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समाधि7
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समाधि से निकले त्यागी रामदास, लगे जयकारे
जमीन के दस फीट अंदर तीन दिनों तक ले रखी थी समाधि
अमर उजाला ब्यूरो
तरयासुजान। डुमरिया स्थित नवनिर्मित हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे रुद्र महायज्ञ के दौरान श्रीसंत पंथ के तेरहवें योगी त्यागी रामदास की 147वीं समाधि लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी रही। जमीन के दस फीट अंदर तीन दिनों तक रहने के बाद जब बाबा बाहर निकले तो श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
बाबा की शिष्या मीरा बहन के मुताबिक समाधि में जाने से 24 घंटे पहले महाराज अन्न-जल का त्याग कर देते हैं। समाधि के लिए दस फीट लंबा, दस फीट चौड़ा एवं दस फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है। ऊपर से पटरा-बल्ली लगाकर उसे मिट्टी से पाट दिया जाता है। अंदर जाने के पूर्व 56 करोड़ देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है। समाधि के दौरान बाबा योग निद्रा में चले जाते हैं। इससे उन्हें भूख-प्यास एवं दैनिक क्रियाओं का अहसास नहीं होता। बुधवार को जब त्यागी रामदास समाधि से राम-राम का उच्चारण करते हुए बाहर निकले तो उनकी सेहत ठीक थी।
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जमीन के दस फीट अंदर तीन दिनों तक ले रखी थी समाधि
अमर उजाला ब्यूरो
तरयासुजान। डुमरिया स्थित नवनिर्मित हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे रुद्र महायज्ञ के दौरान श्रीसंत पंथ के तेरहवें योगी त्यागी रामदास की 147वीं समाधि लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी रही। जमीन के दस फीट अंदर तीन दिनों तक रहने के बाद जब बाबा बाहर निकले तो श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
बाबा की शिष्या मीरा बहन के मुताबिक समाधि में जाने से 24 घंटे पहले महाराज अन्न-जल का त्याग कर देते हैं। समाधि के लिए दस फीट लंबा, दस फीट चौड़ा एवं दस फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है। ऊपर से पटरा-बल्ली लगाकर उसे मिट्टी से पाट दिया जाता है। अंदर जाने के पूर्व 56 करोड़ देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है। समाधि के दौरान बाबा योग निद्रा में चले जाते हैं। इससे उन्हें भूख-प्यास एवं दैनिक क्रियाओं का अहसास नहीं होता। बुधवार को जब त्यागी रामदास समाधि से राम-राम का उच्चारण करते हुए बाहर निकले तो उनकी सेहत ठीक थी।
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