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Kushinagar News: फेसलेस एवं निजीकरण के विरोध में एआरटीओ के वकीलों ने सौंपा ज्ञापन
Tue, 21 Jul 2026 02:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 21 Jul 2026 02:04 AM IST
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पडरौना। जनपद ट्रांसपोर्ट एवं बार एसोसिएशन की तरफ से तरफ से सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर सीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। अधिवक्ताओं ने फेसलेस और विभागीय कार्यों को निजी संस्थाओं को हस्तांतरित करने का विरोध करते हुए सरकार की तरफ से लिए गए इस निर्णय को वापस लेने की मांग की।
संगठन के अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सहाय ने कहा कि डिजिटल सेवाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है, लेकिन जिन कायों में भौतिक सत्यापन, पक्षकारों की उपस्थिति, पहचान और अभिलेखों का भौतिक परीक्षण आवश्यक है, उन्हें फेसलेस अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित करना गंभीर प्रशासनिक, कानूनी एवं सामाजिक समस्याओं को जन्म देगा।
वाहन स्वामित्व अंतरण, डुप्लीकेट पंजीयन प्रमाणपत्र (आरसी) एवं निरस्तीकरण, फॉर्म-29, फॉर्म-30, फॉर्म-35, फॉर्म-36 और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं में पक्षकारों की पहचान एवं दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक होता है। ऐसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह फेसलेस करना विधिक भावना के अनुरूप नहीं है।
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यही नहीं वाहन का क्रय-विक्रय, क्रेता एवं विक्रेता की स्वतंत्र सहमति पर आधारित होता है। केवल ओटीपी आधारित स्वीकृति को मान लेने से वास्तविक सहमति का सत्यापन कठिन हो जाएगा। वाहन फिटनेस की व्यवस्था भी निजी कंपनियों को सौंपने से भी अनियमितता का जन्म देगा।
इस दौरान मनोज सिंह, राजकुमार जायसवाल, हरेंद्र गुप्ता, हरिहर पांडेय, अशोक श्रीवास्तव, बृज किशोर शुक्ला, सुधीर श्रीवास्तव, गोपीकृष्ण गुप्ता, अशोक कुमार शर्मा, विनोद सिंह, ओमप्रकाश यादव, शैलेश मिश्र, आशीष श्रीवास्तव, रितेश राय आदि मौजूद रहे।
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संगठन के अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सहाय ने कहा कि डिजिटल सेवाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है, लेकिन जिन कायों में भौतिक सत्यापन, पक्षकारों की उपस्थिति, पहचान और अभिलेखों का भौतिक परीक्षण आवश्यक है, उन्हें फेसलेस अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित करना गंभीर प्रशासनिक, कानूनी एवं सामाजिक समस्याओं को जन्म देगा।
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वाहन स्वामित्व अंतरण, डुप्लीकेट पंजीयन प्रमाणपत्र (आरसी) एवं निरस्तीकरण, फॉर्म-29, फॉर्म-30, फॉर्म-35, फॉर्म-36 और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं में पक्षकारों की पहचान एवं दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक होता है। ऐसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह फेसलेस करना विधिक भावना के अनुरूप नहीं है।
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यही नहीं वाहन का क्रय-विक्रय, क्रेता एवं विक्रेता की स्वतंत्र सहमति पर आधारित होता है। केवल ओटीपी आधारित स्वीकृति को मान लेने से वास्तविक सहमति का सत्यापन कठिन हो जाएगा। वाहन फिटनेस की व्यवस्था भी निजी कंपनियों को सौंपने से भी अनियमितता का जन्म देगा।
इस दौरान मनोज सिंह, राजकुमार जायसवाल, हरेंद्र गुप्ता, हरिहर पांडेय, अशोक श्रीवास्तव, बृज किशोर शुक्ला, सुधीर श्रीवास्तव, गोपीकृष्ण गुप्ता, अशोक कुमार शर्मा, विनोद सिंह, ओमप्रकाश यादव, शैलेश मिश्र, आशीष श्रीवास्तव, रितेश राय आदि मौजूद रहे।