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कम नहीं हो रही बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें..
Updated Thu, 24 Aug 2017 05:47 PM IST
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कुशीनगर। गंडक व बांसी नदी की बाढ़ से प्रभावित पिपराघाट के कई टोलों में अब भी पानी लगा हुआ है। स्कूलों में पानी भरा होने की वजह से पठन-पाठन ठप है। रास्तों पर पानी एकत्र होने की वजह से लोगों को अब भी नाव से आना-जाना पड़ रहा है। जलभराव के चलते लोग अब संक्रामक बीमारियों की आशंका से सहमे हुए हैं।
गंडक व बांसी नदी का जलस्तर बढ़ने से पिपराघाट के सभी 17 टोलों में बाढ़ आ गई थी। घरों में पानी भर जाने की वजह से लोगों को बंधों पर शरण लेनी पड़ी थी। जलस्तर कम होने के बाद स्थिति कुछ सुधरी जरूर है, लेकिन अब भी बीन टोली, पिपराघाट एहतमाली, पिरोजहां, ब्रह्मपुर आदि में पानी लगा हुआ है। सबसे खराब स्थिति इन गांवों के परिषदीय स्कूलों में हैं। स्कूल में पानी भरा होने के कारण पढ़ाई बंद है। बृहस्पतिवार को स्कूलों की दशा देखने नाव से गए शिक्षकों ने बताया कि भवन में सांप व अन्य जलीव जंतु घुस गए हैं। शिक्षकों व अभिभावकों का कहना है कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद भी पढ़ाई के लिए स्थिति अनुकूल बनाने में कई दिन का वक्त लगेगा।
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गंडक व बांसी नदी का जलस्तर बढ़ने से पिपराघाट के सभी 17 टोलों में बाढ़ आ गई थी। घरों में पानी भर जाने की वजह से लोगों को बंधों पर शरण लेनी पड़ी थी। जलस्तर कम होने के बाद स्थिति कुछ सुधरी जरूर है, लेकिन अब भी बीन टोली, पिपराघाट एहतमाली, पिरोजहां, ब्रह्मपुर आदि में पानी लगा हुआ है। सबसे खराब स्थिति इन गांवों के परिषदीय स्कूलों में हैं। स्कूल में पानी भरा होने के कारण पढ़ाई बंद है। बृहस्पतिवार को स्कूलों की दशा देखने नाव से गए शिक्षकों ने बताया कि भवन में सांप व अन्य जलीव जंतु घुस गए हैं। शिक्षकों व अभिभावकों का कहना है कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद भी पढ़ाई के लिए स्थिति अनुकूल बनाने में कई दिन का वक्त लगेगा।
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