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Kaushambi News: जीएसटी की गुणा- गणित में जुटे व्यापारी, नई दरों को लेकर उलझन
Sun, 21 Sep 2025 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sun, 21 Sep 2025 12:18 AM IST
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जीएसटी की गुणा-गणित में त्योहारी सीजन से पहले ही जिले के व्यापारी उलझ गए हैं। 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू हो जाएंगी। इससे बाजार में सामान की कीमतों का समीकरण बदलेगा। इसी बदलाव ने व्यापारी असमंजस में हैं कि मौजूदा दर पर सामान मंगवाएं या फिर नई दरों का इंतजार करें।
जीएसटी के जानकारों के मुताबिक, दुर्गा पूजा से दिवाली तक जनपद के बाजारों में लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। कपड़े, मिठाई, सजावट सामग्री, जूत चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पूजा सामग्री से लेकर यात्रा और मनोरंजन तक हर क्षेत्र में रौनक रहती है।
जीएसटी दरों में कमी से इस बार त्योहारी सीजन में उपभोक्ता खर्च में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है, लेकिन व्यापारियों की उलझन यह है कि 22 सितंबर के बाद जीएसटी दरें घटने वाली हैं। ऐसे में अगर वे अभी स्टॉक खरीदते हैं तो उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, लेकिन 22 से माल कम दाम पर बेचना होगा। कर मामलों के जानकर देशराज पाल ने बताया कि यदि व्यापारी उच्च दर पर माल खरीदते हैं और बाद में निम्न दर पर बेचते हैं तो आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) समायोजन में अंतर आएगा, क्योंकि जो आईटीसी 28 फीसदी पर मिला है, उसे 18 प्रतिशत पर समायोजित करना होगा। शेष 10 प्रतिशत क्रेडिट लेजर में फंसा रह जाएगा, जिसका उपयोग करना मुश्किल होगा।
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फुटवियर कारोबारी संजीव आहूजा ने बताया कि पहले जूते पर 18 फीसदी जीएसटी था, अब पांच फीसदी हो गया है।
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जीएसटी के जानकारों के मुताबिक, दुर्गा पूजा से दिवाली तक जनपद के बाजारों में लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। कपड़े, मिठाई, सजावट सामग्री, जूत चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पूजा सामग्री से लेकर यात्रा और मनोरंजन तक हर क्षेत्र में रौनक रहती है।
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जीएसटी दरों में कमी से इस बार त्योहारी सीजन में उपभोक्ता खर्च में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है, लेकिन व्यापारियों की उलझन यह है कि 22 सितंबर के बाद जीएसटी दरें घटने वाली हैं। ऐसे में अगर वे अभी स्टॉक खरीदते हैं तो उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, लेकिन 22 से माल कम दाम पर बेचना होगा। कर मामलों के जानकर देशराज पाल ने बताया कि यदि व्यापारी उच्च दर पर माल खरीदते हैं और बाद में निम्न दर पर बेचते हैं तो आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) समायोजन में अंतर आएगा, क्योंकि जो आईटीसी 28 फीसदी पर मिला है, उसे 18 प्रतिशत पर समायोजित करना होगा। शेष 10 प्रतिशत क्रेडिट लेजर में फंसा रह जाएगा, जिसका उपयोग करना मुश्किल होगा।
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फुटवियर कारोबारी संजीव आहूजा ने बताया कि पहले जूते पर 18 फीसदी जीएसटी था, अब पांच फीसदी हो गया है।