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वर्चस्व की लड़ाई में रुका विकास कार्य
Kushinagar
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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रामकोला। कभी विकास के लिए जाने जाना वाला रामकोला नगर पंचायत आजकल वर्चस्व की लड़ाई का अखाड़ा बनकर रह गया है। एक घंटे के काम के लिए नगर वासियों को हफ्तों दौड़ना पड़ रहा है। कारण यह कि यहां एक लिपिक के अलावा कोई स्टाफ नहीं है।
नगर पंचायत का चुनाव हुआ और पुराने चेयरमैन के पति जब फिर चेयरमैन चुने गए तो लगा था कि रामकोला नगर पंचायत विकास की नयी कहानी लिखेगा। नये बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में नगरवासियों ने विश्वास कर लिया था कि इस बार रामकोला नगर पंचायत में तेजी से विकास होगा, लेकिन हो रहा है इसके उलट। मामले की शुरुआत नगर पंचायत कार्यालय परिसर से कटे एक हरे पेड़ से हुई। इस मामले में चेयरमैन ने जलकल सुपरवाइजर पर पेड़ बिना अनुमति कटवाने का मुकदमा दर्ज करा दिया। चूंकि मामला नये बोर्ड के अस्तित्व में आने के पहले का था और तत्कालीन प्रभारी एसडीएम हाटा ने बताया कि पेड़ कटवाने की अनुमति ली गई थी, इसलिए मामला समाप्त हो गया। कुछ ही दिनों बाद नगर पंचायत का रिकार्ड गायब हो गया। इस मामले में चेयरमैन ने फिर उसी जलकल सुपरवाइजर पर मुकदमा दर्ज कराया और निलंबित भी कर दिया। रिकार्ड गायब होने के मामले में जलकल सुपरवाइजर ने भी चेयरमैन पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया। यहीं से दिक्कत शुरू हो गई। सूत्र बताते हैं कि दिखाने के लिए मामला पेड़ कटवाने और कागजात गायब होने का है, लेकिन मामले की तह में कुछ और बात है। बताते हैं कि पूर्व बोर्ड के कार्यकाल में हुए कुछ विकास कार्यों के भुगतान अभी बाकी हैं। उसके लिए नये बोर्ड के आने के पहले कई बार प्रयास किया गया, लेकिन भुगतान नहीं हो पाया। नये बोर्ड में उस भुगतान को लेकर मामला गर्मा गया है। इसके लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन जिन विकास कार्यों के भुगतान रोके गए हैं, उनकी मंडलायुक्त स्तर से टीएसी जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके चलते कोई कर्मचारी रिस्क लेना नहीं चाहता है। यही नहीं, नये बोर्ड के लगभग सभी सदस्य एकजुट हैं कि पहले के कार्यकाल का कोई भी भुगतान बिना बोर्ड की अनुमति के नहीं किया जाएगा। इस संबंध में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी और हाटा के एसडीएम का कहना है कि विकास कार्यों के लिए एकजुटता जरूरी है। यहां तो मामला ही कुछ ऐसा है कि विकास कार्यों की बजाय पूरी ऊर्जा विवादों का समझौता कराने में खर्च हो रही है।
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नगर पंचायत का चुनाव हुआ और पुराने चेयरमैन के पति जब फिर चेयरमैन चुने गए तो लगा था कि रामकोला नगर पंचायत विकास की नयी कहानी लिखेगा। नये बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में नगरवासियों ने विश्वास कर लिया था कि इस बार रामकोला नगर पंचायत में तेजी से विकास होगा, लेकिन हो रहा है इसके उलट। मामले की शुरुआत नगर पंचायत कार्यालय परिसर से कटे एक हरे पेड़ से हुई। इस मामले में चेयरमैन ने जलकल सुपरवाइजर पर पेड़ बिना अनुमति कटवाने का मुकदमा दर्ज करा दिया। चूंकि मामला नये बोर्ड के अस्तित्व में आने के पहले का था और तत्कालीन प्रभारी एसडीएम हाटा ने बताया कि पेड़ कटवाने की अनुमति ली गई थी, इसलिए मामला समाप्त हो गया। कुछ ही दिनों बाद नगर पंचायत का रिकार्ड गायब हो गया। इस मामले में चेयरमैन ने फिर उसी जलकल सुपरवाइजर पर मुकदमा दर्ज कराया और निलंबित भी कर दिया। रिकार्ड गायब होने के मामले में जलकल सुपरवाइजर ने भी चेयरमैन पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया। यहीं से दिक्कत शुरू हो गई। सूत्र बताते हैं कि दिखाने के लिए मामला पेड़ कटवाने और कागजात गायब होने का है, लेकिन मामले की तह में कुछ और बात है। बताते हैं कि पूर्व बोर्ड के कार्यकाल में हुए कुछ विकास कार्यों के भुगतान अभी बाकी हैं। उसके लिए नये बोर्ड के आने के पहले कई बार प्रयास किया गया, लेकिन भुगतान नहीं हो पाया। नये बोर्ड में उस भुगतान को लेकर मामला गर्मा गया है। इसके लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन जिन विकास कार्यों के भुगतान रोके गए हैं, उनकी मंडलायुक्त स्तर से टीएसी जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके चलते कोई कर्मचारी रिस्क लेना नहीं चाहता है। यही नहीं, नये बोर्ड के लगभग सभी सदस्य एकजुट हैं कि पहले के कार्यकाल का कोई भी भुगतान बिना बोर्ड की अनुमति के नहीं किया जाएगा। इस संबंध में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी और हाटा के एसडीएम का कहना है कि विकास कार्यों के लिए एकजुटता जरूरी है। यहां तो मामला ही कुछ ऐसा है कि विकास कार्यों की बजाय पूरी ऊर्जा विवादों का समझौता कराने में खर्च हो रही है।
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