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धरोहरों की सुरक्षा में हो रही लापरवाही
Kushinagar
Updated Tue, 19 Apr 2016 12:07 AM IST
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कुशीनगर के प्रतिबंधित क्षेत्र मंे खड़े वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
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पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारकों और धरोहरों की सुरक्षा, संरक्षण और आसपास पास स्वच्छता के लिए सोमवार (18 अप्रैल) को विश्व धरोहर दिवस के साथ ही 16 से 30 अप्रैल तक स्वच्छता पखवाड़ा मना रहा है। लेकिन महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली में इसकी झलक नजर नहीं आ रही। वहीं पर्यटन विभाग के अफसर कम कर्मचारियों के कारण ठीक तरीके से निगरानी न होने की बात कह रहे हैं।
कुशीनगर स्थित महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली, माथा कुंवर मंदिर और रामाभार स्तूप संरक्षित क्षेत्र हैं। यहां खुदाई में महत्वपूर्ण पुरावशेष मिले हैं। पुरातत्व विभाग समय-समय पर पुरावशेषों के संरक्षण का कार्य भी करता है। लेकिन धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षा के अलावा आसपास सफाई व्यवस्था को लेकर विभाग के अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।
स्थिति यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में लोग बिना रोकटोक के वाहन खड़ा करके चल देते हैं और उन्हें कोई बोलने वाला नहीं है। वहीं स्वच्छता पखवाड़े में परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर दिख रहे हैं।
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सोमवार को सुल्तानपुर जिले से आए डॉ. एसबी सिंह भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा का दर्शन करने के लिए कार से आए। प्रतिबंधित क्षेत्र के गेट पर जब वह वाहन खड़ा करने जाने लगे तो उनसे ‘अमर उजाला’ प्रतिनिधि ने जब उन्हें जिम्मेदारी का अहसास कराया तो उन्होंने पहले कार दूर खड़ी की और उसके बाद बोले, पुरातात्विक महत्व के धरोहरों को संरक्षित और सुरक्षित रखने में सहयोग करने की जिम्मेदारी सबकी है।
पडरौना तहसील के चौरा खास गांव निवासी मंटू चौहान भी जब बाइक प्रतिबंधित क्षेत्र में खड़ी कर जाने लगे। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इंकार कर दिया और बाइक दूर खड़ी कर दी।
हैदराबाद से आए पर्यटक राममनोहर मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के सामने हाथ में पानी का बोतल लेकर खडे़ थे। उनसे भी बात धरोहरों को खतरा न पहुंचे, इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पुरातत्व व पर्यटन विभाग के कर्मचारियों को लोगों को जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बोतल बाहर जाकर कूड़ेदान में ही फेकेंगे।
पुरातत्व संरक्षण अधिकारी पंकज तिवारी ने बताया कि केवल विभाग ही संरक्षण, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार नहीं है। इस कार्य में क्षेत्रीय लोगों को भी सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण ठीक तरीके से निगरानी नहीं हो पाती।
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कुशीनगर स्थित महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली, माथा कुंवर मंदिर और रामाभार स्तूप संरक्षित क्षेत्र हैं। यहां खुदाई में महत्वपूर्ण पुरावशेष मिले हैं। पुरातत्व विभाग समय-समय पर पुरावशेषों के संरक्षण का कार्य भी करता है। लेकिन धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षा के अलावा आसपास सफाई व्यवस्था को लेकर विभाग के अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।
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स्थिति यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में लोग बिना रोकटोक के वाहन खड़ा करके चल देते हैं और उन्हें कोई बोलने वाला नहीं है। वहीं स्वच्छता पखवाड़े में परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर दिख रहे हैं।
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सोमवार को सुल्तानपुर जिले से आए डॉ. एसबी सिंह भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा का दर्शन करने के लिए कार से आए। प्रतिबंधित क्षेत्र के गेट पर जब वह वाहन खड़ा करने जाने लगे तो उनसे ‘अमर उजाला’ प्रतिनिधि ने जब उन्हें जिम्मेदारी का अहसास कराया तो उन्होंने पहले कार दूर खड़ी की और उसके बाद बोले, पुरातात्विक महत्व के धरोहरों को संरक्षित और सुरक्षित रखने में सहयोग करने की जिम्मेदारी सबकी है।
पडरौना तहसील के चौरा खास गांव निवासी मंटू चौहान भी जब बाइक प्रतिबंधित क्षेत्र में खड़ी कर जाने लगे। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इंकार कर दिया और बाइक दूर खड़ी कर दी।
हैदराबाद से आए पर्यटक राममनोहर मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के सामने हाथ में पानी का बोतल लेकर खडे़ थे। उनसे भी बात धरोहरों को खतरा न पहुंचे, इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पुरातत्व व पर्यटन विभाग के कर्मचारियों को लोगों को जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बोतल बाहर जाकर कूड़ेदान में ही फेकेंगे।
पुरातत्व संरक्षण अधिकारी पंकज तिवारी ने बताया कि केवल विभाग ही संरक्षण, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार नहीं है। इस कार्य में क्षेत्रीय लोगों को भी सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण ठीक तरीके से निगरानी नहीं हो पाती।