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गांव में दिखाई देती है समृद्धि
Updated Sun, 26 Aug 2018 09:48 PM IST
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सब्जी की खेती ने बदल दी किसानों की तस्वीर
पारसनाथ पांडेय
तमकुहीराज। सब्जी की खेती ने क्षेत्र के एक गांव की तस्वीर ही बदल दी है। इस गांव में निवास करने वाले किसानों की अब झोपड़ी की जगह टाइल्स लगे खूबसूरत भवन हैं। इन किसानों से अगल बगल के गांवों के किसान भी सीख लेकर सब्जी की खेती करने लगे हैं।
तमकुही क्षेत्र के धुरियाकोट के नौका टोला के लोगों की लगन, मेहनत और कुछ बेहतर कर गुजरने के जज्बे ने आसपास के गांवों के लिए आदर्श बना दिया है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाने वाले इस गांव में अब हर तरफ संपन्नता दिखाई देती है। लोगों के घर झोपड़ी से आलिशान मकान में बदल गए हैं। टाइल्स लगे घर अनायास ही आने जाने वाले लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। धुरियाकोट का नौका टोला नुनिया, कुशवाहा एवं कुर्मीजाति बहुल्य है। दो दशक पूर्व तक इस गांव के अधिकांश लोग भूमिहीन होने के चलते मजदूूरी करके गुजारा करते थे। इस गांव के रामाज्ञा चौहान एवं भिखु चौहान ने बटाई की जमीन लेकर वर्षों पूर्व सब्जी की खेती शुरू की थी। मेहनतकश इन लोगों की यह पहल रंग लाई। सब्जी की खेती से आय बढ़ने लगी। धीरे धीरे रुपये एकत्र होने के बाद पहले रेहन की जमीन ली और बाद में बैनामा भी ले लिया। अब शायद ही इस गांव का कोई परिवार ऐसा होगा, जो भूमिहीन हो। झोपड़ी की जगह टाइल्स लगे सुंदर मकान इनकी समृद्घि की दास्तां बताते हैं। इस गांव के कई युवक प्रतिदिन भारी वाहन से अपनी एवं अन्य लोगों की सब्जियां वाराणसी, गोरखपुर आदि बड़े शहरों में भेजकर अच्छी आमदनी अर्जित करते हैं।
गांव के मोतीलाल चौहान बताते हैं कि सब्जी की खेती ने उनकी तकदीर बदल दी है। यहां पर नई तकनीक से खेती की जाती है। मोतीलाल चौहान का कहना है कि खेती के साथ तमकुहीराज बाजार में सब्जी की दुकान भी लगाते हैं। सुभाष चौहान ने बताया कि अब तो पूरे क्षेत्र में सब्जी की खेती होने लगी है। आसनारायण चौहान ने बताया कि हम एक फसल चक्र में चार फसलें काट लेते हैं। इसमें जैविक खाद का भरपूर उपयोग किया जाता है।
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इन लोगों ने बताया कि यह क्षेत्र सब्जी की खेती का हब बन चुका है। यहां से पूरे वर्ष करैला, नेनुआ, तिरोई, भिंडी, केला, मिर्च, लौकी, आलू , प्याज, गोभी, टमाटर, धनिया, बैगन, परवल आदि की खेप ट्रकों में भरकर बड़े शहरों में भेजी जा रही है।
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पारसनाथ पांडेय
तमकुहीराज। सब्जी की खेती ने क्षेत्र के एक गांव की तस्वीर ही बदल दी है। इस गांव में निवास करने वाले किसानों की अब झोपड़ी की जगह टाइल्स लगे खूबसूरत भवन हैं। इन किसानों से अगल बगल के गांवों के किसान भी सीख लेकर सब्जी की खेती करने लगे हैं।
तमकुही क्षेत्र के धुरियाकोट के नौका टोला के लोगों की लगन, मेहनत और कुछ बेहतर कर गुजरने के जज्बे ने आसपास के गांवों के लिए आदर्श बना दिया है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाने वाले इस गांव में अब हर तरफ संपन्नता दिखाई देती है। लोगों के घर झोपड़ी से आलिशान मकान में बदल गए हैं। टाइल्स लगे घर अनायास ही आने जाने वाले लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। धुरियाकोट का नौका टोला नुनिया, कुशवाहा एवं कुर्मीजाति बहुल्य है। दो दशक पूर्व तक इस गांव के अधिकांश लोग भूमिहीन होने के चलते मजदूूरी करके गुजारा करते थे। इस गांव के रामाज्ञा चौहान एवं भिखु चौहान ने बटाई की जमीन लेकर वर्षों पूर्व सब्जी की खेती शुरू की थी। मेहनतकश इन लोगों की यह पहल रंग लाई। सब्जी की खेती से आय बढ़ने लगी। धीरे धीरे रुपये एकत्र होने के बाद पहले रेहन की जमीन ली और बाद में बैनामा भी ले लिया। अब शायद ही इस गांव का कोई परिवार ऐसा होगा, जो भूमिहीन हो। झोपड़ी की जगह टाइल्स लगे सुंदर मकान इनकी समृद्घि की दास्तां बताते हैं। इस गांव के कई युवक प्रतिदिन भारी वाहन से अपनी एवं अन्य लोगों की सब्जियां वाराणसी, गोरखपुर आदि बड़े शहरों में भेजकर अच्छी आमदनी अर्जित करते हैं।
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गांव के मोतीलाल चौहान बताते हैं कि सब्जी की खेती ने उनकी तकदीर बदल दी है। यहां पर नई तकनीक से खेती की जाती है। मोतीलाल चौहान का कहना है कि खेती के साथ तमकुहीराज बाजार में सब्जी की दुकान भी लगाते हैं। सुभाष चौहान ने बताया कि अब तो पूरे क्षेत्र में सब्जी की खेती होने लगी है। आसनारायण चौहान ने बताया कि हम एक फसल चक्र में चार फसलें काट लेते हैं। इसमें जैविक खाद का भरपूर उपयोग किया जाता है।
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इन लोगों ने बताया कि यह क्षेत्र सब्जी की खेती का हब बन चुका है। यहां से पूरे वर्ष करैला, नेनुआ, तिरोई, भिंडी, केला, मिर्च, लौकी, आलू , प्याज, गोभी, टमाटर, धनिया, बैगन, परवल आदि की खेप ट्रकों में भरकर बड़े शहरों में भेजी जा रही है।