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Kushinagar News: फसल कटने के बाद भूमि अधिग्रहण पर बढ़ी रार
Tue, 05 May 2026 01:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 05 May 2026 01:41 AM IST
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सुकरौली। ढाढ़ा चीनी मिल क्षेत्र के हरपुर गांव में अधिग्रहित भूमि को लेकर मिल प्रबंधन और किसानों के बीच चल रहा विवाद अब बढ़ने की आशंका है। शनिवार को हुई विवाद के बाद मिल प्रबंधन ने सात लोगों पर मुकदमा दर्ज कराई है। अब फसल भी कट चुकी है इसलिए मिल की ओर से अपनी जमीन को अपने कब्जे में लेने की तैयारी भी चल रही है।
एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि जिन किसानों को मुआवजा मिल चुका है, उनकी जमीनों का अधिग्रहण चीनी प्रबंधन मिल कर रहा था। इसकी सूचना प्रशासन को भी थी। इसी दौरान कुछ लोगों के विरोध करने पर विवाद हो गया। उन्होंने कहा कि विवाद करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, मिल प्रबंधन का कहना है कि जिन जमीनों पर मिल का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो चुका है, उन पर हर हाल में कब्जा लिया जाएगा। मिल अपने अधिकार वाली जमीन को प्रशासनिक सहयोग से अपने कब्जे में लेने की तैयारी में है। हालांकि, प्रबंधन यह भी मानता है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के स्तर से पहल कर किसानों से बातचीत कराई जाए तो समाधान का रास्ता निकल सकता है।
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किसानों का पक्ष इससे अलग है। जिन किसानों ने अब तक मुआवजा नहीं लिया है, वे जमीन देने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि बिना पूर्ण सहमति और भुगतान के किसी भी प्रकार का कब्जा स्वीकार्य नहीं होगा। ऐसे में दोनों पक्षों के रुख से विवाद और गहराने के आसार बन रहे हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है। बेहतर होगा कि सभी किसानों को एक साथ मुआवजा दिलाकर संपूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद ही प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई हो। फिलहाल, यह मामला प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। एक ओर मिल प्रबंधन अपनी जमीन पर अधिकार चाहता है, तो दूसरी ओर किसान अपनी शर्तों पर अड़े हैं। ऐसे में संतुलित हस्तक्षेप और संवाद ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल सकता है।
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एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि जिन किसानों को मुआवजा मिल चुका है, उनकी जमीनों का अधिग्रहण चीनी प्रबंधन मिल कर रहा था। इसकी सूचना प्रशासन को भी थी। इसी दौरान कुछ लोगों के विरोध करने पर विवाद हो गया। उन्होंने कहा कि विवाद करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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दूसरी ओर, मिल प्रबंधन का कहना है कि जिन जमीनों पर मिल का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो चुका है, उन पर हर हाल में कब्जा लिया जाएगा। मिल अपने अधिकार वाली जमीन को प्रशासनिक सहयोग से अपने कब्जे में लेने की तैयारी में है। हालांकि, प्रबंधन यह भी मानता है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के स्तर से पहल कर किसानों से बातचीत कराई जाए तो समाधान का रास्ता निकल सकता है।
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किसानों का पक्ष इससे अलग है। जिन किसानों ने अब तक मुआवजा नहीं लिया है, वे जमीन देने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि बिना पूर्ण सहमति और भुगतान के किसी भी प्रकार का कब्जा स्वीकार्य नहीं होगा। ऐसे में दोनों पक्षों के रुख से विवाद और गहराने के आसार बन रहे हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है। बेहतर होगा कि सभी किसानों को एक साथ मुआवजा दिलाकर संपूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद ही प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई हो। फिलहाल, यह मामला प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। एक ओर मिल प्रबंधन अपनी जमीन पर अधिकार चाहता है, तो दूसरी ओर किसान अपनी शर्तों पर अड़े हैं। ऐसे में संतुलित हस्तक्षेप और संवाद ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल सकता है।