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Kushinagar News: एएनएम निलंबित, आशा और सेवा संगिनी होंगी बर्खास्त

Tue, 24 Sep 2024 06:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Tue, 24 Sep 2024 06:20 AM IST
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ANM suspended, Asha and Seva Sangini will be dismissed
बरवापट्टी। प्रसव के बाद महिला और नवजात को बंधक बनाने और बच्चे को बेचने के मामले में सीएमओ ने दशहवा सीएचसी में तैनात एएनएम को निलंबित कर दिया है। आशा कार्यकर्ता और आशा संगिनी को बर्खास्त करने के लिए संस्तुति की है। सुपरवाइजर की वेतन वृद्धि रोकने के साथ एमओआईसी को शिथिल प्रर्यवेक्षण के लिए प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। परड़ित हरेश का आयुष्मान कार्ड भी बना दिया गया है।
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दुदही ब्लॉक दशहवा गांव निवासी हरेश पटेल की पत्नी को पांच सितंबर को प्रसव पीड़ा हुई तो गांव के पास अवैध तरीके से संचालित खुशी क्लीनिक में भर्ती कराया। नार्मल प्रसव के बाद अस्पताल संचालक तारा कुशवाहा ने पांच हजार रुपये की मांग की। आर्थिक तंगी से जूझ रहे हरेश ने रुपये बाद में देने की बात कही। इस पर अस्पताल संचालक ने जच्चा-बच्चा को बंधक बना लिया।
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आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हरेश बिहार के एक दलाल के माध्यम से पटहेरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले भोला यादव को बीस हजार रुपये में नवजात को बेच दिया। मामला उजागर होने के बाद पुलिस-प्रशासन सक्रिय हुआ और गरीबी का लाभ उठाकर बच्चे की खरीद फरोख्त करने वाली अस्पताल संचालिका समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर उन्हें जेल भिजवा दिया। सीएमओ ने जांच के लिए टीम गठित की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ ने दशहवा सीएचसी में तैनात एएनएम निहारिका सिंह, आशा कार्यकर्ता सोनी पाल, आशा संगिनी नूरजहां खातून, सुपरवाइजर राजन वर्मा, एमओआईसी डॉ. संदीप कुमार को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है।
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आनन-फानन में शुरू कराया आवास का निर्माण
-बरवापट्टी के दशहवा निवासी पीड़ित हरेश के घर डीएम और एसपी पहुंचे तो सड़क की जमीन पर उसकी झोपड़ी देख दंग रह गए। दुदही ब्लॉक के अफसरों ने बताया कि वर्ष 2020-21 में हरेश को आवास योजना का लाभ दिया गया था, लेकिन उसने रुपये खर्च कर दिए। अफसरों की जांच-पड़ताल की तो मालूम हुआ कि नियम को दरकिनार कर आवास की रकम हरेश को दी गई थी। नियमानुसार प्रथम किस्त से नींव बनने के बाद, दीवार के लिए दूसरी किस्त और छत के लिए तीसरी किस्त मिलती है, जबकि बिना निर्माण कराए ही कमीशन के चक्कर में पूरी रकम दे दी गई थी। हरेश ने बताया कि 1.20 लाख की जगह 70 हजार रुपये ही उसे मिले थे। बाकी रुपये जिम्मेदार खाते में आने के बाद ले लिए। उस समय पत्नी बीमार थी। इलाज में रुपये खर्च हो गए। चर्चा है कि ब्लॉक के अधिकारियों ने चंदा लगाकर सरकारी आवास का निर्माण शुरू करा दिया है। दुदही ब्लॉक के बीडीओ रामराज कुशवाहा ने बताया कि हरेश का आवास तो जब रुपये निकला था तभी बन गया था। बच्चा बेचने की घटना के समय कराई गई जांच में यह रिपोर्ट आई थी। इन दिनों उसके आवास का निर्माण कराया जा रहा है। इसकी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच करा ली जाएगी।
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