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Kushinagar News: स्तनपान से स्वस्थ शिशु, सशक्त मां की मजबूत नींव
Thu, 06 Aug 2026 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 06 Aug 2026 01:16 AM IST
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सुकरौली। विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों ने माताओं से जन्म के पहले घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान शुरू कराने और छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की अपील की। उनका कहना है कि स्तनपान केवल शिशु के पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि मां और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य तथा महिला सशक्तीकरण की मजबूत आधारशिला भी है।
देवतहां सीएचसी पर तैनाती स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ विनिशा सिंह मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण, कुपोषण व कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा इसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है। महिला चिकित्सकों का कहना है कि स्तनपान से शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। वहीं माताओं में प्रसव के बाद तेजी से स्वास्थ्य लाभ, रक्तस्राव में कमी तथा स्तन और अंडाशय के कैंसर का जोखिम घटने जैसे लाभ भी मिलते हैं। नियमित स्तनपान मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। उन्होने बताया कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि स्तनपान कराने वाली माताओं को सहयोग, सम्मान और अनुकूल वातावरण मिले। जागरूकता बढ़ने से स्वस्थ परिवार के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना नवजात के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत है। मां का पहला दूध बच्चे को संक्रमण से बचाने में बेहद प्रभावी होता है। प्रत्येक मां को छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, क्योंकि यही बच्चे के स्वस्थ भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।
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देवतहां सीएचसी पर तैनाती स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ विनिशा सिंह मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण, कुपोषण व कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा इसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है। महिला चिकित्सकों का कहना है कि स्तनपान से शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। वहीं माताओं में प्रसव के बाद तेजी से स्वास्थ्य लाभ, रक्तस्राव में कमी तथा स्तन और अंडाशय के कैंसर का जोखिम घटने जैसे लाभ भी मिलते हैं। नियमित स्तनपान मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। उन्होने बताया कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि स्तनपान कराने वाली माताओं को सहयोग, सम्मान और अनुकूल वातावरण मिले। जागरूकता बढ़ने से स्वस्थ परिवार के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना नवजात के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत है। मां का पहला दूध बच्चे को संक्रमण से बचाने में बेहद प्रभावी होता है। प्रत्येक मां को छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, क्योंकि यही बच्चे के स्वस्थ भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।
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