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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई से मिलनी है एनओसी

Thu, 21 Feb 2019 10:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 21 Feb 2019 10:54 PM IST
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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई से मिलनी है एनओसी
एनओसी के पेंच में फंसा गरीब मरीजों का सीटी स्कैन
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फोटो के साथ
दो माह पहले ही जिला अस्पताल में लग चुकी है मशीन
बार्क से अनापत्ति प्रमाणपत्र का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। हेड इंजरी, ब्रेर हैमरेज और ब्रेन ट्यूमर जैसे गंभीर रोगों की जांच के लिए जनपद के गरीब मरीजों को अब भी भटकना पड़ रहा है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में लगी सीटी स्कैन मशीन लगभग सात वर्षों से खराब पड़ी है। दो महीने पहले नई मशीन लगी भी तो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) मुंबई से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिलने से चालू नहीं हो पा रही है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में लगभग हर तरह की जांच की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है, देर है तो सिटी स्कैन जांच की। दुर्घटना में हेड इंजरी के मरीज या ब्रेन हैमरेज व ब्रेन ट्यूमर सहित अन्य गंभीर रोगियों का इलाज इसलिए यहां नहीं हो पाता कि यहां सीटी स्कैन नहीं होता। मरीजों को लगभग पांच हजार रुपये तक खर्च कर कसया के निजी डाइग्नोसिस सेंटर में जांच करानी पड़ती है या फिर गोरखपुर जाना पड़ता है।
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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन से जांच शुरू कराने की मांग पिछले कई वर्षों से होती आ रही है, लेकिन यह जांच अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। हालांकि अब नई सिटी स्कैन मशीन जिला अस्पताल में आ गई है। सीमेंस कंपनी की तरफ से उपलब्ध कराई गई इस सीटी स्कैन मशीन को संचालित करने के लिए 500 एमवीए का नया जेनरेटर और अन्य संसाधन भी उपलब्ध हो गए हैं। सीटी स्कैन मशीन को लगाने के बाद अब इसे संचालित करने में आने वाले पूरे खर्च का वहन एचएलएल की तरफ से किया जाएगा। इसे संचालित करने से पहले भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई से एनओसी जरूरी है, जो अब तक नहीं मिल सकी है।
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सीटी स्कैन की सुविधा नहीं, परेशान होते हैं मरीज
संयुक्त जिला चिकित्सालय में जिले के विभिन्न हिस्सों से गंभीर दुर्घटना वाले मरीज आते हैं। उनमें हेड इंजरी वाले मरीजों की तादाद अधिक देखी जाती है, लेकिन यहां सीटी स्कैन की सुविधा न होने के कारण मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। -पशुपति मिश्र, टेंपो चालक

जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा न होने से परेशानी होती है। दुर्घटना या गंभीर रोगों की जांच के लिए यहां सुविधा होनी चाहिए। -बिट्टू कुमार पांडेय, सिरसिया
जिला अस्पताल में पहले भी सीटी स्कैन मशीन लगी है, लेकिन वह कभी चली नहीं। बताया जा रहा है कि नई मशीन भी लग गई है। अगर इसका संचालन शुरू हो जाए तो मरीजों को काफी बचत होगी। -कृष्णा, बरवा महदेवा

हर दिन हमारे सामने ऐसे मरीज मिलते हैं, जो दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होते हैं। जिन्हें सिर में चोट लगी होती है, उनकी हालत गंभीर होने पर डॉक्टर रेफर कर देते हैं। ऐसे में यहां सीटी स्कैन मशीन का संचालन जल्द शुरू हो जाए तो लोगों को काफी लाभ मिलेगा। -अरमान खान, एंबुलेंस चालक


जिला अस्पताल में एचएलएल की तरफ से कटेगरी-1 की अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन लगाई गई है। एचएलएल की तरफ से यहां मुफ्त में सिटी स्कैन किया जाएगा। मैनपावर और सभी संसाधन एचएलएल के रहेंगे। जितने लोगों का सिटी स्कैन होगा, उनका विवरण वह सरकार को देंगे, जिसके बाद राज्य सरकार सिटी स्कैन जांच के बदले उन्हें धनराशि का भुगतान करेगी। सीटी स्कैन के दौरान रेडिएशन से किसी मरीज के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े, इसके लिए भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) से एनओसी (अनापत्ति) प्रमाण मिलना बाकी है। सीटी स्कैन मशीन दो माह पहले ही लगवा दी गई है।
डॉ. बजरंगी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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