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पुल के नाम पर 30 साल से मिल रहा आश्वासन
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 07 Jan 2018 12:33 AM IST
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पुल के नाम पर 30 साल से मिल रहा आश्वासन
- फोटो : अमर उजाला
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दुदही (कुशीनगर)। कुशीनगर जनपद के बांसी नदी के गौरी जगदीश घाट पर पुल के अभाव में पांच साल में कई बड़े हादसे हो चुके हैं। उसके बाद भी शासन - प्रशासन इसे लेकर गंभीर नहीं है। इस घाट पर बना बांस का पुल पिछले वर्ष जनवरी में ही मौनी अमावस्या के मेला के दौरान टूट गया था। उस दरम्यान बांस के पुल के जरिए नदी पार कर रहे 50 से अधिक लोग गिर जाने से डूबने लगे थे।
प्रशासन ने मछुआरों की मदद से सभी लोगों को सकुशल नदी से बाहर निकाला था। अभी शुक्रवार को सुभावती नाम की एक महिला अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए घाट पर बैठी घंटों नाव का इंतजार करती रह गई थी।
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के गौरी जगदीश गांव की बिंद टोली के पास गौरीघाट है। जिस पर पुल बनाने की मांग गांववाले 30 साल से करते चले आ रहे हैं। पुल के लिए कई बार गांव के लोग प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन गौरी जगदीश, बिंद टोली, सिसवनिया, लाला टोला, नारायणपुर, बकुलहवा, भुआल पट्टी, तिवारी पट्टी, मंझरिया, रामपुर पट्टी, भवानीपुर, डीही, कोरपट्टी सहित एक दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों को पुल के नाम पर हर बार आश्वासनों की घुट्टी मिलती रही है। इससे विवश होकर ग्रामीण हर साल आने-जाने के लिए चंदा जुटाकर गौरी घाट पर बांस व लकड़ी के सहारे पुल बनाते हैं, जो बरसात में नदी में बाढ़ आने के साथ ही बह जाता है।
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बरसात के बाद एक बार फिर ग्रामीण चंदा लगाकर अस्थाई पुल का निर्माण कराते हैं। यह प्रक्रिया दशकों से चली आ रही है। इस बार नदी के उफना जाने से जनवरी में ही पुल बह गया है। इससे अचानक लोगों के समक्ष संकट की स्थिति पैदा हो गई है। लोगों को खतरा उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है।
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प्रशासन ने मछुआरों की मदद से सभी लोगों को सकुशल नदी से बाहर निकाला था। अभी शुक्रवार को सुभावती नाम की एक महिला अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए घाट पर बैठी घंटों नाव का इंतजार करती रह गई थी।
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तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के गौरी जगदीश गांव की बिंद टोली के पास गौरीघाट है। जिस पर पुल बनाने की मांग गांववाले 30 साल से करते चले आ रहे हैं। पुल के लिए कई बार गांव के लोग प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन गौरी जगदीश, बिंद टोली, सिसवनिया, लाला टोला, नारायणपुर, बकुलहवा, भुआल पट्टी, तिवारी पट्टी, मंझरिया, रामपुर पट्टी, भवानीपुर, डीही, कोरपट्टी सहित एक दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों को पुल के नाम पर हर बार आश्वासनों की घुट्टी मिलती रही है। इससे विवश होकर ग्रामीण हर साल आने-जाने के लिए चंदा जुटाकर गौरी घाट पर बांस व लकड़ी के सहारे पुल बनाते हैं, जो बरसात में नदी में बाढ़ आने के साथ ही बह जाता है।
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बरसात के बाद एक बार फिर ग्रामीण चंदा लगाकर अस्थाई पुल का निर्माण कराते हैं। यह प्रक्रिया दशकों से चली आ रही है। इस बार नदी के उफना जाने से जनवरी में ही पुल बह गया है। इससे अचानक लोगों के समक्ष संकट की स्थिति पैदा हो गई है। लोगों को खतरा उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है।