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Kushinagar News: तकनीकी टीम के सर्वे के बाद काम में तेजी आने की जगी उम्मीद
Fri, 15 Dec 2023 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 15 Dec 2023 01:05 AM IST
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कुशीनगर कृषि विश्वविद्यालय का नजरी नक्शा।
पडरौना। कुशीनगर में बनने वाले महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के लिए तकनीकी टीम के सर्वे के बाद यहां काम में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है। इसके बन जाने से गोरखपुर और बस्ती मंडल के लोग लाभा न्वित होंगे। शोध के लिए यहां असीम संभावनाएं जताई जा रही हैं।
शासन से नियुक्त आर्क एंड डिजाइनिंग के दो सदस्यीय टीम के श्यामाचरण शुक्ल व सोनू सिंह पटेल राजस्व टीम के राजस्व निरीक्षक व लेखपाल के साथ तीन दिवसीय सर्वे का काम पूरा करके जा चुके हैं। इनकी तरफ से जगह-जगह जमीन के चिह्नीकरण का काम पूरा किया गया है।
यहां बता दें कि कुशीनगर जिले को फरवरी 2023 में पेश हुए बजट में महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की मंजूरी मिली थी। 28 जून 2023 को हुई बैठक में प्रदेश की कैबिनेट इसे मंजूरी भी दे चुकी है। बीते 27 जून 2023 को अपर मुख्य सचिव कृषि एवं कृषि अनुसंधान डॉ. देवेश चतुर्वेदी के साथ तत्कालीन डीएम रमेश रंजन ने गाजीपुर स्थित फार्म सहित तीन जगहों पर निरीक्षण कर कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की संभावना तलाशी थी।
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कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय के खुलने से गोरखपुर और बस्ती मंडल के सभी सात जिलों में लोग लाभांवित होंगे। चूंकि यहां गन्ना, हल्दी और सब्जी की खेती बहुतायत में होती है। इसलिए यह क्षेत्र कृषि का हब माना जाता है। ऐसे में अब शिक्षार्थियों को कृषि शिक्षा के लिए अंयत्र नहीं जाना पड़ेगा। कुशीनगर जनपद में बहुत से लोग कृषि पर निर्भर हैं। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े कई इलाके आज भी पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है, लेकिन किसान इस पिछड़े क्षेत्र की धरती से भी सोना उगलवाने का दमखम रखते हैं। यहां के किसान बालू के टीले पर सागौन उगाकर और लीक से हटकर खेती से यह साबित भी कर रहे हैं। गन्ना बहुलता वाला जिला मूल रूप से कृषि पर आधारित है। यहां के युवा कृषि पर शोध और शिक्षा के लिए दूर जाते रहते थे। उन्हें वह सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिसके लिए उन्हें दूर जाना पड़ता है। ऐसे में माना जा रहा है कि कृषि विश्वविद्यालय के बन जाने से शिक्षा के क्षेत्र में काफी उन्नति आएगी।
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इस वजह से नहीं हो पाया था शिलान्यास, फिर आ रही तेजी
बीते सात जुलाई 2023 को कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आधारशिला रखने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। प्रशासन की तरफ से राष्ट्रीय राजमार्ग 28 स्थित बरवां जंगल फार्म यानी राजकीय आलू प्रक्षेत्र, कसया में पंडाल, मंच, हेलीपैड, स्विस काॅटेज समेत तमाम तैयारियां चल रही थीं। अचानक से बारिश व खराब मौसम की संभावना जताते हुए प्रदेश स्तर से निरीक्षण करने पहुंचे आला अफसरों ने मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट व जानकारी संबंधित को भेजकर अवगत कराया था। उसके चलते शिलान्यास कार्यक्रम रद हो गया था। अब दूसरी बार तैयारी व निर्माण को लेकर गतिविधियां तेज हुईं हैं।
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शासन से नियुक्त टेक्निकल टीम भूमि का सर्वे कर चुकी है। तीन दिनों के सर्वे के दौरान उनके साथ राजस्व टीम भी मौजूद थी। अब कृषि विश्वविद्यालय से संंबंधित कार्यों में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है। -योगेश्वर सिंह, एसडीएम, कसया।
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शासन से नियुक्त आर्क एंड डिजाइनिंग के दो सदस्यीय टीम के श्यामाचरण शुक्ल व सोनू सिंह पटेल राजस्व टीम के राजस्व निरीक्षक व लेखपाल के साथ तीन दिवसीय सर्वे का काम पूरा करके जा चुके हैं। इनकी तरफ से जगह-जगह जमीन के चिह्नीकरण का काम पूरा किया गया है।
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यहां बता दें कि कुशीनगर जिले को फरवरी 2023 में पेश हुए बजट में महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की मंजूरी मिली थी। 28 जून 2023 को हुई बैठक में प्रदेश की कैबिनेट इसे मंजूरी भी दे चुकी है। बीते 27 जून 2023 को अपर मुख्य सचिव कृषि एवं कृषि अनुसंधान डॉ. देवेश चतुर्वेदी के साथ तत्कालीन डीएम रमेश रंजन ने गाजीपुर स्थित फार्म सहित तीन जगहों पर निरीक्षण कर कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की संभावना तलाशी थी।
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कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय के खुलने से गोरखपुर और बस्ती मंडल के सभी सात जिलों में लोग लाभांवित होंगे। चूंकि यहां गन्ना, हल्दी और सब्जी की खेती बहुतायत में होती है। इसलिए यह क्षेत्र कृषि का हब माना जाता है। ऐसे में अब शिक्षार्थियों को कृषि शिक्षा के लिए अंयत्र नहीं जाना पड़ेगा। कुशीनगर जनपद में बहुत से लोग कृषि पर निर्भर हैं। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े कई इलाके आज भी पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है, लेकिन किसान इस पिछड़े क्षेत्र की धरती से भी सोना उगलवाने का दमखम रखते हैं। यहां के किसान बालू के टीले पर सागौन उगाकर और लीक से हटकर खेती से यह साबित भी कर रहे हैं। गन्ना बहुलता वाला जिला मूल रूप से कृषि पर आधारित है। यहां के युवा कृषि पर शोध और शिक्षा के लिए दूर जाते रहते थे। उन्हें वह सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिसके लिए उन्हें दूर जाना पड़ता है। ऐसे में माना जा रहा है कि कृषि विश्वविद्यालय के बन जाने से शिक्षा के क्षेत्र में काफी उन्नति आएगी।
इस वजह से नहीं हो पाया था शिलान्यास, फिर आ रही तेजी
बीते सात जुलाई 2023 को कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आधारशिला रखने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। प्रशासन की तरफ से राष्ट्रीय राजमार्ग 28 स्थित बरवां जंगल फार्म यानी राजकीय आलू प्रक्षेत्र, कसया में पंडाल, मंच, हेलीपैड, स्विस काॅटेज समेत तमाम तैयारियां चल रही थीं। अचानक से बारिश व खराब मौसम की संभावना जताते हुए प्रदेश स्तर से निरीक्षण करने पहुंचे आला अफसरों ने मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट व जानकारी संबंधित को भेजकर अवगत कराया था। उसके चलते शिलान्यास कार्यक्रम रद हो गया था। अब दूसरी बार तैयारी व निर्माण को लेकर गतिविधियां तेज हुईं हैं।
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शासन से नियुक्त टेक्निकल टीम भूमि का सर्वे कर चुकी है। तीन दिनों के सर्वे के दौरान उनके साथ राजस्व टीम भी मौजूद थी। अब कृषि विश्वविद्यालय से संंबंधित कार्यों में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है। -योगेश्वर सिंह, एसडीएम, कसया।