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डेढ़ माह में महज पांच फीसदी गेहूं की हो सकी खरीद
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 17 May 2016 12:52 AM IST
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दोआबा में इस साल गेहूं खरीद की स्थिति बेहद दयनीय है। एक अप्रैल से क्रय केंद्रों पर शुरू हुई गेहूं की खरीद अब तक महज पांच फीसदी पहुंच सकी है। उधर शासन से लक्ष्य के अनुरूप गेहूं खरीद को लेकर बन रहे दबाव से डिप्टी आरएमओ की नींद हराम है। जबकि किसान हैं कि वह क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं ले ही नहीं जा रहे हैं।
दोआबा में सरकारी रेट के मुताबिक गेहूं बेचने के लिए किसानों में होड़ रहती थी लेकिन दो साल से अन्नदाता क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने से कतरा रहे है। पिछले साल दैवीय आपदा के चलते किसानों ने गेहूं नहीं बेचा। और इस साल उन्हें शासन द्वारा निर्धारित मूल्य रास नहीं आ रहा है। इस साल गेहूं खरीद के लिए शासन ने लक्ष्य 25 हजार मीट्रिक टन रखा है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए डिप्टी आरएमओ विनीता मिश्रा ने मड़ाई के ठीक मौके पर एक अप्रैल से जिले भर में 45 क्रय केंद्र खुलवा दिए थे। पर 15 अप्रैल तक तो क्रय केंद्रों पर गेहूं की बोहनी तक नहीं हुई।
15 मई तक के विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो जिले भर में 1200 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है। जो लक्ष्य का महज पांच फीसदी है। उधर गेहूं खरीद का शतप्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के लिए शासन से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इधर अन्नदाता स्थानीय व्यापारियों के हाथ अपना गेहूं बेंचकर चैन की नींद सो रहा है। इसके चलते दोआबा में गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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दोआबा में गेहूं खरीद के लिए खुले 45 क्रय केंद्रों पर किसानों को सरकारी रेट 1525 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। ऐसे में शासन द्वारा निर्धारित गेहूं का यह रेट किसानों को नहीं भा रहा है। इसके चलते वह अपना गेहूं क्रय केंद्रों पर न ले जाकर स्थानीय व्यापारियों के हाथ बेंच दे रहे हैं। किसानों की माने तो उन्हें बिना किसी परेशानी के घर पर ही 16 सौ रुपये कुंतल का रेट मिल रहा है। इसके चलते वह क्रय केंद्र तक गेहूं ले जाने की फजीहत मोल क्यों लें।
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दोआबा में सरकारी रेट के मुताबिक गेहूं बेचने के लिए किसानों में होड़ रहती थी लेकिन दो साल से अन्नदाता क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने से कतरा रहे है। पिछले साल दैवीय आपदा के चलते किसानों ने गेहूं नहीं बेचा। और इस साल उन्हें शासन द्वारा निर्धारित मूल्य रास नहीं आ रहा है। इस साल गेहूं खरीद के लिए शासन ने लक्ष्य 25 हजार मीट्रिक टन रखा है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए डिप्टी आरएमओ विनीता मिश्रा ने मड़ाई के ठीक मौके पर एक अप्रैल से जिले भर में 45 क्रय केंद्र खुलवा दिए थे। पर 15 अप्रैल तक तो क्रय केंद्रों पर गेहूं की बोहनी तक नहीं हुई।
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15 मई तक के विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो जिले भर में 1200 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है। जो लक्ष्य का महज पांच फीसदी है। उधर गेहूं खरीद का शतप्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के लिए शासन से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इधर अन्नदाता स्थानीय व्यापारियों के हाथ अपना गेहूं बेंचकर चैन की नींद सो रहा है। इसके चलते दोआबा में गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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दोआबा में गेहूं खरीद के लिए खुले 45 क्रय केंद्रों पर किसानों को सरकारी रेट 1525 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। ऐसे में शासन द्वारा निर्धारित गेहूं का यह रेट किसानों को नहीं भा रहा है। इसके चलते वह अपना गेहूं क्रय केंद्रों पर न ले जाकर स्थानीय व्यापारियों के हाथ बेंच दे रहे हैं। किसानों की माने तो उन्हें बिना किसी परेशानी के घर पर ही 16 सौ रुपये कुंतल का रेट मिल रहा है। इसके चलते वह क्रय केंद्र तक गेहूं ले जाने की फजीहत मोल क्यों लें।