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त्रैमासिक लोक अदालत में 569 वाद निस्तारित
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त्रैमासिक लोक अदालत में 569 वाद निस्तारित
जिला एवं सत्र न्यायालय में किया गया आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिला एवं सत्र न्यायालय में रविवार को त्रैमासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें शाम तक 569 वादों का निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से त्रैमासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विनय कुमार, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना ट्रिब्यूनल अविनाश चंद्र त्रिपाठी एवं प्रभारी अध्यक्ष व जिला जज श्याम मोहन जायसवाल की अध्यक्षता में लोक अदालत का आयोजन हुआ। यहां फौजदारी के 418 वादों का निस्तारण किया गया। इसमें जुर्माने के रूप में 34,150 रुपये वसूलकर राजकीय कोष में जमा कराया गया। मोटर दुर्घटना से संबंधित पांच क्लेम का निस्तारण कर मृतकों एवं घायलों के आश्रितों को 18 लाख 55 हजार रुपये मुआवजा दिलाया गया। पारिवारिक न्यायालयों की तरफ से 15 वादों का निस्तारण किया गया। अन्य न्यायालयों की तरफ से दीवानी के तीन, राजस्व के 53 तथा 75 अन्य वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायालय के सभी न्यायालयों के न्यायाधीश मौजूद थे।
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जिला एवं सत्र न्यायालय में किया गया आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिला एवं सत्र न्यायालय में रविवार को त्रैमासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें शाम तक 569 वादों का निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से त्रैमासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विनय कुमार, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना ट्रिब्यूनल अविनाश चंद्र त्रिपाठी एवं प्रभारी अध्यक्ष व जिला जज श्याम मोहन जायसवाल की अध्यक्षता में लोक अदालत का आयोजन हुआ। यहां फौजदारी के 418 वादों का निस्तारण किया गया। इसमें जुर्माने के रूप में 34,150 रुपये वसूलकर राजकीय कोष में जमा कराया गया। मोटर दुर्घटना से संबंधित पांच क्लेम का निस्तारण कर मृतकों एवं घायलों के आश्रितों को 18 लाख 55 हजार रुपये मुआवजा दिलाया गया। पारिवारिक न्यायालयों की तरफ से 15 वादों का निस्तारण किया गया। अन्य न्यायालयों की तरफ से दीवानी के तीन, राजस्व के 53 तथा 75 अन्य वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायालय के सभी न्यायालयों के न्यायाधीश मौजूद थे।