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Kushinagar News: बाड़ी नाले की पैमाइश के लिए टीम गठित, कब्जेदारों में हड़कंप
Wed, 27 May 2026 01:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 27 May 2026 01:52 AM IST
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पडरौना। शहर के बीच से निकले बाड़ी नाला पर बसी अवैध बस्ती के मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है। जांच और पैमाइश के लिए छह सदस्यीय टीम गठित की गई है। इससे कब्जेदारों में हड़कंप मच गया है।
मंगलवार टीम ने दौरा कर जायजा लिया। तहसीलदार अभिषेक मिश्र ने बताया कि बाड़ी नाले की जमीन की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए गठित छह सदस्यीय राजस्व कर्मियों की टीम गई थी। टीम ने भ्रमण कर नाले पर जगह-जगह हुए निर्माण का निरीक्षण किया। कहा कि गठित टीम उन स्थलों का पूरा ब्योरा तैयार करेगी,जहां पर अतिक्रमण कर दुकान व भवन बनाए गए हैं। टीम के सदस्य विभागीय अधिकारियों के साथ वार्ता कर आगे की कार्रवाई की तैयारी करेंगे।
शहर के बीच से निकला बाड़ी नाला साहबगंज, पडरौना चीनी मिल, रामधाम पोखरा, राजदरबार होते धोबहा के पास खिरकिया झरही नदी में मिलता है। 1980 के दशक में यह नाला शहर का लाइफ लाइन था। अविरल बह रहे नाले का पानी शहर की सुंदरता में चार चांद लगा रहा था। बाद में लोगों ने नाले की जमीन पर अतिक्रमण शुरू कर दिया। अब हालात ये हैं कि नाले की जमीन पर 200 से अधिक घर बन गए हैं, लेकिन राजस्व अभिलेख में आज भी नदी, जंगल व बंजर की भूमि दर्ज है। इसके बावजूद राजस्व कर्मियों की
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मिलीभगत से अभिलेखों में हेराफेरी कर लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया। इसके अलावा 100 से अधिक लोगों ने अवैध तरीके से नाले की जमीन पर पक्का मकान बनवा लिया है। एसडीएम आशुतोष कुमार ने बताया कि जांच के लिए टीम गठित की गई है।
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मंगलवार टीम ने दौरा कर जायजा लिया। तहसीलदार अभिषेक मिश्र ने बताया कि बाड़ी नाले की जमीन की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए गठित छह सदस्यीय राजस्व कर्मियों की टीम गई थी। टीम ने भ्रमण कर नाले पर जगह-जगह हुए निर्माण का निरीक्षण किया। कहा कि गठित टीम उन स्थलों का पूरा ब्योरा तैयार करेगी,जहां पर अतिक्रमण कर दुकान व भवन बनाए गए हैं। टीम के सदस्य विभागीय अधिकारियों के साथ वार्ता कर आगे की कार्रवाई की तैयारी करेंगे।
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शहर के बीच से निकला बाड़ी नाला साहबगंज, पडरौना चीनी मिल, रामधाम पोखरा, राजदरबार होते धोबहा के पास खिरकिया झरही नदी में मिलता है। 1980 के दशक में यह नाला शहर का लाइफ लाइन था। अविरल बह रहे नाले का पानी शहर की सुंदरता में चार चांद लगा रहा था। बाद में लोगों ने नाले की जमीन पर अतिक्रमण शुरू कर दिया। अब हालात ये हैं कि नाले की जमीन पर 200 से अधिक घर बन गए हैं, लेकिन राजस्व अभिलेख में आज भी नदी, जंगल व बंजर की भूमि दर्ज है। इसके बावजूद राजस्व कर्मियों की
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मिलीभगत से अभिलेखों में हेराफेरी कर लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया। इसके अलावा 100 से अधिक लोगों ने अवैध तरीके से नाले की जमीन पर पक्का मकान बनवा लिया है। एसडीएम आशुतोष कुमार ने बताया कि जांच के लिए टीम गठित की गई है।