजी है। वहीं सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में है। टीम गठित करके कार्रवाई शुरू कर दी गई है। डॉक्टरों के बोर्ड पर लिखी डिग्रियों की भी जांच-पड़ताल की जाएगी।