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Kushinagar News: खैरवा घाट पर 25 करोड़ से बनेगा पुल, यूपी-बिहार के 50 हजार आबादी को मिलेगी सहूलियत
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- किसानों को हल्दी प्लांट तक पहुंचने में होगी सहूलियत, करीब 20 साल में नाव से नदी पार करते समय डूबने से हो चुकी है 11 लोगों की मौत
- बरसात में चार महीने पीपा पुल हटने से नाव के सहारे नदी पार करने की मजबूरी, पांच से दस किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाते हैं लोग
पडरौना/गोड़रिया। बांसी नदी के खैरवा घाट पर करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से 1100 मीटर लंबा पक्का पुल बनाने की विभागीय प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती गांवों के करीब 50 हजार लोगों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है। किसानों को हल्दी प्रसंस्करण प्लांट तक उपज पहुंचाने में भी सहूलियत होगी।
आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों के अत्याचार का गवाह रहा खैरवा घाट लंबे समय से पक्के पुल की जरूरत महसूस कर रहा है। स्थायी पुल नहीं होने से नदी के दोनों ओर बसे गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। सामान्य दिनों में पीपा पुल से नदी पार करने की सुविधा मिलती है, लेकिन बरसात में इसे हटा दिए जाने के बाद करीब चार महीने तक लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।
वहीं, वैकल्पिक रास्तों से पांच से दस किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इसका असर किसानों, विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों पर पड़ता है। लोगों को जरूरी काम से आने-जाने में अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। खासकर बरसात के दिनों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों को स्कूल भेजने में मुश्किल होती है। हल्दी प्लांट तक उपज पहुंचाना होगा आसान क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बने हल्दी प्रसंस्करण प्लांट तक उपज पहुंचाना किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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खैरवा घाट पर स्थायी पुल नहीं होने से ग्रामीणों को करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इससे परिवहन का खर्च बढ़ता है और उपज को प्लांट तक पहुंचाने में अधिक समय लगता है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कटाई पर पहले ही काफी खर्च होता है। ऐसे में ढुलाई की अतिरिक्त लागत किसानों के मुनाफे को प्रभावित करती है। किसानों का कहना है कि प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद वहां तक पहुंचने का रास्ता सुगम नहीं है।
पुल बनने से हल्दी समेत अन्य कृषि उपज को प्लांट और बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे परिवहन लागत घटने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। पुल बनने से व्यापारियों को भी माल की ढुलाई में सहूलियत मिलेगी। विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में आसानी होगी। दोनों राज्यों के सीमावर्ती गांवों के बीच आवागमन सुगम होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
नदी पार करते समय 11 लोगों की हो चुकी है मौत
गोड़रिया। खैरवा घाट पर बरसात के दौरान पीपा पुल हटने के बाद नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे में लोगों को नाव से नदी पार करनी पड़ती है या फिर वैकल्पिक रास्तों से लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। नदी पार करते समय हादसों का खतरा बना रहता है। वर्ष 2006 से अब तक नाव से नदी पार करने के दौरान डूबने से राहुल, सुकट, महादेव, कासिम, चंद्रशेखर, चंदन, गोलू, जगन्नाथ, चंटिका, लालदेव और दिलीप समेत 11 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थायी पुल बनने से लोगों को नाव पर निर्भरता से राहत मिलने की उम्मीद है।
यूपी-बिहार के दर्जनों गांवों को मिलेगा लाभ
खैरवा घाट पर पुल बनने से उत्तर प्रदेश के बांसगांव टोला, खैरवा, बैरिया, जमुआन, सरगटिया, बड़हरा, बैकुंठपुर, नैनहा और मिश्रौली सहित आसपास के गांवों के लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं, बिहार के भुइधरवा, छवटिहा, उलटहवा, बलुअड़वा और पकड़ी मिश्रौली समेत सीमावर्ती गांवों का आवागमन भी आसान होगा। पुल बनने से दोनों राज्यों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र में व्यापार बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। क्या कहते हैं ग्रामीण
बांसी नदी के खैरवा घाट पर पुल बनना वर्षों पुरानी जरूरत है। इससे बिहार और दुदही के बीच आवागमन आसान होगा। किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और मरीजों को लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
- ललन यादव, निवासी, बांसगांव खैरवा टोला
खैरवा घाट पर पुल निर्माण जनता की वर्षों पुरानी मांग और उम्मीद है। इससे आवागमन आसान होने के साथ विकास, रोजगार और खुशहाली के नए रास्ते खुलेंगे। जरूरी है कि निर्माण की दिशा में ठोस पहल हो।
-मनोज, निवासी, खैरवा
पुल बनने से उत्तर प्रदेश और बिहार के करीब 50 हजार लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
-जवाहीर गुप्ता, निवासी, बांसगांव टोला खैरवा
पुल बनने से सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी और विकास को नई दिशा मिलेगी। यूपी और बिहार के सीमावर्ती गांवों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
-मोतीलाल, निवासी, बैरिया टोला खैरवा
वर्जन
खैरवा घाट स्थित बांसी नदी पर करीब 1100 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही निर्माण कार्य को लेकर सकारात्मक पहल धरातल पर दिखाई देगी। स्थायी पुल बनने से यूपी और बिहार के बीच आवागमन आसान हो जाएगा।
