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कबीर ने धार्मिक पाखंड का विरोध किया : रमेश
Mon, 22 Apr 2019 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Apr 2019 12:01 AM IST
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गोष्ठी।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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हाटा। इंडियन पब्लिक स्कूल परिसर में रविवार को सद्गुरु कबीर पर आयोजित सेमिनार में सुभाष इंटर कॉलेज बेदूपार के प्रधानाचार्य रमेश चंद तिवारी ने कहा कि कबीर का जीवन अनुकरणीय है। उन्होंने समाज में व्याप्त रूढ़ियों का खुल कर विरोध किया। जब देश संकट से गुजर रहा था। सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह से डगमगा गई थी।
हिंदू- मुस्लिम के बीच मजहबी खाई गहरी होती जा रही थी। कबीर ने धार्मिक पाखंड का विरोध किया। रचनाओं के माध्यम से समाज को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। डॉ. ज्ञानेश सिंह ने कहा कि कबीर ने नारी को माया स्वरूप माना है। साथ ही पतिव्रता नारी की भूरी-भूरी प्रशंसा भी की। उनके विचारों में धार्मिक सुधार व समाज सुधार का घनिष्ट संबंध है। अपनी वाणी का उपयोग समाज सुधार के लिए किया। वह लोक कल्याणकारी भावना के प्रबल समर्थक थे।
अहंकारियों का विरोध कर वह निम्न वर्ग के साथ खड़े दिखाई देते हैं। कहा कि ‘कबिरा खड़ा बाजार में लिए लकुटिया हाथ, जो घर फूंके आपनो चले हमारे साथ’। सेवानिवृत्त शिक्षक विद्यासागर सिंह ने भी अपने विचार रखे। अध्यक्षता जगजीवन मिश्र ने की और संचालन लक्ष्मीनारायण राही ने किया। इस दौरान दीनदयाल मिश्र, प्रहलाद मिश्र, अजय पांडेय, वाचस्पति द्विवेदी, ज्ञान विक्रम सिंह, विश्वदीपक मिश्र, पुनीत मणि, अनीता शुक्ला, रामकृपाल मिश्र आदि मौजूद रहे।
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हिंदू- मुस्लिम के बीच मजहबी खाई गहरी होती जा रही थी। कबीर ने धार्मिक पाखंड का विरोध किया। रचनाओं के माध्यम से समाज को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। डॉ. ज्ञानेश सिंह ने कहा कि कबीर ने नारी को माया स्वरूप माना है। साथ ही पतिव्रता नारी की भूरी-भूरी प्रशंसा भी की। उनके विचारों में धार्मिक सुधार व समाज सुधार का घनिष्ट संबंध है। अपनी वाणी का उपयोग समाज सुधार के लिए किया। वह लोक कल्याणकारी भावना के प्रबल समर्थक थे।
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अहंकारियों का विरोध कर वह निम्न वर्ग के साथ खड़े दिखाई देते हैं। कहा कि ‘कबिरा खड़ा बाजार में लिए लकुटिया हाथ, जो घर फूंके आपनो चले हमारे साथ’। सेवानिवृत्त शिक्षक विद्यासागर सिंह ने भी अपने विचार रखे। अध्यक्षता जगजीवन मिश्र ने की और संचालन लक्ष्मीनारायण राही ने किया। इस दौरान दीनदयाल मिश्र, प्रहलाद मिश्र, अजय पांडेय, वाचस्पति द्विवेदी, ज्ञान विक्रम सिंह, विश्वदीपक मिश्र, पुनीत मणि, अनीता शुक्ला, रामकृपाल मिश्र आदि मौजूद रहे।
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