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Kushinagar News: उत्पादन से दूनी खपत...कहीं दूध मिलावटी तो नहीं
Mon, 03 Mar 2025 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 03 Mar 2025 11:33 PM IST
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पडरौना। जिले में रोजाना दूध का उत्पादन करीब 8.25 लाख लीटर है, जबकि खपत सामान्य दिनों में करीब 12 लाख की होती है। लेकिन, त्याेहार और सहालग में दूध की खपत 13 लाख लीटर से अधिक हो जाती है।
ऐसे में यह भरपाई कहां से हो रही है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। उत्पादन से अधिक दूध की मांग को पूरा करने के लिए मिलावटखोरी कर सिंथेटिक दूध का इस्तेमाल बढ़ गया है। यह लोगों की सेहत के साथ जेब पर असर डाल रहा है। त्योहारों का महीना आने के साथ ही शहर में नकली मिठाइयों की भरमार हो गई है। मिठाई दुकानदार चंद रुपये कमाने के लालच में ग्राहकों के मौत के मुंह में धकेल रहे है। शहर में इन दिनों दर्जन भर से अधिक मिठाई निर्माण करने वाले कारखाने संचालित हो रहे हैं।
शहर की सभी बड़े मिठाई के दुकानदार अपने-अपने कारखाने चलाते हैं। इन कारखाना संचालकों के पास नहीं तो अपना कोई दुग्ध उत्पादन के लिए संसाधन है और न ही इनके कलेक्शन सेंटर, फिर भी इतनी अधिक मात्रा में दूध इनके पास कहां से आता है, यह बड़ा सवाल है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि जिले में गाय की संख्या 51,821 और 51,847 मवेशी (भैंस) हैं। इनसे 8.25 लाख लीटर दूध का उत्पादन है। इसके अलावा गोरखपुर और लखनऊ आदि जनपदों से रोजाना दो लाख लीटर से अधिक दूध ज्ञान डेयरी, मदर डेयरी और पारस डेयरी की आपूर्ति होती है।
फिर भी वर्तमान में चार से पांच लाख लीटर दूध की कमी है। सूत्रों की मानें तो इस कमी की भरपाई के लिए सिंथेटिक व मिलावटी दूध का उपयोग किया जा रहा है।
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ऐसे में यह भरपाई कहां से हो रही है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। उत्पादन से अधिक दूध की मांग को पूरा करने के लिए मिलावटखोरी कर सिंथेटिक दूध का इस्तेमाल बढ़ गया है। यह लोगों की सेहत के साथ जेब पर असर डाल रहा है। त्योहारों का महीना आने के साथ ही शहर में नकली मिठाइयों की भरमार हो गई है। मिठाई दुकानदार चंद रुपये कमाने के लालच में ग्राहकों के मौत के मुंह में धकेल रहे है। शहर में इन दिनों दर्जन भर से अधिक मिठाई निर्माण करने वाले कारखाने संचालित हो रहे हैं।
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शहर की सभी बड़े मिठाई के दुकानदार अपने-अपने कारखाने चलाते हैं। इन कारखाना संचालकों के पास नहीं तो अपना कोई दुग्ध उत्पादन के लिए संसाधन है और न ही इनके कलेक्शन सेंटर, फिर भी इतनी अधिक मात्रा में दूध इनके पास कहां से आता है, यह बड़ा सवाल है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि जिले में गाय की संख्या 51,821 और 51,847 मवेशी (भैंस) हैं। इनसे 8.25 लाख लीटर दूध का उत्पादन है। इसके अलावा गोरखपुर और लखनऊ आदि जनपदों से रोजाना दो लाख लीटर से अधिक दूध ज्ञान डेयरी, मदर डेयरी और पारस डेयरी की आपूर्ति होती है।
फिर भी वर्तमान में चार से पांच लाख लीटर दूध की कमी है। सूत्रों की मानें तो इस कमी की भरपाई के लिए सिंथेटिक व मिलावटी दूध का उपयोग किया जा रहा है।