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पूरे नहीं थे आग से बचाव के इंतजाम
Kushinagar
Updated Thu, 23 Oct 2014 05:30 AM IST
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हाटा। प्रशासन ने हाटा में पटाखा मार्केट के लिए दुकानदारों को लाइसेंस तो दे दिया, पर वहां की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे ही छोड़ दिया गया था। नतीजा यह हुआ कि आग की घटना होने पर कोई बचाव कार्य नहीं हो सका। हाटा के श्रीगांधी स्मारक इंटर कॉलेज के मैदान में प्रशासन ने 35 पटाखा दुकानें लगाने के लिए लाइसेंस दिया था। पर सुरक्षा के लिए इंतजाम की अनदेखी की गई थी। लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अगर सुरक्षा की व्यवस्था की गई होती तो नुकसान को कम किया जा सकता था। अधिकारियों की ओर से किसी ने भी पटाखा मार्केट में यह जांचने की जहमत नहीं उठाई कि क्या पटाखा दुकानदारों ने अग्निशमन विभाग की ओर से दिए गए निर्देश के अनुसार अपनी दुकानें लगाई हैं अथवा नहीं। सुरक्षा निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है।
पानी और बालू का इंतजाम नहीं था
लाइसेंस में प्रत्येक दुकान पर दो बोरी बालू, चार बाल्टी पानी का इंतजाम रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका न तो दुकानदारों ने पालन किया और न ही अधिकारियों ने ही दुकानें लगने के बाद उसकी जांच करनी जरूरी समझी। इससे आग लगने के बाद कोई बचाव कार्य नहीं हो सका।
टीनशेड होना चाहिए, लगेे थे प्लास्टिक
अग्निशमन विभाग के नियम के मुताबिक पटाखे की दुकान लगाने के लिए टीनशेड का स्टॉल होना आवश्यक होता है, लेकिन हाटा में जहां घटना हुई वहां सभी दुकानदारों ने प्लास्टिक की तिरपाल तानकर स्टॉल लगाया गया था।
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आवासीय विद्यालय के बगल में अनुमति
इसे लापरवाही कही जाए या चूक, जिस जगह पर प्रशासन ने पटाखा दुकानदारों को दुकानें लगाने की अनुमति दी थी, उसके ठीक बगल में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, राजकीय कन्या विद्यालय के साथ साथ दो परिषदीय विद्यालय भी स्थिति है। घटना के बाद जब तेज आवाज के साथ पटाखे फूटने लगे तो इस विद्यालय की बच्चियां डर के मारे चीखने लगी थीं। यह तो गनीमत था कि आग की लपटों से इनको कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि कई पटाखे की आवाज के साथ छिटक कर उसके परिसर में भी गिर रहे थे।
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पानी और बालू का इंतजाम नहीं था
लाइसेंस में प्रत्येक दुकान पर दो बोरी बालू, चार बाल्टी पानी का इंतजाम रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका न तो दुकानदारों ने पालन किया और न ही अधिकारियों ने ही दुकानें लगने के बाद उसकी जांच करनी जरूरी समझी। इससे आग लगने के बाद कोई बचाव कार्य नहीं हो सका।
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टीनशेड होना चाहिए, लगेे थे प्लास्टिक
अग्निशमन विभाग के नियम के मुताबिक पटाखे की दुकान लगाने के लिए टीनशेड का स्टॉल होना आवश्यक होता है, लेकिन हाटा में जहां घटना हुई वहां सभी दुकानदारों ने प्लास्टिक की तिरपाल तानकर स्टॉल लगाया गया था।
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आवासीय विद्यालय के बगल में अनुमति
इसे लापरवाही कही जाए या चूक, जिस जगह पर प्रशासन ने पटाखा दुकानदारों को दुकानें लगाने की अनुमति दी थी, उसके ठीक बगल में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, राजकीय कन्या विद्यालय के साथ साथ दो परिषदीय विद्यालय भी स्थिति है। घटना के बाद जब तेज आवाज के साथ पटाखे फूटने लगे तो इस विद्यालय की बच्चियां डर के मारे चीखने लगी थीं। यह तो गनीमत था कि आग की लपटों से इनको कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि कई पटाखे की आवाज के साथ छिटक कर उसके परिसर में भी गिर रहे थे।