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Kushinagar News: बिल में खेल कर छोटी दुकानों में हो रहा बड़ा धंधा

Thu, 20 Feb 2025 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 20 Feb 2025 12:18 AM IST
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Big business is being done in small shops by playing in the bills
पडरौना। छोटी दुकानों में सोने का अवैध धंधा संचालित हो रहा है। चंद आभूषणों के पक्के बिल देकर बाकी के आभूषण पर फर्जी हॉलमार्क लगाकर कच्चे बिल के सहारे खपत की जाती है। चोरी, लूट जैसी घटनाओं के बाद बिल न दिखा पाने पर यह खुलासे हुए हैं। इन मामलों में आभूषण विक्रेता लूट के सापेक्ष बिल नहीं दिखा सके।
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बिहार से जुड़े इलाके सेवरही, दुदही, तरयासुजान के अलावा तुर्कपट्टी, फाजिलनगर, कसया के धंधेबाज लगातार ग्रामीणों को हॉलमार्क और बिल की आड़ में ठगी का शिकार बना रहे हैं। जागरूकता के अभाव में लोगों को न तो इसकी जानकारी होती है और न ही जांच के लिए जिले स्तर पर कोई केंद्र है।
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बरवापट्टी के धोबीघटवा बाजार में हुए आभूषण लूट मामले में पुलिस 83 हजार के जेवर की ही लूट के आधार पर छानबीन कर रही है, जबकि मीडिया से बातचीत में दुकानदार ने 400-500 ग्राम आभूषण कीमत 30-32 लाख के लूट की बात की है।
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पुलिस पक्के बिल के हिसाब से गायब हुए सोने के लूट को ही आधार बनाकर जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि आभूषणों से संबंधित बिल मांगने पर दुकानदार इसे नहीं दिखा सका है।
सहालग का दौर चल रहा है। त्योहारों के अलावा इन्हीं मांगलिक कार्यक्रमों के सोने के आभूषण को लोग अधिक खरीदते हैं। जिले के औसतन हर छोटे बाजारों में आभूषण के दुकान हैं। कुछ पर मिश्रित तरीके (बर्तन के दुकान के साथ) ही इसे संचालित किया जाता है। मांगलिक कार्यक्रमों के दौर में घर-घर महिलाएं अपने आसपास की आभूषण की दुकानों से ही खरीदारी करती हैं।
गांव में हॉलमार्क, टैक्स, पक्की और कच्ची बिल की जानकारी न होने के चलते धंधेबाज फर्जी हॉलमार्किंग का सहारा लेकर पक्के एवं पारदर्शी के बजाय बिल के नाम पर पेन से लिखी पर्ची ग्राहक को थमा दे रहे हैं। अगर कहीं कंप्यूटराइज्ड बिल भी दिया भी जाए तो उसमें यह स्पष्ट नहीं होता कि किस आभूषण में कितना शुद्ध सोना है और कितनी मात्रा में अन्य धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। जबकि, कच्चे बिल में वजन के हिसाब से सोने का ताजा रेट दर्शाकर कच्चे बिल पर भी धंधेबाज जीएसटी लगा कर बिल दे देते हैं।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की कई सराफा दुकानों में बड़े पैमाने पर सोना खपाया जा रहा है। ग्राहक को संतुष्ट करने के लिए इसमें कुछ छूट भी दे दी जाती है और कुछ माह के तकाजे पर उधार भी मुहैया कराया जाता है। इससे खरीदार महिलाओं और लोगों का विश्वास बढ़ता है। जानकारों के अनुसार 24 कैरट का सोना असली होता है। मगर, ज्वेलरी 18 कैरेट सोना में ही तैयार होती है। इसे टिकाऊ बनाने के लिए अन्य धातु का इस्तेमाल किया जाता है।

मूल्य निर्धारित करते समय सोना का ताजा रेट और आभूषण में इस्तेमाल सोना की मात्रा स्पष्ट होनी चाहिए। मगर, बिल में इसका उल्लेख नहीं रहता है। सिर्फ आभूषण का वजन और मूल्य लिखकर पर्ची थमा दी जाती है।
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