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डार्कजोन चायल में पानी के लिए हाहाकार

Wed, 20 Apr 2016 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 20 Apr 2016 11:58 PM IST
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water problem in chayal
पानी को भटक रहे हैं लोग
कौशाम्बी की चायल तहसील के उदाथू गांव के राम प्रकाश, प्रेम कुमार आदि कई परिवार महीनेभर से रोजाना खेत में लगे लगे ट्यूबवेल से पानी भरकर ढोने को मजबूर हैं। ऐसी ही समस्या चरवा गांव की बस्ती के तिवारी टोला में भी है। पूरी बस्ती के लोग खेत में लगे ट्यूबवेल से सुबह-शाम पानी भरने लाने को मजबूर हैं। हैंडपंपों के खराब होने से पेयजल के इंतजाम को ऐसी मजबूरी उदाथू या तिवारी टोला के ही लोग नहीं भुगत रहे हैं। यह दिक्कत चायल तहसील के 25 से अधिक गांवों में है। जहां गर्मी शुरू होते ही पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। मानसून में सूखे के कारण इन गांवों के 50 फीसदी हैंडपंपों से पानी नहीं निकल रहा है। हैंडपंप, कुएं, तालाब सूखे पड़े हैं। लोग फसलों की सिंचाई के लिए लगे सबमर्सिबल पंप, नलकूप से पानी भर रहे हैं। बिजली नहीं रहने पर कई पुरवों के लोगों को घर से दूर हैंडपंपों से पानी लाना पड़ता है।
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अभी अप्रैल का पहला पखवारा ही बीता है। प्रचंड गर्मी शुरू हो गई है। पारा 45 पार होने लगा है। इस रिकार्डतोड़ जानलेवा गर्मी के साथ ही कौशाम्बी में पानी की समस्या भी दिन-ब-दिन गहराने लगी है। जलनिगम विभाग के आंकड़े ही देखें तो जिले भर में 6000 से ज्यादा हैंडपंप करीब सालभर से खराब पड़े हैं। गर्मी आने के साथ इनकी संख्या में रोजाना इजाफा हो रहा है। मानसून में सूखा पड़ा था। इसका असर मार्च-अप्रैल महीने में सूखते हैंडपंप, कुएं के रूप में सामने है। जलस्तर नीचे भागने से पेयजल की समस्या गांव-गांव बढ़ने लगी है। डार्कजोन घोषित चायल में पानी की यह दिक्कत सबसे ज्यादा है। यहां के चरवा, सझिया, काजू, बेलहाई, हौसी, राम दयाल का पुरा, मोहम्मदपुर, उदाधू, चौराडीह, सुधवर, कठरा, फतेहपुर सहाबपुर, चंदौली, रसूलपुर ब्यूर, सिंहपुर समेत 25 से ज्यादा गांवों में 50 फीसदी हैंडपंपों से पानी नहीं निकल रहा है। चरवा के तिवारी टोला गांव की रहने वाली अर्चना देवी, सोमवती, प्रेमा देवी, निर्मला, जलपाई देवी, गिरिजा देवी आदि ने बताया कि सुबह-शाम का वक्त ट्यूबवेल से पानी भरकर घर ले आने में बीतता है।   
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नलकूप चलते ही शोपीस बन जाते हैं हैंडपंप
 चायल के चरवा इलाके में सूखे के कारण ज्यादातर हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। चरवा खुर्द की दलित बस्ती में लगे 8 में से 6 हैंडपंपों से पानी नहीं निकल रहा है। इसी तरह से सझिया गांव में भी 8 में 5 हैंडपंप खराब पड़े हैं। जिन दो और तीन हैंडपंपों से पानी निकल भी रहा है। उन हैंडपंपों से भी इतना कम पानी निकलता है कि एक बाल्टी भरने में आधे घंटे हैंडपंप चलाना पड़ता है। वहीं सबसे बड़ी मुसीबत तब होती है, जब आसपास किसी खेत में नलकूप अथवा सबमर्सिबल पंप चल जाता है। नलकूप चलते ही गांवों में लगे सभी हैंडपंप शोपीस बन जाते हैं।
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आठ साल से खराब हैंडपंप नहीं हुआ रीबोर
चरवा खुर्द गांव की दलित बस्ती में शिवराम के घर के सामने लगा हैंडपंप 8 साल से खराब है। शिवराम बताते हैं कि उन्होंने दर्जनभर बार इसकी शिकायत प्रधान, बीडीओ, जलनिगम के अधिकारियों को प्रार्थनापत्र देकर की। तहसील दिवस में भी 4 बार प्रार्थनापत्र दिया। बताया कि जब भी तहसील दिवस में शिकायतीपत्र देकर हैंडपंप रिबोर करवाने की मांग की, जलनिगम के कर्मचारी सर्वे करने आ जाते हैं। उसके मुताबिक 4 बार उसके हैंडपंप का सर्वे हो चुका है, लेकिन अब तक इसे ठीक नहीं कराया गया। इससे वह घर से एक किलोमीटर दूर लगे नलकूप से पानी भरकर ले आता है। शिवराम जैसे ही समस्या से गांव के करीब 80 और परिवार भी जूझ रहे हैं। इनकी समस्या का बरसों से कोई निदान नहीं हो पा रहा है।  
 
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