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हत्या में आजीवन कारावास की सजा
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Mon, 11 Jan 2016 11:28 PM IST
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पडरौना। 28 जुलाई 12 की रात हाटा कोतवाली क्षेत्र के गांव बढ़या बुजुर्ग टोला अमहाडाड़ निवासी 22 वर्षीय मुरली चौधरी की हत्या के मामले में न्यायालय ने सोमवार को फैसला सुना दिया।
जिला एवं सत्र न्यायालय के कोर्ट नंबर-दो के अपर सत्र न्यायाधीश साकेत बिहारी दीपक ने हत्यारोपी विभूती को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जबकि आरोपी की बेटी पर आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण दोषमुक्त कर दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जीपी यादव के मुताबिक न्यायालय में दाखिल आरोप पत्र में वादी रामसमुझ चौधरी की ओर से बताया गया था कि 28 जुलाई की रात उनके बेटे मुरली चौधरी से गांव के ही विभूती की बेटी का संबंध था।
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28 जुलाई की रात लगभग आठ बजे विभूती उनके घर आए और उनके बेटे मुरली को अपने साथ लेकर चले गए।
सुबह तकरीबन छह बजे उनके लड़के का शव गांव के बाहर एक खेत के पास पड़ा मिला।
उन्होंने विभूती और उनकी बेटी के खिलाफ तहरीर दी, जिसके आधार पर हाटा कोतवाली की पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था। तभी से मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था।
सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान विभूती की बेटी लक्ष्मीना पर आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण दोषमुक्त कर दिया, लेकिन विभूती को हत्या का दोषी पाया।
चूंकि परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी विभूती के कंधों पर है, इसलिए न्यायाधीश ने आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
उन्होंने कहा कि अर्थदंड नहीं देने पर विभूती को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। उन्होंने अर्थदंड की आधी धनराशि मुरली के पिता रामसमुझ चौधरी को देने का आदेश दिया।
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जिला एवं सत्र न्यायालय के कोर्ट नंबर-दो के अपर सत्र न्यायाधीश साकेत बिहारी दीपक ने हत्यारोपी विभूती को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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जबकि आरोपी की बेटी पर आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण दोषमुक्त कर दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जीपी यादव के मुताबिक न्यायालय में दाखिल आरोप पत्र में वादी रामसमुझ चौधरी की ओर से बताया गया था कि 28 जुलाई की रात उनके बेटे मुरली चौधरी से गांव के ही विभूती की बेटी का संबंध था।
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28 जुलाई की रात लगभग आठ बजे विभूती उनके घर आए और उनके बेटे मुरली को अपने साथ लेकर चले गए।
सुबह तकरीबन छह बजे उनके लड़के का शव गांव के बाहर एक खेत के पास पड़ा मिला।
उन्होंने विभूती और उनकी बेटी के खिलाफ तहरीर दी, जिसके आधार पर हाटा कोतवाली की पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था। तभी से मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था।
सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान विभूती की बेटी लक्ष्मीना पर आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण दोषमुक्त कर दिया, लेकिन विभूती को हत्या का दोषी पाया।
चूंकि परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी विभूती के कंधों पर है, इसलिए न्यायाधीश ने आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
उन्होंने कहा कि अर्थदंड नहीं देने पर विभूती को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। उन्होंने अर्थदंड की आधी धनराशि मुरली के पिता रामसमुझ चौधरी को देने का आदेश दिया।