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Kushinagar News: मौसम में बदलाव सेहत के लिए नुकसानदेह, फसलों पर भी असर
Tue, 26 Dec 2023 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 26 Dec 2023 12:43 AM IST
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सोमवार को दिन में धूप निकलने के बाद बिना स्वेटर के सड़क पर दिखे लोग।
पडरौना। मौसम में तेजी से बदलाव आ रहा है। जानकारों का कहना है कि इन दिनों में पहले कोहरा और शीतलहर का समय होता था, लेकिन इस साल दिन में तेज धूप हो रही है। इसका असर लोगों की सेहत के साथ-साथ फसलों पर भी पड़ रहा है। चिकित्सकों ने इसे सेहत के लिए नुकसानदेह बताया है तो कृषि विज्ञानियों ने इससे फसलों की पैदावार घटने की आशंका जताई है। चिकित्सकों का कहना है कि रात में ठंड और दिन में गर्मी की वजह से सांस और हृदय रोग के मरीजों की संख्या 20 फीसदी बढ़ गई है।
करीब एक सप्ताह से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते वर्ष 25 दिसंबर को मौसम का अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई थी। इसके अलावा दिसंबर के अंतिम सप्ताह में सुबह शाम घना कोहरा पड़ने के साथ दिन में गलन भरी ठंड पड़ी थी। लेकिन इस वर्ष सोमवार को अधिकतम तापमान 27 और न्यूनतम 13 डिग्री सेल्सियस है। जबकि एक्यूआई 215 है। पिछले वर्ष की तुलना में तापमान में करीब दोगुने का अंतर है। आसमान साफ होने से दिन में चटक धूप निकल रही है। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के मौसम विज्ञान श्रुति वी सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम में इस तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बीते वर्षों में अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में ही ठंड का मौसम शुरू हो गया था, लेकिन इस वर्ष नवंबर के दूसरे सप्ताह में ठंड पड़नी शुरू हुई है। जनवरी के पहले सप्ताह में मौसम में बदलाव होने के आसार दिख रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका सिंह ने बताया कि दिन में धूप होने और कोहरा नहीं पड़ने की वजह से गेहूं की फसलों की बढ़वार करीब दस फीसदी प्रभावित हुई है। यदि इस तरह के मौसम 15 जनवरी तक होगा, तब फसलों के पैदावार भी प्रभावित होगा। लेकिन किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। मौसम सही होते ही फसलों का बढ़वार तेजी से होगा। उन्होंने बताया कि किसानों को गेहूं की फसलों की समय-समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए, ताकि मौसम की मार से उन्हें बचाया जा सके।
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पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के चिकित्सा प्रभारी डॉ. संजीव सुमन ने बताया कि इस मौसम में सर्दी, जुखाम, खांसी के मरीज के होना तो आम बात है, लेकिन रात में ठंड और दिन में गर्मी की वजह से सांस और हृदय रोग के मरीजों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी है। बच्चों में निमोनिया के शिकायतें भी पिछले एक सप्ताह से बढ़ी है। इससे बचवा के लिए बच्चों को शाम के समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाना चाहिए। दिन के समय धूप में उन्हें एक से दो घंटे रखें, ताकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी मिल सके। उन्होंने बताया कि शरीर में पसीना होने पर एकाएक कपड़े न उतारें, नहीं तो परेशानी बढ़ सकती है। हमेशा गुनगुना पानी पीएं।
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करीब एक सप्ताह से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते वर्ष 25 दिसंबर को मौसम का अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई थी। इसके अलावा दिसंबर के अंतिम सप्ताह में सुबह शाम घना कोहरा पड़ने के साथ दिन में गलन भरी ठंड पड़ी थी। लेकिन इस वर्ष सोमवार को अधिकतम तापमान 27 और न्यूनतम 13 डिग्री सेल्सियस है। जबकि एक्यूआई 215 है। पिछले वर्ष की तुलना में तापमान में करीब दोगुने का अंतर है। आसमान साफ होने से दिन में चटक धूप निकल रही है। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के मौसम विज्ञान श्रुति वी सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम में इस तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बीते वर्षों में अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में ही ठंड का मौसम शुरू हो गया था, लेकिन इस वर्ष नवंबर के दूसरे सप्ताह में ठंड पड़नी शुरू हुई है। जनवरी के पहले सप्ताह में मौसम में बदलाव होने के आसार दिख रहे हैं।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका सिंह ने बताया कि दिन में धूप होने और कोहरा नहीं पड़ने की वजह से गेहूं की फसलों की बढ़वार करीब दस फीसदी प्रभावित हुई है। यदि इस तरह के मौसम 15 जनवरी तक होगा, तब फसलों के पैदावार भी प्रभावित होगा। लेकिन किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। मौसम सही होते ही फसलों का बढ़वार तेजी से होगा। उन्होंने बताया कि किसानों को गेहूं की फसलों की समय-समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए, ताकि मौसम की मार से उन्हें बचाया जा सके।
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पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के चिकित्सा प्रभारी डॉ. संजीव सुमन ने बताया कि इस मौसम में सर्दी, जुखाम, खांसी के मरीज के होना तो आम बात है, लेकिन रात में ठंड और दिन में गर्मी की वजह से सांस और हृदय रोग के मरीजों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी है। बच्चों में निमोनिया के शिकायतें भी पिछले एक सप्ताह से बढ़ी है। इससे बचवा के लिए बच्चों को शाम के समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाना चाहिए। दिन के समय धूप में उन्हें एक से दो घंटे रखें, ताकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी मिल सके। उन्होंने बताया कि शरीर में पसीना होने पर एकाएक कपड़े न उतारें, नहीं तो परेशानी बढ़ सकती है। हमेशा गुनगुना पानी पीएं।