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अक्षय तृतीया पर आंवले के पेड़ की हुई पूजा
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 29 Oct 2017 06:56 PM IST
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अांवले की पूजा करती महिलाएं।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि के अवसर पर रविवार को लोगों ने आंवले के वृक्ष की पूजा की। श्रद्घालुओं ने पेड़ में कच्चा धागा बांधकर उसके नीचे पकवान चढ़ाया और अपने परिवार की सलामती की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन द्वापर युग की शुरुआत हुई थी। इस दिन आंवले के पेड़ में कच्चा धागा बांधने और इसकी 108 बार परिक्रमा कर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे पकवान का प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है। पडरौना नगर के पिंजरापोल गौशाला में लगे आंवले के पेड़ की लोगों ने पूजा की और इसके नीचे पकवान का प्रसाद चढ़ाया।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में अक्षय नवमी के अवसर पर महिलाओं ने आंवले के पौधे की पूजा और परिक्रमा कर अक्षय पुण्य की कामना की। इसी तरह क्षेत्र के राजपुर बगहा, मिश्रौली, पिपराघाट, टिकुलिया, कतौरा, तिवारी पट्टी, दौनहा, परसा, जंगलीपट्टी, दुबौली, सलेमगढ़, भुलिया, तरयासुजान, बेदूपार, दोमाठ, मेहदिया, बभनौली, पकड़िहार आदि गांवों में भी पूरे विधि विधान से पूजा की गई।
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पुजारी कालीदास ने बताया कि शास्त्रों में आंवला को अमृत फल की संज्ञा दी गई है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से समस्त मनोकमानाएं पूर्ण होती हैं।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन द्वापर युग की शुरुआत हुई थी। इस दिन आंवले के पेड़ में कच्चा धागा बांधने और इसकी 108 बार परिक्रमा कर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे पकवान का प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है। पडरौना नगर के पिंजरापोल गौशाला में लगे आंवले के पेड़ की लोगों ने पूजा की और इसके नीचे पकवान का प्रसाद चढ़ाया।
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तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में अक्षय नवमी के अवसर पर महिलाओं ने आंवले के पौधे की पूजा और परिक्रमा कर अक्षय पुण्य की कामना की। इसी तरह क्षेत्र के राजपुर बगहा, मिश्रौली, पिपराघाट, टिकुलिया, कतौरा, तिवारी पट्टी, दौनहा, परसा, जंगलीपट्टी, दुबौली, सलेमगढ़, भुलिया, तरयासुजान, बेदूपार, दोमाठ, मेहदिया, बभनौली, पकड़िहार आदि गांवों में भी पूरे विधि विधान से पूजा की गई।
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पुजारी कालीदास ने बताया कि शास्त्रों में आंवला को अमृत फल की संज्ञा दी गई है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से समस्त मनोकमानाएं पूर्ण होती हैं।