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पशु मैत्री चयन भी संदेह के घेरे में
kushinagar
Updated Fri, 23 Sep 2016 11:32 PM IST
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अपराध
- फोटो : santosh verma
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पडरौना। पशुपालन विभाग की तरफ से जिले में किया गया पशु मैत्री चयन संदेह के घेरे में आ गया है। इसमें गड़बड़ी की शिकायत पर पशुपालन विभाग के एडी शुक्रवार को जांच करने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय पहुंचे। कार्यालय में शिकायतकर्ता और पटल सहायक को बुलाया गया था, लेकिन पटल सहायक के मौजूद न हो पाने के कारण जांच पूरी नहीं हो पाई। एडी ने पटल सहायक को सभी साक्ष्यों के साथ शनिवार को अपने कार्यालय में तलब किया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के लिए पैरावेट पशु मित्रों की तर्ज पर जिले में पशु मैत्री चयन के लिए पशुपालन विभाग की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। 29 पदों पर इनका चयन कराने की मांग की थी, उनमें 10 पदों पर 12 अगस्त को पशु मैत्री का चयन कर लिया गया। सपा की लोहिया वाहिनी के नेता चंद्रशेखर यादव लड्डू ने जिले में पशु मैत्री चयन में धांधली का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की थी। इस पर शासन ने जांच का निर्देश दिया था।
शुक्रवार को इस प्रकरण की जांच करने पशुपालन विभाग गोरखपुर के अपर निदेशक डॉ. केपी सिंह मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भगवान सिंह के साथ कार्यालय पहुंचे। एडी ने शिकायतकर्ता और पटल सहायक को भी बुलाया था। शिकायतकर्ता चंद्रशेखर यादव तो कार्यालय पहुंच गए, लेकिन पटल सहायक के मौजूद न रहने के कारण जांच पूरी नहीं हो पाई।
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प्रकरण की जांच के लिए आए एडी डॉ. केपी सिंह ने बताया कि पटल सहायक के परिवार के एक सदस्य की तबीयत खराब हो जाने के कारण वह नहीं आ सके। इसलिए जांच पूूरी नहीं हो पाई। पटल सहायक को चयन संबंधी सभी साक्ष्यों और अभिलेखों के साथ शनिवार को गोरखपुर कार्यालय में बुलाया गया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के लिए पैरावेट पशु मित्रों की तर्ज पर जिले में पशु मैत्री चयन के लिए पशुपालन विभाग की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। 29 पदों पर इनका चयन कराने की मांग की थी, उनमें 10 पदों पर 12 अगस्त को पशु मैत्री का चयन कर लिया गया। सपा की लोहिया वाहिनी के नेता चंद्रशेखर यादव लड्डू ने जिले में पशु मैत्री चयन में धांधली का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की थी। इस पर शासन ने जांच का निर्देश दिया था।
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शुक्रवार को इस प्रकरण की जांच करने पशुपालन विभाग गोरखपुर के अपर निदेशक डॉ. केपी सिंह मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भगवान सिंह के साथ कार्यालय पहुंचे। एडी ने शिकायतकर्ता और पटल सहायक को भी बुलाया था। शिकायतकर्ता चंद्रशेखर यादव तो कार्यालय पहुंच गए, लेकिन पटल सहायक के मौजूद न रहने के कारण जांच पूरी नहीं हो पाई।
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प्रकरण की जांच के लिए आए एडी डॉ. केपी सिंह ने बताया कि पटल सहायक के परिवार के एक सदस्य की तबीयत खराब हो जाने के कारण वह नहीं आ सके। इसलिए जांच पूूरी नहीं हो पाई। पटल सहायक को चयन संबंधी सभी साक्ष्यों और अभिलेखों के साथ शनिवार को गोरखपुर कार्यालय में बुलाया गया है।