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प्राथमिक विद्यालयों का लाइव
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सिर्फ एक दिन की जागरूकता, फिर पहले सी लापरवाही
कोरोना संक्रमण के प्रति सभी स्कूलों में बरती जा रही है लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। एक सितंबर को प्राथमिक विद्यालयों के खुलने पर कोविड से बचाव को लेकर जागरूकता पर ज्यादा जोर दिया गया था। स्कूलों के गेट पर ही थर्मल स्क्रीनिंग, सैनीटाइजेशन, मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग की अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया गया, लेकिन दो सप्ताह बाद स्थिति बिल्कुल विपरीत है। सरकारी स्कूलों में अब न तो थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है और न ही मास्क, सैनीटाइजेशन पर जोर है। बच्चों को क्लास में बैठाते समय सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल भी नहीं रखा जा रहा है। सोमवार को हाटा क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा दो की छात्रा की एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद विद्यालयों की व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न उठने लगा है।
16 से माध्यमिक, 23 अगस्त से जूनियर और बीते एक सितंबर से प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई शुरू करा दिया गया। स्कूल खुलने पर शासन ने सभी स्कूलों में कोरोना गाइड लाइन का पालन करने के अलावा विद्यालय गेट पर थर्मल स्क्रिनिंग कर सैनीटाइज कराने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा बिना मास्क की भी अनिवार्यता थी। स्कूल खुलने के दौरान कुछ दिनों तक कोरोना गाइड लाइन की पालन किया, लेकिन धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण के खौफ को भूलकर लापरवाही बरतनी शुरू हो गई। मंगलवार को कुछ परिषदीय विद्यालय और माध्यमिक विद्यालयों की पड़ताल की तो हर जगह कोरोना संक्रमण के प्रति लापरवाही सामने आई। हाटा प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को सुकरौली ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सेमरी में सुबह साढे़ 11 बजे स्कूल परिसर में बच्चे खेल रहे थे। इस दौरान किसी के चेहरे पर मास्क नहीं थे। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं दिखा। प्रधानाध्यापक सुशीला पांडेय ने बताया कि थर्मल स्कैनिंग मशीन और सैनेटाइजर नहीं है। प्राथमिक विद्यालय तितला में भी बच्चे बिना मास्क के ही स्कूल आए थे। प्रधानाध्यापक प्रशांत वर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में बीईओ उदय शंकर राय ने बताया कि मास्क, सेनेटाइजर और थर्मल स्कैनिंग मशीन के लिए विद्यालयों को जिम्मेदारी दी गई है। उन्हीं के स्तर से सब व्यवस्थाएं होनी है। कसया प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय भैंसहा, पकड़िहवा में कोविड से बचाव व उसके गाइडलाइन के बगैर अनुपालन के बीच बच्चे पढ़ाई करते मिले। विद्यालय की प्रधानाध्यापक सीमा राव, सहायक अध्यापक रजनी यादव व शिक्षामित्र कुसुमलता यादव व पुष्पा त्रिपाठी बच्चों को फर्श पर बैठाकर पढ़ाती मिलीं। आलम यह था कि विद्यालय में न तो कोई बच्चा मॉस्क लगाए था और न ही कोई शिक्षक। इस संबंध में बीईओ सत्येंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन के अनुपालन के लिए निर्देश दिए गए हैं। बरवापट्टी प्रतिनिधि के अनुसार दुदही ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में भी कोरोना गाइड लाइन के प्रति जिम्मेदार लापरवाह हैं। सरकार का निर्देश है कि स्कूल के कक्षाओं को प्रतिदिन सैनीटाइज करना है। कुछ विद्यालयों में दिखावे के लिए सैनीटाइजर रखे गए थे। अमवादीगर के कई प्राथमिक विद्यालयों व इंटर कालेजों में अधिकांश स्कूलों के बच्चों में मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखी। कई प्राथमिक विद्यालयों में सैनीटाइजर तक की भी व्यवस्था नहीं थी। इस बाबत बीएसए विमलेश कुमार ने बताया कि मास्क, हैंडवाश और सैनीटाइजर सभी विद्यालयों में भेजवाया गया है। जो बच्चे बिना मास्क के विद्यालय में पढ़ने आए, शिक्षक उन्हें तत्काल उपलब्ध कराएं।
