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Kushinagar News: दो वर्ष बाद भी प्रदर्शित नहीं हुईं बौद्ध कलाकृतियां
Tue, 28 Apr 2026 02:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 28 Apr 2026 02:19 AM IST
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राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर।
कसया। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक केंद्र कुशीनगर स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय को समृद्ध करने के उद्देश्य से राज्य संग्रहालय लखनऊ से फरवरी 2023 में आईं 13 महत्वपूर्ण बौद्ध कलाकृतियां दो वर्ष बाद भी प्रदर्शित नहीं की जा सकी हैं। ये कलाकृतियां अभी तक संग्रहालय में ही बंद पड़ी हैं, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इनके अवलोकन से वंचित हो रहे हैं।
संग्रहालय प्रशासन का उद्देश्य इन दुर्लभ कलाकृतियों के माध्यम से राजकीय बौद्ध संग्रहालय को और समृद्ध करना था। वर्ष 1999 में स्थापित इस संग्रहालय में वर्तमान में चार प्रमुख वीथिकाएं कला वीथिका, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध वीथिका, विभिन्न मुद्राओं में भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं और पुरातत्व वीथिका मौजूद हैं। इन वीथिकाओं में पहले से ही 1337 कलाकृतियां प्रदर्शित हैं।
राज्य संग्रहालय लखनऊ से आईं 13 बौद्ध कलाकृतियों में मथुरा से प्राप्त कुषाणकालीन व्याख्यान मुद्रा में बुद्ध, घुंघराले केशों से युक्त बुद्ध मस्तक, ध्यान मुद्रा में बुद्ध, कुषाणकालीन सिरविहीन बुद्ध प्रतिमा, 11वीं-12वीं सदी का व्याख्यान मुद्रा में बोधिसत्व, कुषाणकालीन बोधिसत्व, शालभंजिका, बुद्ध मस्तक, बौद्ध कथानकों से अंकित वेदिका स्तंभ, गांधार से प्राप्त तृतीय शताब्दी की ध्यान मुद्रा में बोधिसत्व, कुषाणकालीन बोधिसत्व मैत्रेय, पांचवीं शताब्दी का अभय मुद्रा में बुद्ध तथा 11वीं-12वीं शताब्दी की भू-स्पर्श मुद्रा में बुद्ध शामिल हैं।
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इस संबंध में राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर के प्रभारी संग्रहालयाध्यक्ष एवं उपनिदेशक डा. यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि लखनऊ से आईं कलाकृतियों और संग्रहालय में पहले से मौजूद वस्तुओं को नए ढंग से प्रदर्शित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि इन्हें शीघ्र ही प्रदर्शित किया जाएगा।
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संग्रहालय प्रशासन का उद्देश्य इन दुर्लभ कलाकृतियों के माध्यम से राजकीय बौद्ध संग्रहालय को और समृद्ध करना था। वर्ष 1999 में स्थापित इस संग्रहालय में वर्तमान में चार प्रमुख वीथिकाएं कला वीथिका, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध वीथिका, विभिन्न मुद्राओं में भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं और पुरातत्व वीथिका मौजूद हैं। इन वीथिकाओं में पहले से ही 1337 कलाकृतियां प्रदर्शित हैं।
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राज्य संग्रहालय लखनऊ से आईं 13 बौद्ध कलाकृतियों में मथुरा से प्राप्त कुषाणकालीन व्याख्यान मुद्रा में बुद्ध, घुंघराले केशों से युक्त बुद्ध मस्तक, ध्यान मुद्रा में बुद्ध, कुषाणकालीन सिरविहीन बुद्ध प्रतिमा, 11वीं-12वीं सदी का व्याख्यान मुद्रा में बोधिसत्व, कुषाणकालीन बोधिसत्व, शालभंजिका, बुद्ध मस्तक, बौद्ध कथानकों से अंकित वेदिका स्तंभ, गांधार से प्राप्त तृतीय शताब्दी की ध्यान मुद्रा में बोधिसत्व, कुषाणकालीन बोधिसत्व मैत्रेय, पांचवीं शताब्दी का अभय मुद्रा में बुद्ध तथा 11वीं-12वीं शताब्दी की भू-स्पर्श मुद्रा में बुद्ध शामिल हैं।
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इस संबंध में राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर के प्रभारी संग्रहालयाध्यक्ष एवं उपनिदेशक डा. यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि लखनऊ से आईं कलाकृतियों और संग्रहालय में पहले से मौजूद वस्तुओं को नए ढंग से प्रदर्शित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि इन्हें शीघ्र ही प्रदर्शित किया जाएगा।