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बांस गांव खैरटवा टोला में बुखार के मामले का फॉलोअप
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गांव में सफाई और जलनिकासी व्यवस्था बदहाल
दस वर्षों में छह लोगों की मस्तिष्क ज्वर से जा चुकी है जान
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही। बांसगांव खैरवा टोले में बीते करीब दस वर्षों में करीब छह से अधिक लोगों की मस्तिष्क ज्वर से मौत हो चुकी है। वहीं दस से अधिक लोग बुखार की चपेट में आकर ठीक भी हो चुके हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की इस गांव पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव के लोगों की मानें तो सुअरबाड़ा, गंदगी और पेयजल की व्यवस्था नहीं होना बीमारी का मुख्य कारण है।
दुदही ब्लॉक क्षेत्र के बांसी नदी के किनारे बांसगांव खैरवा गांव है। इस गांव में 300 परिवार के कुल 965 लोगों की जनसंख्या वाले टोले में अनुसूचित एवं पिछड़ी जाति के लोगों की जनसंख्या सबसे अधिक हैं। इस गांव में कई सुअरबाड़े हैं। गांव में सफाई, जलनिकासी, पेयजल की सुविधा बेहतर नहीं है। बीते करीब दस वर्षों में प्रीति, अजित, जुबैदा, शुभावती, गामा, आंचल समेत छह लोगों की मौत मस्तिष्क बुखार से हो चुकी है। जबकि सूरज, मुस्ताक, रीमा, सपना, पंकज समेत करीब 10 लोग मस्तिष्क बुखार की चपेट में आ चुके हैं। गांव के आलिम अंसारी, लल्लन यादव, प्रभु भारती, विंध्याचल, मोतीलाल, सागर प्रेमी, कोमल, बीरेश, राकेश, ब्यास, जितेंद्र शर्मा आदि का कहना है कि गांव में गंदगी, सुअरबाड़े के कारण जलजनित बीमारी फैल रही है। गांववालों ने अधिकारियों से सफाई और पेयजल व्यवस्था ठीक कराने की मांग की है। इस बाबत दुदही के प्रभारी चिकित्साधकारी डॉ. एके पांडेय ने कहा कि गांव में सुअरबाड़े की जानकारी नहीं है। अगर लोग शिकायत मिलती है तो अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। गांववालों को बीमारी से बचाने के लिए कैंप लगाकर इलाज कराया जा रहा है।
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दस वर्षों में छह लोगों की मस्तिष्क ज्वर से जा चुकी है जान
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही। बांसगांव खैरवा टोले में बीते करीब दस वर्षों में करीब छह से अधिक लोगों की मस्तिष्क ज्वर से मौत हो चुकी है। वहीं दस से अधिक लोग बुखार की चपेट में आकर ठीक भी हो चुके हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की इस गांव पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव के लोगों की मानें तो सुअरबाड़ा, गंदगी और पेयजल की व्यवस्था नहीं होना बीमारी का मुख्य कारण है।
दुदही ब्लॉक क्षेत्र के बांसी नदी के किनारे बांसगांव खैरवा गांव है। इस गांव में 300 परिवार के कुल 965 लोगों की जनसंख्या वाले टोले में अनुसूचित एवं पिछड़ी जाति के लोगों की जनसंख्या सबसे अधिक हैं। इस गांव में कई सुअरबाड़े हैं। गांव में सफाई, जलनिकासी, पेयजल की सुविधा बेहतर नहीं है। बीते करीब दस वर्षों में प्रीति, अजित, जुबैदा, शुभावती, गामा, आंचल समेत छह लोगों की मौत मस्तिष्क बुखार से हो चुकी है। जबकि सूरज, मुस्ताक, रीमा, सपना, पंकज समेत करीब 10 लोग मस्तिष्क बुखार की चपेट में आ चुके हैं। गांव के आलिम अंसारी, लल्लन यादव, प्रभु भारती, विंध्याचल, मोतीलाल, सागर प्रेमी, कोमल, बीरेश, राकेश, ब्यास, जितेंद्र शर्मा आदि का कहना है कि गांव में गंदगी, सुअरबाड़े के कारण जलजनित बीमारी फैल रही है। गांववालों ने अधिकारियों से सफाई और पेयजल व्यवस्था ठीक कराने की मांग की है। इस बाबत दुदही के प्रभारी चिकित्साधकारी डॉ. एके पांडेय ने कहा कि गांव में सुअरबाड़े की जानकारी नहीं है। अगर लोग शिकायत मिलती है तो अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। गांववालों को बीमारी से बचाने के लिए कैंप लगाकर इलाज कराया जा रहा है।
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