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Kaushambi News: धाता वाले एक डग्गामार के सहारे

Thu, 22 Jan 2026 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Thu, 22 Jan 2026 01:10 AM IST
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With the help of a hawker from Dhata
जिला मुख्यालय से धाता की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। रास्ते में दर्जनभर गांव पड़ते हैं, जहां से लोगों को रोज मंझनपुर आना-जाना होता है। धाता से सुबह सिर्फ एक डग्गामार बस है, जो यात्रियों को भरकर निकलती है और वही शाम को वापस होती है। इसके अलावा ई-रिक्शा ही सहारा है।
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मंझनपुर से धाता जाने वाली प्राइवेट बस का किराया 30 रुपये है। ई-रिक्शा से सफर करने पर 50 रुपये चुकाने पड़ते हैं। महंगे किराए और सीमित साधनों के कारण मजदूर, छात्र और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। शाम करीब 6:30 बजे मंझनपुर चौराहे से दुर्गा मंदिर होते हुए बस नारा गांव के रास्ते धाता पहुंचती है। सुबह यही बस करीब 6 बजे धाता से मंझनपुर के लिए रवाना होती है। इसके अलावा दिन में कोई साधन उपलब्ध नहीं है।
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मंझनपुर से धाता मार्ग के बीच सेहिया, दुवरा चौराहा, नौगीरा, जियापुर, खनवारी, मलकिया, कैनी मोड़, तेजवापुर, नारा, जुवरा, रमपुरवा और छत्तूपुर प्रमुख गांव हैं। यहां से रोजमर्रा के काम, शिक्षा, इलाज और बाजार के लिए मंझनपुर जाना पड़ता है लेकिन आवागमन इनका बड़ा सिरदर्द है। नारा के अनुज, सोनू, लालमन सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि रोडवेज बस सेवा शुरू हो जाए तो आवागमन आसान होगा। किराया भी सस्ता पड़ेगा और छात्रों, किसानों व मरीजों को राहत मिलेगी।
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कुछ गांव ई-रिक्शा के सहारे
मंझनपुर से धाता मार्ग पर चलने वाली एकमात्र निजी बस भी मुख्यालय से दुर्गा मंदिर होते हुए दूसरे मार्ग से निकलकर नारा गांव के रास्ते धाता पहुंचती है। इसके चलते नारा से पहले पड़ने वाले सेहिया, दुवरा चौराहा, कोड़र, लोटिया, कैनी मोड़, खनवारी और तेजवापुर गांवों के लोगों को बस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन गांवों के ग्रामीणों को मजबूरी में ई-रिक्शा या ऑटो का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च और समय दोनों बढ़ जाते हैं।
इनकी सुनिए...
मंझनपुर के एक निजी अस्पताल में नौकरी करता हूं। रोज सुबह-शाम आना-जाना पड़ता था। कई बार प्राइवेट बस न मिलने से काफी परेशानी होती थी। इसी कारण अब मजबूरी में अस्पताल में ही 24 घंटे रुकना पड़ रहा है। - शुभम श्रीवास्तव, लोहंगापुर, धाता
काम के सिलसिले में अक्सर मंझनपुर जाना पड़ता है। मजबूरी में प्राइवेट बस से सफर करना पड़ता है, जो कई बार समय पर नहीं मिल पाती। ऐसे में ई-रिक्शा ही सहारा बनता है, लेकिन उसका किराया भी बहुत ज्यादा है। - विक्रम सिंह, रसूलपुर


मंझनपुर-धाता मार्ग पर यात्रियों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग गंभीरता से विचार कर रहा है। जल्द ही मार्ग का सर्वे कराया जाएगा और यात्री संख्या व सड़क की स्थिति का आकलन कर बस संचालन करने का निर्णय लिया जाएगा। यदि यात्री भार पर्याप्त पाया गया तो इस रूट पर नियमित रोडवेज बस सेवा शुरू कराने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। - गंगा शंकर शर्मा, डिपो इंचार्ज
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