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Kaushambi News: आयुष विंग में इलाज तो मिल जाएगा...दवाएं नहीं
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मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित आयुष विंग की ओपीडी में मरीजा का इलाज करते डॉ. आरके शर्मा। संवाद
- फोटो : विकास भवन में बैठक के दौरान निर्देश देते सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र।
अगर आप बीमार हैं और मेडिकल कॉलेज के आयुष विंग में इलाज के लिए जा रहे हैं तो आपको मायूस होना पड़ सकता है। यहां इलाज तो मिल जाएगा, लेकिन दवाएं नहीं मिल पाएंगी। क्योंकि अस्पताल में साल भर से कई रोगों की प्रमुख दवाएं नहीं आ रही हैं। इस वजह से मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में ही आयुष विंग का संचालन हो रहा है। यहां सालभर से कई मर्ज की दवाएं ही नहीं आ रही हैं। यह पहला मौका भी नहीं जब ऐसा हुआ हो। पहले भी कई बार मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। उन्हें बाहर से दवाओं के लिए सैकड़ों रुपये खर्च करने पड़े हैं।
नाम न छापने की शर्त पर डॉक्टर ने बताया कि पहले यहां रोजाना 100 से 150 मरीज का इलाज होता था। लेकिन, दवाएं नहीं मिलने की वजह मरीजों संख्या भी आधी हो गई है। शासन से जो भी दवाएं आती हैं, वह कुछ ही दिन में खत्म हो जाती हैं। दवाओं का स्टॉक भी काफी कम आता है। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण खांसी के मरीज बढ़े हैं, लेकिन अस्पताल में खांसी का दवा नहीं है। इसके अलावा च्यवनप्राश आदि भी नहीं है। लोग बाहर से दवा खरीदने को मजबूर हैं।
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बोले मरीज
-- कटैया गांव से आए पीड़ित महेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आयुष विंग में करीब एक माह से पाइल्स का इलाज करा रहा हूं। यहां गिनी चुनीं दवाएं मिलती हैं, बाकी बाहर से लेनी पड़ती है।
देवी दयाल का पुरवा निवासी चर्मरोग पीड़ित भैयालाल ने बताया कि आठ माह से हर सप्ताह आता हूं। आराम तो मिला, लेकिन परेशानी यह है कि हमें पूरी दवाएं नहीं मिलती हैं। इसलिए डॉक्टर की लिखी दवाओं को बाहर से लेना पड़ता है।
कुछ दवाएं आई हैं, जिन्हें कुछ अस्पतालों में पहुंचा दिया है। बाकी दवाएं खरीदी गई हैं। जल्द ही आ जाएंगी। आते ही उन्हें अस्पतालों को भेज दिया जाएगा।-- - डॉ. संजय कुमार, सीएमओ
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मेडिकल कॉलेज में ही आयुष विंग का संचालन हो रहा है। यहां सालभर से कई मर्ज की दवाएं ही नहीं आ रही हैं। यह पहला मौका भी नहीं जब ऐसा हुआ हो। पहले भी कई बार मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। उन्हें बाहर से दवाओं के लिए सैकड़ों रुपये खर्च करने पड़े हैं।
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नाम न छापने की शर्त पर डॉक्टर ने बताया कि पहले यहां रोजाना 100 से 150 मरीज का इलाज होता था। लेकिन, दवाएं नहीं मिलने की वजह मरीजों संख्या भी आधी हो गई है। शासन से जो भी दवाएं आती हैं, वह कुछ ही दिन में खत्म हो जाती हैं। दवाओं का स्टॉक भी काफी कम आता है। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण खांसी के मरीज बढ़े हैं, लेकिन अस्पताल में खांसी का दवा नहीं है। इसके अलावा च्यवनप्राश आदि भी नहीं है। लोग बाहर से दवा खरीदने को मजबूर हैं।
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बोले मरीज
देवी दयाल का पुरवा निवासी चर्मरोग पीड़ित भैयालाल ने बताया कि आठ माह से हर सप्ताह आता हूं। आराम तो मिला, लेकिन परेशानी यह है कि हमें पूरी दवाएं नहीं मिलती हैं। इसलिए डॉक्टर की लिखी दवाओं को बाहर से लेना पड़ता है।
कुछ दवाएं आई हैं, जिन्हें कुछ अस्पतालों में पहुंचा दिया है। बाकी दवाएं खरीदी गई हैं। जल्द ही आ जाएंगी। आते ही उन्हें अस्पतालों को भेज दिया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित आयुष विंग की ओपीडी में मरीजा का इलाज करते डॉ. आरके शर्मा। संवाद- फोटो : विकास भवन में बैठक के दौरान निर्देश देते सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र।