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डिस्टिलरी का खुला ताला, एमडी को सौंपी फैक्ट्री
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Sep 2018 11:40 PM IST
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कप्तानगंज डिस्टिलरी का ताला खोलवाते एसडीएम विपिन कुमार और अन्य लोग ।
- फोटो : अमर उजाला
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कप्तानगंज। जेआर आर्गेनिक्स की मालकिन की ओर से आरसी की रकम जमा करने पर कुछ शर्तों के साथ डिस्टिलरी का ताला खोल दिया गया। एसडीएम ने एमडी वाईके झुनझुनवाला को डिस्टिलरी सुपुर्द कर दी। इससे डिस्टिलरी के मजदूरों और कस्बेवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई।
जेआर आर्गेनिक लिमिटेड की स्थापना 50 के दशक में सेठ इंदरचंद ने कराई थी। कुछ वर्ष बाद सोमैया ने खरीदकर संचालन शुरू किया। वर्ष 2000 तक फैक्ट्री सुचारु रूप से चलती रही। उसके बाद डिस्टिलरी को वाईके झुनझुनवाला ने खरीद लिया।
तब से फैक्ट्री की स्थिति बिगड़ती गई। वेतन, पीएफ, बोनस, ग्रेच्युटी, एलटीए आदि बकाया होने लगा तो मजदूर यूनियन ने उपश्रमायुक्त की कोर्ट में अर्जी लगा दी और बकाया रकम के भुगतान की मांग की थी। वर्ष 2016 में आरसी जारी कर डीएम को निर्देश दिया कि जेआर आर्गेनिक्स की चल-अचल संपत्ति कुर्क कर मजदूरों के समस्त बकाया का भुगतान कराएं। उसके बाद फैक्ट्री सीज कर दी गई थी।
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मलिकान पक्ष की ओर से प्रथम आरसी की एक करोड़ पैंसठ लाख इकतीस हजार नौ सौ चौसठ रुपये उप श्रमायुक्त गोरखपुर के नाम की डीडी डीएम कार्यालय में जमा की है। डीएम के निर्देश पर शनिवार को एसडीएम विपिन कुमार ने तहसीलदार मनोज तिवारी व अन्य मातहतों के साथ डिस्टिलरी का ताला खोलवाया और 31 अक्टूबर तक समस्त देनदारी का भुगतान करने की शर्त के साथ फैक्ट्री सौंप दी।
इस दौरान नायब तहसीलदार सुनील कुमार सरोज, सीएमडी आशीष झुनझुनवाला, सुगर मिल के महा प्रबंधक एसके श्रीवास्तव, सहायक महा प्रबंधक विनोद कुमार श्रीवास्तव, एसके सक्सेना, रमेश सिंह, मजदूर यूनियन के महामंत्री मिश्री प्रसाद, रामकृपाल, राधाकृष्ण यादव, चौकी इंचार्ज विनय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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जेआर आर्गेनिक लिमिटेड की स्थापना 50 के दशक में सेठ इंदरचंद ने कराई थी। कुछ वर्ष बाद सोमैया ने खरीदकर संचालन शुरू किया। वर्ष 2000 तक फैक्ट्री सुचारु रूप से चलती रही। उसके बाद डिस्टिलरी को वाईके झुनझुनवाला ने खरीद लिया।
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तब से फैक्ट्री की स्थिति बिगड़ती गई। वेतन, पीएफ, बोनस, ग्रेच्युटी, एलटीए आदि बकाया होने लगा तो मजदूर यूनियन ने उपश्रमायुक्त की कोर्ट में अर्जी लगा दी और बकाया रकम के भुगतान की मांग की थी। वर्ष 2016 में आरसी जारी कर डीएम को निर्देश दिया कि जेआर आर्गेनिक्स की चल-अचल संपत्ति कुर्क कर मजदूरों के समस्त बकाया का भुगतान कराएं। उसके बाद फैक्ट्री सीज कर दी गई थी।
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मलिकान पक्ष की ओर से प्रथम आरसी की एक करोड़ पैंसठ लाख इकतीस हजार नौ सौ चौसठ रुपये उप श्रमायुक्त गोरखपुर के नाम की डीडी डीएम कार्यालय में जमा की है। डीएम के निर्देश पर शनिवार को एसडीएम विपिन कुमार ने तहसीलदार मनोज तिवारी व अन्य मातहतों के साथ डिस्टिलरी का ताला खोलवाया और 31 अक्टूबर तक समस्त देनदारी का भुगतान करने की शर्त के साथ फैक्ट्री सौंप दी।
इस दौरान नायब तहसीलदार सुनील कुमार सरोज, सीएमडी आशीष झुनझुनवाला, सुगर मिल के महा प्रबंधक एसके श्रीवास्तव, सहायक महा प्रबंधक विनोद कुमार श्रीवास्तव, एसके सक्सेना, रमेश सिंह, मजदूर यूनियन के महामंत्री मिश्री प्रसाद, रामकृपाल, राधाकृष्ण यादव, चौकी इंचार्ज विनय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।