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Kaushambi News: दिवाली तक डिजिटल भुगतान पर शुल्क टलने से व्यापारियों को राहत
Mon, 26 Oct 2026 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 26 Oct 2026 01:32 AM IST
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नीरज बनारसी, राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन वरिष्ठ जिला महामंत्री ।
- फोटो : udhampur news
त्योहारों का सीजन शुरू होते ही बाजार में खरीदारी बढ़ गई है। ऐसे में यूपीआई से दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क को दिवाली तक स्थगित किए जाने से व्यापारियों को राहत मिली है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि शुल्क को केवल टालने के बजाय इसे पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए।
व्यापारियों ने बताया कि यूपीआई से दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर 15 अक्तूबर से 40 पैसे एमडीआर शुल्क लगाए जाने की चर्चा थी। इससे किराना, कपड़ा, सराफा, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल दुकानदारों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका थी। वर्तमान में बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के बाद यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं। इससे नकदी रखने की जरूरत भी कम हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था को दीपावली तक स्थगित किए जाने से व्यापारियों ने राहत की सांस ली है लेकिन उनकी मांग है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा पहले की तरह बिना शुल्क के जारी रखी जाए।
- बोले व्यापारी
एमडीआर शुल्क को दिवाली तक टालना व्यापारियों को केवल अस्थायी राहत देना है। त्योहारों में ग्राहक अधिकतर डिजिटल भुगतान करते हैं। ऐसे में शुल्क लागू होने से व्यापारियों का खर्च बढ़ेगा।
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-- नीरज बनारसी, राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन वरिष्ठ जिला महामंत्री ।
आज के समय में डिजिटल भुगतान व्यापार का अहम हिस्सा बन चुका है। दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर ऑनलाइन भुगतान का इस्तेमाल और बढ़ जाता है। ऐसे में एमडीआर शुल्क लगने से दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
-- अरविंद कुमार केसरवानी, अध्यक्ष राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन कौशाम्बी।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन एमडीआर शुल्क लागू करना इस दिशा में बाधा बन सकता है। छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क वहन करना मुश्किल होगा।
- अनिल कुमार यादव, राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन कौशाम्बी मीडिया प्रभारी।
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व्यापारियों ने बताया कि यूपीआई से दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर 15 अक्तूबर से 40 पैसे एमडीआर शुल्क लगाए जाने की चर्चा थी। इससे किराना, कपड़ा, सराफा, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल दुकानदारों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका थी। वर्तमान में बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के बाद यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं। इससे नकदी रखने की जरूरत भी कम हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था को दीपावली तक स्थगित किए जाने से व्यापारियों ने राहत की सांस ली है लेकिन उनकी मांग है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा पहले की तरह बिना शुल्क के जारी रखी जाए।
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- बोले व्यापारी
एमडीआर शुल्क को दिवाली तक टालना व्यापारियों को केवल अस्थायी राहत देना है। त्योहारों में ग्राहक अधिकतर डिजिटल भुगतान करते हैं। ऐसे में शुल्क लागू होने से व्यापारियों का खर्च बढ़ेगा।
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आज के समय में डिजिटल भुगतान व्यापार का अहम हिस्सा बन चुका है। दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर ऑनलाइन भुगतान का इस्तेमाल और बढ़ जाता है। ऐसे में एमडीआर शुल्क लगने से दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन एमडीआर शुल्क लागू करना इस दिशा में बाधा बन सकता है। छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क वहन करना मुश्किल होगा।
- अनिल कुमार यादव, राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन कौशाम्बी मीडिया प्रभारी।

नीरज बनारसी, राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन वरिष्ठ जिला महामंत्री ।- फोटो : udhampur news

नीरज बनारसी, राष्ट्रीय जनउद्योग व्यापार संगठन वरिष्ठ जिला महामंत्री ।- फोटो : udhampur news