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कोरोना संक्रमण के प्रति सभी स्कूलों में बरती जा रही है लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। एक सितंबर को प्राथमिक विद्यालयों के खुलने पर कोविड से बचाव को लेकर जागरूकता पर ज्यादा जोर दिया गया था। स्कूलों के गेट पर ही थर्मल स्क्रीनिंग, सैनीटाइजेशन, मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग की अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया गया, लेकिन दो सप्ताह बाद स्थिति बिल्कुल विपरीत है। सरकारी स्कूलों में अब न तो थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है और न ही मास्क, सैनीटाइजेशन पर जोर है। बच्चों को क्लास में बैठाते समय सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल भी नहीं रखा जा रहा है। सोमवार को हाटा क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा दो की छात्रा की एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद विद्यालयों की व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न उठने लगा है।
16 से माध्यमिक, 23 अगस्त से जूनियर और बीते एक सितंबर से प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई शुरू करा दिया गया। स्कूल खुलने पर शासन ने सभी स्कूलों में कोरोना गाइड लाइन का पालन करने के अलावा विद्यालय गेट पर थर्मल स्क्रिनिंग कर सैनीटाइज कराने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा बिना मास्क की भी अनिवार्यता थी। स्कूल खुलने के दौरान कुछ दिनों तक कोरोना गाइड लाइन की पालन किया, लेकिन धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण के खौफ को भूलकर लापरवाही बरतनी शुरू हो गई। मंगलवार को कुछ परिषदीय विद्यालय और माध्यमिक विद्यालयों की पड़ताल की तो हर जगह कोरोना संक्रमण के प्रति लापरवाही सामने आई। हाटा प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को सुकरौली ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सेमरी में सुबह साढे़ 11 बजे स्कूल परिसर में बच्चे खेल रहे थे। इस दौरान किसी के चेहरे पर मास्क नहीं थे। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं दिखा। प्रधानाध्यापक सुशीला पांडेय ने बताया कि थर्मल स्कैनिंग मशीन और सैनेटाइजर नहीं है। प्राथमिक विद्यालय तितला में भी बच्चे बिना मास्क के ही स्कूल आए थे। प्रधानाध्यापक प्रशांत वर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में बीईओ उदय शंकर राय ने बताया कि मास्क, सेनेटाइजर और थर्मल स्कैनिंग मशीन के लिए विद्यालयों को जिम्मेदारी दी गई है। उन्हीं के स्तर से सब व्यवस्थाएं होनी है। कसया प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय भैंसहा, पकड़िहवा में कोविड से बचाव व उसके गाइडलाइन के बगैर अनुपालन के बीच बच्चे पढ़ाई करते मिले। विद्यालय की प्रधानाध्यापक सीमा राव, सहायक अध्यापक रजनी यादव व शिक्षामित्र कुसुमलता यादव व पुष्पा त्रिपाठी बच्चों को फर्श पर बैठाकर पढ़ाती मिलीं। आलम यह था कि विद्यालय में न तो कोई बच्चा मॉस्क लगाए था और न ही कोई शिक्षक। इस संबंध में बीईओ सत्येंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन के अनुपालन के लिए निर्देश दिए गए हैं। बरवापट्टी प्रतिनिधि के अनुसार दुदही ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में भी कोरोना गाइड लाइन के प्रति जिम्मेदार लापरवाह हैं। सरकार का निर्देश है कि स्कूल के कक्षाओं को प्रतिदिन सैनीटाइज करना है। कुछ विद्यालयों में दिखावे के लिए सैनीटाइजर रखे गए थे। अमवादीगर के कई प्राथमिक विद्यालयों व इंटर कालेजों में अधिकांश स्कूलों के बच्चों में मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखी। कई प्राथमिक विद्यालयों में सैनीटाइजर तक की भी व्यवस्था नहीं थी। इस बाबत बीएसए विमलेश कुमार ने बताया कि मास्क, हैंडवाश और सैनीटाइजर सभी विद्यालयों में भेजवाया गया है। जो बच्चे बिना मास्क के विद्यालय में पढ़ने आए, शिक्षक उन्हें तत्काल उपलब्ध कराएं।
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