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मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराई गई थी बच्ची
Updated Thu, 24 Aug 2017 06:03 PM IST
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कुशीनगर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लापरवाही के चलते ऑक्सीजन की कमी से मासूमों सहित 50 से अधिक लोगों की हुई मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस से हुई आठ वर्ष की एक बच्ची की मौत की रिपोर्ट में अज्ञात बीमारी बताई गई है।
तमकुुही क्षेत्र के बलुआ गांव निवासी व्यास मिश्र की आठ वर्षीय पुत्री प्राची तीन दिन से बुखार, सिर व शरीर में दर्द से पीड़ित थी। परिवार के लोग उसे फाजिलनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे इंसेफेलाइटिस होने की आशंका जताते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। वहां बच्ची को पहले एक निजी नर्सिंग होम में दिखाया गया, जहां से डॉक्टर ने उसे तुरंत मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। उसके बाद परिवार के लोग उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए, जहां बुधवार की शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घरवालों का कहना था कि उसे इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी इंसेफेलाइटिस से मौत हुई थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने प्राची की मौत अज्ञात बीमारी से होने की रिपोर्ट दी है।
इस संबंध में तमकुहीराज सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि वह स्वयं मृतका के परिवारीजनों से मिलने गए थे। मेडिकल कॉलेज में वह बच्ची करीब चार घंटे तक ही जीवित रही। इस वजह से उसका समुचित इलाज नहीं हो पाया। ऐसे में उसकी मौत अज्ञात बीमारी से होना ही कहा जाएगा।
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तमकुुही क्षेत्र के बलुआ गांव निवासी व्यास मिश्र की आठ वर्षीय पुत्री प्राची तीन दिन से बुखार, सिर व शरीर में दर्द से पीड़ित थी। परिवार के लोग उसे फाजिलनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे इंसेफेलाइटिस होने की आशंका जताते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। वहां बच्ची को पहले एक निजी नर्सिंग होम में दिखाया गया, जहां से डॉक्टर ने उसे तुरंत मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। उसके बाद परिवार के लोग उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए, जहां बुधवार की शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घरवालों का कहना था कि उसे इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी इंसेफेलाइटिस से मौत हुई थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने प्राची की मौत अज्ञात बीमारी से होने की रिपोर्ट दी है।
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इस संबंध में तमकुहीराज सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि वह स्वयं मृतका के परिवारीजनों से मिलने गए थे। मेडिकल कॉलेज में वह बच्ची करीब चार घंटे तक ही जीवित रही। इस वजह से उसका समुचित इलाज नहीं हो पाया। ऐसे में उसकी मौत अज्ञात बीमारी से होना ही कहा जाएगा।
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