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लौट रहा यमुना का पानी, बढ़ी परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 25 Aug 2016 11:56 PM IST
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उफनाई कालिंदी का आक्रोश बुधवार की रात से धीरे-धीरे शांत होने लगा है। बृहस्पतिवार की सुबह बाढ़ पीड़ित गांवों से लगभग चार फिट पानी नीचे खिसका नजर आया। यमुना के विकराल रूप को शांत होता देख पीड़ित गांवों के बाशिंदों ने राहत महसूस की है। लेकिन दूसरी ओर बाढ़ से फैली गंदगी परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है। तेज धूप के चलते गांवों में जमे मलबे से संक्रामक बीमारी के फैलने का खतरा मंडराने लगा है।
दोआबा के तीन ब्लॉकों का क्षेत्रफल यमुना की तराई से जुड़ा हुआ है। तीनों ब्लॉकों के लगभग 120 गांव यमुना की तराई में बसे हुए हैं। सप्ताह भर पहले उफनाई यमुना नदी का पानी धीरे-धीरे गांवों में घुसना शुरू हुआ था। रविवार की रात तक बाढ़ का पानी तराई के शाहपुर, भवंसुरी, कटरी, डेढ़वल, पभोषा, पाली, गढ़वा, भंकदा, डांड़ी, बरगदी, बंथरी, गुहौली, कटैया, बेनपुर, पिपरहटा, मल्हीपुर समेत कई गांवों को अपनी आगोश में ले चुका था।
इन गांवों में किनारे पर बने कई लोगों के घरों में पानी भर जाने से जमीदोज हो गए तो जलभराव के चलते कई लोगों ने टीले पर ठिकाना बना लिया था। लेकिन बुधवार की रात से यमुना का रौद्र रूप शांत होता दिखाई देने लगा। बृहस्पतिवार की सुबह ग्रामीणों ने बाढ़ का पानी घटता देखा तो राहत महसूस की। माना जा रहा है कि बाढ़ का पानी चार से छह दिन में जद में आए गांवों को छोड़कर किनारा थाम लेगा। ऐसे में लोगों को बाढ़ की परेशानी से छुटकारा मिलता दिखने लगा, लेकिन पानी के साथ आई गंदगी समस्या बनने लगी है। बाढ़ के पानी के साथ गांवों तक पहुंची सिल्ट से तेज धूप के चलते बदबू भी फैलने लगी है।
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ऐसे में बाढ़ पीड़ित गांवों में संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा उत्पन्न हो रहा है। उधर स्वास्थ्य विभाग है कि वह इससे पूरी तरह अंजान बना बैठा है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीणों का संक्रामक बीमारी की जद में आना तय है।
पांच दिन के जलभराव में सड़ गई फसलें
उफनाई यमुना की जद में आए गांवों के किसानों की फसलें पांच दिन तक पानी में डूबे रहने से सड़ गई। बृहस्पतिवार को जैसे-जैसे यमुना का पानी नीचे खिसक रहा था पीली होकर सड़ रही फसलें नजर आने लगी। इसे देख कर किसानों के चेहरे भी फसलों के साथ पीले हो रहे थे। बाढ़ के पानी से सबसे अधिक नुकसान भकंदा, गुहौली, बंथरी, धाना, दिया, कटैया, बेनपुर आदि गांवों के किसानों का हुआ है। माना जा रहा है कि बाढ़ में सड़ रही फसलों से इलाके में बीमारी फैलने का खतरा है। उधर खेतों में सिल्ट और कीचड़ होने की वजह से कई दिनों तक घुसकर सफाई करना आसान नहीं होगा।
गढ़वा पहुंचे एसडीएम ने लिया जायजा
सदर एसडीएम संदीप कुमार गुप्ता बृहस्पतिवार को बाढ़ पीड़ित गढ़वा गांव का निरीक्षण कर नुकसान का जायजा लिया। एसडीएम के गांव पहुंचते ही बाढ़ पीड़ित मदद की गुहार लगाने के लिए उनके पास पहुंचे। बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर एसडीएम ने उनकी समस्याएं सुनी। भरोसा दिलाया कि शासन से मिलने वाली हर सम्भव मदद पीड़ितों को दिलाई जाएगी। इस दौरान उनके साथ तहसीलदार महेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार केके मिश्र भी मौजूद रहे।