-विवेक कुमार नायक, सहायक अभियंता, सेतु निगम
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- बरसात में चार महीने पीपा पुल हटने से नाव के सहारे नदी पार करने की मजबूरी, पांच से दस किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाते हैं लोग
पडरौना/गोड़रिया। बांसी नदी के खैरवा घाट पर करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से 1100 मीटर लंबा पक्का पुल बनाने की विभागीय प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती गांवों के करीब 50 हजार लोगों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है। किसानों को हल्दी प्रसंस्करण प्लांट तक उपज पहुंचाने में भी सहूलियत होगी।
आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों के अत्याचार का गवाह रहा खैरवा घाट लंबे समय से पक्के पुल की जरूरत महसूस कर रहा है। स्थायी पुल नहीं होने से नदी के दोनों ओर बसे गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। सामान्य दिनों में पीपा पुल से नदी पार करने की सुविधा मिलती है, लेकिन बरसात में इसे हटा दिए जाने के बाद करीब चार महीने तक लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।
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वहीं, वैकल्पिक रास्तों से पांच से दस किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इसका असर किसानों, विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों पर पड़ता है। लोगों को जरूरी काम से आने-जाने में अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। खासकर बरसात के दिनों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों को स्कूल भेजने में मुश्किल होती है। हल्दी प्लांट तक उपज पहुंचाना होगा आसान क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बने हल्दी प्रसंस्करण प्लांट तक उपज पहुंचाना किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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खैरवा घाट पर स्थायी पुल नहीं होने से ग्रामीणों को करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इससे परिवहन का खर्च बढ़ता है और उपज को प्लांट तक पहुंचाने में अधिक समय लगता है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कटाई पर पहले ही काफी खर्च होता है। ऐसे में ढुलाई की अतिरिक्त लागत किसानों के मुनाफे को प्रभावित करती है। किसानों का कहना है कि प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद वहां तक पहुंचने का रास्ता सुगम नहीं है।
पुल बनने से हल्दी समेत अन्य कृषि उपज को प्लांट और बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे परिवहन लागत घटने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। पुल बनने से व्यापारियों को भी माल की ढुलाई में सहूलियत मिलेगी। विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में आसानी होगी। दोनों राज्यों के सीमावर्ती गांवों के बीच आवागमन सुगम होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
नदी पार करते समय 11 लोगों की हो चुकी है मौत
गोड़रिया। खैरवा घाट पर बरसात के दौरान पीपा पुल हटने के बाद नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे में लोगों को नाव से नदी पार करनी पड़ती है या फिर वैकल्पिक रास्तों से लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। नदी पार करते समय हादसों का खतरा बना रहता है। वर्ष 2006 से अब तक नाव से नदी पार करने के दौरान डूबने से राहुल, सुकट, महादेव, कासिम, चंद्रशेखर, चंदन, गोलू, जगन्नाथ, चंटिका, लालदेव और दिलीप समेत 11 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थायी पुल बनने से लोगों को नाव पर निर्भरता से राहत मिलने की उम्मीद है।
यूपी-बिहार के दर्जनों गांवों को मिलेगा लाभ
खैरवा घाट पर पुल बनने से उत्तर प्रदेश के बांसगांव टोला, खैरवा, बैरिया, जमुआन, सरगटिया, बड़हरा, बैकुंठपुर, नैनहा और मिश्रौली सहित आसपास के गांवों के लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं, बिहार के भुइधरवा, छवटिहा, उलटहवा, बलुअड़वा और पकड़ी मिश्रौली समेत सीमावर्ती गांवों का आवागमन भी आसान होगा। पुल बनने से दोनों राज्यों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र में व्यापार बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। क्या कहते हैं ग्रामीण
बांसी नदी के खैरवा घाट पर पुल बनना वर्षों पुरानी जरूरत है। इससे बिहार और दुदही के बीच आवागमन आसान होगा। किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और मरीजों को लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
- ललन यादव, निवासी, बांसगांव खैरवा टोला
खैरवा घाट पर पुल निर्माण जनता की वर्षों पुरानी मांग और उम्मीद है। इससे आवागमन आसान होने के साथ विकास, रोजगार और खुशहाली के नए रास्ते खुलेंगे। जरूरी है कि निर्माण की दिशा में ठोस पहल हो।
-मनोज, निवासी, खैरवा
पुल बनने से उत्तर प्रदेश और बिहार के करीब 50 हजार लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
-जवाहीर गुप्ता, निवासी, बांसगांव टोला खैरवा
पुल बनने से सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी और विकास को नई दिशा मिलेगी। यूपी और बिहार के सीमावर्ती गांवों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
-मोतीलाल, निवासी, बैरिया टोला खैरवा
वर्जन
खैरवा घाट स्थित बांसी नदी पर करीब 1100 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही निर्माण कार्य को लेकर सकारात्मक पहल धरातल पर दिखाई देगी। स्थायी पुल बनने से यूपी और बिहार के बीच आवागमन आसान हो जाएगा।
-विवेक कुमार नायक, सहायक अभियंता, सेतु निगम