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Kushinagar News: दो माह बाद भी चालू नहीं हो पाई कांपैक्ट सेल मशीन
Wed, 13 Dec 2023 01:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 13 Dec 2023 01:27 AM IST
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कुशीनगर। टीबी के रोगियों की जांच के लिए करीब दो महीना पहले स्वशासी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में आई कांपैक्ट सेल मशीन अब तक चालू नहीं हो पाई है। कारण कि अब तक प्रशिक्षित टेक्निशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। अब भी जिला अस्पताल में ट्रू नॉट मशीन से ही टीबी रोगियों की स्पुटम जांच हो पा रही है। इससे एक घंटे में सिर्फ दो मरीजों के स्पुटम की जांच हो पा रही है, जबकि यदि यह मशीन चालू हो जाती तो एक घंटे 32 मरीजों के स्पुटम (बलगम) की जांच हो जाती। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी इस मशीन से जांच चालू नहीं हो पाई है।
जिला अस्पताल सहित रामकोला, कप्तानगंज, हाटा, दुदही और सेवरही सीएचसी में एक-एक ट्रूनॉट मशीन लगी है, जिससे एक घंटे में सिर्फ दो मरीजों के टीबी की जांच हो पाती है। इसके अलावा जिला क्षय रोग कार्यालय में एक सीवी नाॅट मशीन लगी है, जिससे एक घंटे में चार मरीजों के स्पुटम की जांच हो पाती है।
चूंकि टीबी के लक्षण वाले मरीजों का सैंपल जांच के लिए जिला अस्पताल में अधिक आता है। इसकी वजह से समय से जांच नहीं होने के कारण सैंपल खराब हो जाते हैं और मरीजों को दोबारा सैंपल देना पड़ता है। मरीजों के दबाव को देखते हुए शासन से कंपैक्ट सेल मशीन भेजी गई है। इससे जांच करने में आसानी होगी। क्योंकि यह ऑटोमेटिक मशीन है। सिर्फ सैंपल इसमें लगाना पड़ेगा। जांच पूरा होने के बाद मशीन हाॅर्न देने लगेगी। मरीजों को भी एक घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट दे दी जाएगी।
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जनपद में टीबी रोगियों की बढ़ रही संख्या-
जनपद में टीबी रोगियों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसका खुलासा 25 नवंबर से पांच दिसंबर तक प्रदेश स्तर पर चले दस दिवसीय टीबी रोगी खोज अभियान में हुआ है। इस अभियान के दौरान जनपद के अंदर 477 टीबी रोगी मिले, जो संख्या प्रदेश के सभी जनपदों से अधिक है, जो काफी चिंताजनक है।
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- कांपैक्ट सेल मशीन को संचालित करने के लिए अभी टेक्निशियन नहीं मिले हैं। इस वजह से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। यह अत्याधुनिक तकनीक की मशीन है। इस मशीन के जरिए मरीज के शरीर में टीबी की बीमारी किस स्टेज पर है, यह पता चल जाता है। दूसरे एक बार में 34 मरीजों के स्पुटम की जांच हो सकती है, जिससे मरीजों का समय बचेगा। कंपैक्ट सेल मशीन से एक दिन में ढाई से तीन सौ सैंपल की जांच हो सकेगी। इससे जिले का परफॉर्मेंस भी बेहतर होगा। इसे जल्द चालू कराने के लिए संबंधित कंपनी को पत्र भेजा गया है। -डॉ. एसएन त्रिपाठी, जिला क्षय रोग अधिकारी
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जिला अस्पताल सहित रामकोला, कप्तानगंज, हाटा, दुदही और सेवरही सीएचसी में एक-एक ट्रूनॉट मशीन लगी है, जिससे एक घंटे में सिर्फ दो मरीजों के टीबी की जांच हो पाती है। इसके अलावा जिला क्षय रोग कार्यालय में एक सीवी नाॅट मशीन लगी है, जिससे एक घंटे में चार मरीजों के स्पुटम की जांच हो पाती है।
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चूंकि टीबी के लक्षण वाले मरीजों का सैंपल जांच के लिए जिला अस्पताल में अधिक आता है। इसकी वजह से समय से जांच नहीं होने के कारण सैंपल खराब हो जाते हैं और मरीजों को दोबारा सैंपल देना पड़ता है। मरीजों के दबाव को देखते हुए शासन से कंपैक्ट सेल मशीन भेजी गई है। इससे जांच करने में आसानी होगी। क्योंकि यह ऑटोमेटिक मशीन है। सिर्फ सैंपल इसमें लगाना पड़ेगा। जांच पूरा होने के बाद मशीन हाॅर्न देने लगेगी। मरीजों को भी एक घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट दे दी जाएगी।
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जनपद में टीबी रोगियों की बढ़ रही संख्या-
जनपद में टीबी रोगियों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसका खुलासा 25 नवंबर से पांच दिसंबर तक प्रदेश स्तर पर चले दस दिवसीय टीबी रोगी खोज अभियान में हुआ है। इस अभियान के दौरान जनपद के अंदर 477 टीबी रोगी मिले, जो संख्या प्रदेश के सभी जनपदों से अधिक है, जो काफी चिंताजनक है।
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- कांपैक्ट सेल मशीन को संचालित करने के लिए अभी टेक्निशियन नहीं मिले हैं। इस वजह से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। यह अत्याधुनिक तकनीक की मशीन है। इस मशीन के जरिए मरीज के शरीर में टीबी की बीमारी किस स्टेज पर है, यह पता चल जाता है। दूसरे एक बार में 34 मरीजों के स्पुटम की जांच हो सकती है, जिससे मरीजों का समय बचेगा। कंपैक्ट सेल मशीन से एक दिन में ढाई से तीन सौ सैंपल की जांच हो सकेगी। इससे जिले का परफॉर्मेंस भी बेहतर होगा। इसे जल्द चालू कराने के लिए संबंधित कंपनी को पत्र भेजा गया है। -डॉ. एसएन त्रिपाठी, जिला क्षय रोग अधिकारी