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तराई के गांवों में पेयजल संकट गहराया

Mon, 11 Apr 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 11 Apr 2016 11:23 PM IST
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water problem in bara area
अमरोहा के कूबी गांव में पानी का सैंपल लेते जल निगम के टेक्निशियन। - फोटो : amar ujala
यमुना तराई में बसे कौशाम्बी इलाके के दर्जनों गांवों में अप्रैल महीने में ही पेयजल को लेकर हाहाकार मच गया है। मानसून के समय बारिश कम होने और रिकार्ड तोड़ गर्मी के कारण भूजलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है। इससे हैंडपंप, कुआं सूखने लगे हैं। हैंडपंपों की मरम्मत नहीं होने से गांववालों को बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। आक्रोश कि शिकायत के बाद भी पानी की समस्या को दूर करने का कोई उपाय अफसर नहीं कर रहे हैं।  
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कौशाम्बी में बारिश के मौसम में औसत से भी कम बरसात हुई थी। इसका असर अप्रैल में ही पेयजल संकट के रूप में सामने आने लगा है। तालाब, पोखरों में पानी नहीं होने के कारण भूगर्भ जलस्तर 20 से 25 फिट नीचे खिसक गया है। ऐसे में यमुना की तराई में बसे गांवों में लगे हैंडपंप और कुओं का पानी सूखने लगा है। बानगी के तौर पर कौशाम्बी ब्लॉक के उरई अशरफपुर गांव को लिया जा सकता है। इस ग्रामसभा में कुल 60 हैंडपंप लगे हैं। गांव के रहने वाले रामसुंदर, नन्हू गौतम, राजेंद्र मिश्र आदि ने बताया कि इनमें से महीनेभर के भीतर 35 हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। यही हाल इलाके के मढ़ी, कोसम खिराज, बेराैंचा, गोपसहसा और गुरौली आदि गांवों में है। कोसम खिराज गांव के प्रधान अशोक गौतम ने बताया कि उनके यहां कुल 70 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से 42 नलों से पानी निकलना महीने भर के भीतर बंद हो चुका है। बेरौंचा गांव के प्रधान कृष्ण कुमार मिश्र की माने तो गांव में लगे 80 हैंडपंपों में 45 महीने भर से खराब पड़े हैं। इनमें से 15 हैंडपंपों की आठ दिन पहले मरम्मत कराई गई थी, लेकिन फिर से इनसे पानी निकलना बंद हो गया है। गुरौली ग्राम प्रधान मीना देवी ने बताया कि उनके यहां कुल 16 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से 10 से पानी नहीं निकल रहा है। यमुना तराई इलाके में पेयजल को लेकर मचे हाहाकार के बाद भी जलनिगम के अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। वहीं बार-बार की शिकायत के बाद भी पानी की समस्या का समाधान नहीं होने से गांववालों में गुस्सा है।  
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क्या कहते हैं खंड विकास अधिकारी
हैंडपंपों के खराब होने की जानकारी ग्रामीणों से मिली है। प्रधानों की ओर से मिली हैंडपंपों की सूची को रीबोर के लिए जलनिगम विभाग को भेज दिया गया है। हैंडपंपों के रीबोर की जिम्मेदारी जलनिगम की है। रिमाइंडर भी भेजा गया है। बजट का अभाव बताकर जलनिगम विभाग के अफसर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में क्या किया जा सकता है।
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कमलेश सिंह, बीडीओ कौशाम्बी
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