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बढ़ता तापमान वोटिंग में अग्नि परीक्षा से कम नहीं
Wed, 01 May 2019 06:50 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कौशांबी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कौशांबी
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 01 May 2019 06:50 PM IST
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पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। पिछले एक हफ्ते से तापमान का बढ़ता ग्राफ मतदान प्रतिशत बढ़ाने की राह में खलल साबित हो सकता है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यही हाल रहा तो आग बरसती धूप और लू के थपेड़ों के बीच तपती दोपहर में बूथों पर घंटों लाइन में खड़े होना वोटरों के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा। हालांकि प्रशासन की ओर से बूथों पर दी जा रही सुविधाओं और उससे पहले चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों में मतदाताओं का दिख रहा उत्साह हर चुनौती से जूझने को तैयार है।
कौशांबी संसदीय सीट पर पांचवें चरण के तहत लोकसभा चुनाव के लिए छह मई को वोट डाले जाएंगे। इस बार यहां सामान्य से बहुत कम बारिश होने के कारण वातावरण से नमी एकदम गायब है। इसके चलते दिन प्रतिदिन पारा ऊपर की ओर चढ़ता जा रहा है। हफ्ते भर से तापमान 40 से 43 डिग्री के बीच चल रहा है। माना जा रहा है कि मतदान के दिन स्थिति और खतरनाक हो सकती है। ऐसे में आग बरसती धूप में घर से निकल कर मतदान केंद्रों पर लाइन में खड़े होकर वोट डालने का इंतजार करना मतदाताओं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। खास बात तो यह है कि इन दिनों खेत-खलिहान में कटाई-मड़ाई का काम चल रहा है।
मजदूरों, किसानों की व्यस्तता के चलते वोटिंग को लेकर संसय है। इस पर मौसम की बेरुखी मतदान प्रतिशत प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से वोटरों की सुविधा के लिए बूथों पर छाया, पेयजल, बैठने की व्यवस्था समेत सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है। पर सूरज की तल्खी देख प्रशासन के साथ ही प्रत्याशियों की नींद उड़ी है। क्योंकि 2014 का लोकसभा चुनाव भी तकरीबन इसी सीजन में हुआ था। उस चुनाव में बमुश्किल 53 फीसदी ही मतदान हो सका था।
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कौशांबी संसदीय सीट पर पांचवें चरण के तहत लोकसभा चुनाव के लिए छह मई को वोट डाले जाएंगे। इस बार यहां सामान्य से बहुत कम बारिश होने के कारण वातावरण से नमी एकदम गायब है। इसके चलते दिन प्रतिदिन पारा ऊपर की ओर चढ़ता जा रहा है। हफ्ते भर से तापमान 40 से 43 डिग्री के बीच चल रहा है। माना जा रहा है कि मतदान के दिन स्थिति और खतरनाक हो सकती है। ऐसे में आग बरसती धूप में घर से निकल कर मतदान केंद्रों पर लाइन में खड़े होकर वोट डालने का इंतजार करना मतदाताओं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। खास बात तो यह है कि इन दिनों खेत-खलिहान में कटाई-मड़ाई का काम चल रहा है।
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मजदूरों, किसानों की व्यस्तता के चलते वोटिंग को लेकर संसय है। इस पर मौसम की बेरुखी मतदान प्रतिशत प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से वोटरों की सुविधा के लिए बूथों पर छाया, पेयजल, बैठने की व्यवस्था समेत सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है। पर सूरज की तल्खी देख प्रशासन के साथ ही प्रत्याशियों की नींद उड़ी है। क्योंकि 2014 का लोकसभा चुनाव भी तकरीबन इसी सीजन में हुआ था। उस चुनाव में बमुश्किल 53 फीसदी ही मतदान हो सका था।
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