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Kushinagar News: छितौनी बंधे पर तय समय में बाढ़ से बचाव कार्य पूरा करना चुनौती
Wed, 27 May 2026 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 27 May 2026 02:09 AM IST
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छितौनी तटबंध पर चल रहा मरम्मत कार्य
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खड्डा। बड़ी गंडक नदी के कटान और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए क्षेत्र के 14.400 किलोमीटर लंबे छितौनी तटबंध के सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्य चल रहा है। करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराए जा रहे हैं। हालांकि, कार्य की धीमी गति को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि 15 जून तक इसे पूरा कराना संभव नहीं है। वैसे, बाढ़ खंड के जिम्मेदार अधिकारी जून के अंत तक काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं।
वर्ष 1968 में बने इस तटबंध की सुरक्षा को लेकर विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तटबंध के किलोमीटर 6.500 से 8.800 के बीच अतिसंवेदनशील ठोकरों की मरम्मत कराई जा रही है। किलोमीटर 12.100 और 12.700 के आसपास भी तटबंध को मजबूत बनाने का कार्य तेजी से हो रहा है। बोल्डर पिचिंग, ठोकरों के पुनर्निर्माण और तटबंध सुरक्षा से जुड़े अन्य कार्य युद्धस्तर पर कराए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य मानसून शुरू होने से पहले सभी जरूरी कार्यों को पूरा कर तटबंध को पूरी तरह सुरक्षित करना है।
बताया जाता है कि नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद बड़ी गंडक नदी नारायणी के रास्ते खड्डा क्षेत्र में प्रवेश करती है। पिछले वर्ष भैंसहा गांव के पास नदी ने अचानक रुख बदल लिया था, जिससे कई स्थानों पर कटान शुरू हो गया था और तटबंध पर खतरा मंडराने लगा था। विभाग ने आपातकालीन बचाव कार्य के जरिये स्थिति को नियंत्रित किया था। बाद में हाई लेवल कमेटी की संस्तुति पर संवेदनशील स्थानों पर स्थायी सुरक्षा कार्य को मंजूरी दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर कार्य की गति अपेक्षित नहीं है। ऐसे में तय समय सीमा में काम पूरा होना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। लोगों को उम्मीद है कि सुदृढ़ीकरण कार्य पूरा होने के बाद बड़ी गंडक नदी के कटान से तटबंध पर मंडराने वाला खतरा काफी हद तक कम होगा और आसपास के गांवों को बाढ़ से राहत मिल सकेगी।
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बोले लोग-
-हर साल मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका। प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। काम की जो गति है,उससे नहीं लग रहा है कि तय समय पर मरम्मत कार्य पूरा होगा। -दीपक सिंह, निवासी हनुमानगंज
-
बरसात शुरू होते ही तटबंध के पास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ जाती है। सरकार को और जिम्मेदारों को वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था करने की जरूरत है। -दिवाकर पांडेय, निवासी भेड़िहारी
-
-बंधे की मरम्मत और सुरक्षा कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और जहां आवश्यकता महसूस होती है, वहां अतिरिक्त सुदृढ़ीकरण कार्य भी कराया जा रहा है। काम विलंब से शुरू हुआ। इसके चलते पूरा होने में विलंब हो सकता है, लेकिन तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। -मनोरंजन कुमार, एसडीओ, बाढ़ खंड कुशीनगर
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वर्ष 1968 में बने इस तटबंध की सुरक्षा को लेकर विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तटबंध के किलोमीटर 6.500 से 8.800 के बीच अतिसंवेदनशील ठोकरों की मरम्मत कराई जा रही है। किलोमीटर 12.100 और 12.700 के आसपास भी तटबंध को मजबूत बनाने का कार्य तेजी से हो रहा है। बोल्डर पिचिंग, ठोकरों के पुनर्निर्माण और तटबंध सुरक्षा से जुड़े अन्य कार्य युद्धस्तर पर कराए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य मानसून शुरू होने से पहले सभी जरूरी कार्यों को पूरा कर तटबंध को पूरी तरह सुरक्षित करना है।
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बताया जाता है कि नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद बड़ी गंडक नदी नारायणी के रास्ते खड्डा क्षेत्र में प्रवेश करती है। पिछले वर्ष भैंसहा गांव के पास नदी ने अचानक रुख बदल लिया था, जिससे कई स्थानों पर कटान शुरू हो गया था और तटबंध पर खतरा मंडराने लगा था। विभाग ने आपातकालीन बचाव कार्य के जरिये स्थिति को नियंत्रित किया था। बाद में हाई लेवल कमेटी की संस्तुति पर संवेदनशील स्थानों पर स्थायी सुरक्षा कार्य को मंजूरी दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर कार्य की गति अपेक्षित नहीं है। ऐसे में तय समय सीमा में काम पूरा होना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। लोगों को उम्मीद है कि सुदृढ़ीकरण कार्य पूरा होने के बाद बड़ी गंडक नदी के कटान से तटबंध पर मंडराने वाला खतरा काफी हद तक कम होगा और आसपास के गांवों को बाढ़ से राहत मिल सकेगी।
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बोले लोग-
-हर साल मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका। प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। काम की जो गति है,उससे नहीं लग रहा है कि तय समय पर मरम्मत कार्य पूरा होगा। -दीपक सिंह, निवासी हनुमानगंज
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बरसात शुरू होते ही तटबंध के पास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ जाती है। सरकार को और जिम्मेदारों को वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था करने की जरूरत है। -दिवाकर पांडेय, निवासी भेड़िहारी
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-बंधे की मरम्मत और सुरक्षा कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और जहां आवश्यकता महसूस होती है, वहां अतिरिक्त सुदृढ़ीकरण कार्य भी कराया जा रहा है। काम विलंब से शुरू हुआ। इसके चलते पूरा होने में विलंब हो सकता है, लेकिन तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। -मनोरंजन कुमार, एसडीओ, बाढ़ खंड कुशीनगर

छितौनी तटबंध पर चल रहा मरम्मत कार्य