बाढ़ घटने के बाद गंदगी से बीमारी फैल सकती है। इससे निपटने के लिए प्रशासन मुस्तैद है। संक्रामक बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीम गठित कर रखी है। कहीं कोई परेशानी होने वाली नहीं है।
श्रीकृष्ण, एडीएम कौशाम्बी
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दोआबा के तीन ब्लॉकों का क्षेत्रफल यमुना की तराई से जुड़ा हुआ है। तीनों ब्लॉकों के लगभग 120 गांव यमुना की तराई में बसे हुए हैं। सप्ताह भर पहले उफनाई यमुना नदी का पानी धीरे-धीरे गांवों में घुसना शुरू हुआ था। रविवार की रात तक बाढ़ का पानी तराई के शाहपुर, भवंसुरी, कटरी, डेढ़वल, पभोषा, पाली, गढ़वा, भंकदा, डांड़ी, बरगदी, बंथरी, गुहौली, कटैया, बेनपुर, पिपरहटा, मल्हीपुर समेत कई गांवों को अपनी आगोश में ले चुका था।
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इन गांवों में किनारे पर बने कई लोगों के घरों में पानी भर जाने से जमीदोज हो गए तो जलभराव के चलते कई लोगों ने टीले पर ठिकाना बना लिया था। लेकिन बुधवार की रात से यमुना का रौद्र रूप शांत होता दिखाई देने लगा। बृहस्पतिवार की सुबह ग्रामीणों ने बाढ़ का पानी घटता देखा तो राहत महसूस की। माना जा रहा है कि बाढ़ का पानी चार से छह दिन में जद में आए गांवों को छोड़कर किनारा थाम लेगा। ऐसे में लोगों को बाढ़ की परेशानी से छुटकारा मिलता दिखने लगा, लेकिन पानी के साथ आई गंदगी समस्या बनने लगी है। बाढ़ के पानी के साथ गांवों तक पहुंची सिल्ट से तेज धूप के चलते बदबू भी फैलने लगी है।
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ऐसे में बाढ़ पीड़ित गांवों में संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा उत्पन्न हो रहा है। उधर स्वास्थ्य विभाग है कि वह इससे पूरी तरह अंजान बना बैठा है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीणों का संक्रामक बीमारी की जद में आना तय है।
पांच दिन के जलभराव में सड़ गई फसलें
उफनाई यमुना की जद में आए गांवों के किसानों की फसलें पांच दिन तक पानी में डूबे रहने से सड़ गई। बृहस्पतिवार को जैसे-जैसे यमुना का पानी नीचे खिसक रहा था पीली होकर सड़ रही फसलें नजर आने लगी। इसे देख कर किसानों के चेहरे भी फसलों के साथ पीले हो रहे थे। बाढ़ के पानी से सबसे अधिक नुकसान भकंदा, गुहौली, बंथरी, धाना, दिया, कटैया, बेनपुर आदि गांवों के किसानों का हुआ है। माना जा रहा है कि बाढ़ में सड़ रही फसलों से इलाके में बीमारी फैलने का खतरा है। उधर खेतों में सिल्ट और कीचड़ होने की वजह से कई दिनों तक घुसकर सफाई करना आसान नहीं होगा।
गढ़वा पहुंचे एसडीएम ने लिया जायजा
सदर एसडीएम संदीप कुमार गुप्ता बृहस्पतिवार को बाढ़ पीड़ित गढ़वा गांव का निरीक्षण कर नुकसान का जायजा लिया। एसडीएम के गांव पहुंचते ही बाढ़ पीड़ित मदद की गुहार लगाने के लिए उनके पास पहुंचे। बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर एसडीएम ने उनकी समस्याएं सुनी। भरोसा दिलाया कि शासन से मिलने वाली हर सम्भव मदद पीड़ितों को दिलाई जाएगी। इस दौरान उनके साथ तहसीलदार महेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार केके मिश्र भी मौजूद रहे।
बाढ़ घटने के बाद गंदगी से बीमारी फैल सकती है। इससे निपटने के लिए प्रशासन मुस्तैद है। संक्रामक बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीम गठित कर रखी है। कहीं कोई परेशानी होने वाली नहीं है।
श्रीकृष्ण, एडीएम कौशाम्बी