छलका दर्द : बदमाशों के खौफ से बचने के लिए खरीदा था असलहा, अब पुलिस बता रही माफिया का मददगार
वर्षो पहले इलाके में चित्रकूट जिले के बदमाश आकर वारदात करते थे। आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस कराया, पर क्या पता था कि जिस असलहे को खुद तथा परिवार की हिफाजत के लिए खरीदा, आज वही मुसीबत बन जाएगा।
विस्तार
शिक्षा विभाग में डिप्टी पद से सेवानिवृत्त हो चुके 60 वर्षीय बुजुर्ग अमानत उल्ला शूटर अब्दुल कवि के मददगारों के पास से बरामद उनकी लाइसेंसी दोनाली बंदूक की बाबत पूछने पर सुबक पड़े। बोले, मेरा गांव युषुफपुर यमुना की तराई में हैं। वर्षो पहले इलाके में चित्रकूट जिले के बदमाश आकर वारदात करते थे। आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस कराया, पर क्या पता था कि जिस असलहे को खुद तथा परिवार की हिफाजत के लिए खरीदा, आज वही मुसीबत बन जाएगा।
यह दर्द अकेले अमानत उल्ला का नहीं बल्कि क्षेत्र के भखंदा, कटैया, पुरखास, बेरूई व युषुफपुर गांव से बरामद किए जा चुके उन 28 शस्त्र धारकों का है जिनके असलहे पुलिस ने जब्त किए। हालांकि कोई भी लाइसेंस धारक पकड़ा नहीं गया लेकिन उनके असलहों को माफिया अतीक के शूटर अब्दुल कवि के मददगारों के पास से बरामद होना दिखाकर जेल भेजा गया है।
वर्ष 2005 में राजूपाल हत्याकांड के बाद भखंदा गांव के अब्दुल कवि का नाम प्रकाश में आया। अब्दुल कवि माफिया अतीक का शूटर था। सीबीआई ने उसे भगोड़ा घोषित किया है। 24 फरवरी को राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल व उनके दो सरकारी गनर की हत्या के बाद से कवि का नाम फिर सुर्खियों में आया। कवि के घर को जमींदोज कराकर दीवारों में छिपाकर रखे भारी तादात में तमंचा व बम बरामद किया गया।
इस मामले में कवि के परिवार के 11 सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इस बीच अब्दुल कवि का भाई अब्दुल कादिर का कई लाइसेंसी असलहों के साथ फोटो वायरल हुई। जबकि छानबीन में पता चला कि कवि के पिता अब्दुल गनी के पास ही सिंगल बैरल बंदूक का लाइसेंस था। पुलिस को शक हुआ कि कवि का परिवार इलाके के लोगों का लाइसेंसी शस्त्र अपने गुर्गो के पास रखता था और उन्हीं के सहारे रौब गालिब करता था।
इस पर पिछले दिनों पुलिस ने भखंदा, कटैया, पुरखास, युषुफपुर, बेरुई गांव में सघन तलाशी अभियान चलाया। जिसमें कुल 19 लोग पकड़े गए और उनके पास से 44 असलहे बरामद हुए। जिसमें से 28 शस्त्र लाइसेंसी थे, लेकिन उनका इस्तेमाल शूटर के मददगार करते थे। इस बाबत अमर उजाला ने शनिवार को पड़ताल की तो मालूम चला कि पुलिस ने ज्यादातर असलहे शस्त्र धारकों के घर से बरामद कर उनकी बरामदी शूटर के मददगारों के पास से दिखाई है।
पुरखास गांव के मो. सैफ सीमेंट-सरिया की दुकान खोले हैं। पुलिस ने उनकी रायफल तो बरामद की लेकिन सैफ को पकड़ा नहीं गया। ईंट भट्ठा संचालक जावेद की रायफल भी पुलिस ने कब्जे में लिया। युषुफपुर गांव के शकील (50) व उनके सगे भाई तनवीर की दोनाली बंदूक पुलिस ले गई है। यह लोग भी किसानी करते हैं।
पुलिस अब तक नहीं लगा सकी लाइसेंस धारकों का पता
पुलिस की तरफ से जिन 28 लाइसेंस धारकों के असलहें बरामद किए जा चुके हैं, उनके से अब तक पुलिस सिर्फ 12 का नाम ही खोज सकी। पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो पुरखास के जावेद की रायफल, सैफ की रायफल, कटैया के नौसाद, तनवीर की दोनाली बंदूक, युषुफ की एइनाली बंदूक, रुखसार खां की रायफल, जुम्मन खां की इकनाली बंदूक, सदरुद्दीन की रायफल, जुल्फेकार, जुम्मन खां की सिंगल बैरक बंदूक, सदरुद्दीन की रायफल, भखंदा के निजामउद्दीन, अजीज व महफूज की दोनाली बंदूक के बाबत ही पता चल सका है।
ज्यादातर शस्त्र धारक बुजुर्ग या कारोबारी
पुलिस ने जिन 28 लाइसेंसी असलहों को बरामद किया है उनके शस्त्र धारकों की उम्र 40 या फिर उससे ऊपर है। कोई किसानी करता है तो किसी के पास खुद का व्यापार है। दरअसल भखंदा, पुरखास, युषुफपुर, कटैया यह गांव यमुना नदी के किनारे हैं। यहां पर बदमाशों के गैंग का अक्सर आना-जाना रहता है।
चित्रकूट पुलिस ने अगर उधर सख्ती की तो बदमाश यमुना पार करके इसी इलाके के जंगलों की शरण लेते हैं। इस क्षेत्र के शूटर अब्दुल कवि व उसके मददगार साथी भी पुलिस की घेराबंदी करने के दौरान यमुना नदी पार कर चित्रकूट जिले की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। जिसकी वजह से गैंग पकड़ा नहीं जा पाता।
अब तक बरामद हो चुके 12 शस्त्रों के लाइसेंस धारकों के नाम-पते की तस्दीक हो चुकी है। कुल 28 लाइसेंसी असलहे शूटर अब्दुल कवि के मददगारों के पास से बरामद हुए थे। बाकी की तस्दीक कराने के लिए जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई है। - विनीत सिंह, इंस्पेक्टर सरायअकिल
आखिर कौन है इटैला का रहने वाला शूटर कवि का बिजनेस पार्टनर
कौशाम्बी कोतवाली का इटैला गांव अब्दुल कवि की फरारी के बाद सुर्खियों में आ चुका है। बताया जाता है कि इस गांव में रहने वाला एक व्यक्ति एक लाख के इनामी अब्दुल कवि का मददगार होने के साथ ही बिजनेस पार्टनर है। प्रयागराज में उसने अब्दुल कवि व माफिया अतीक के पैसे से काफी बड़े पैमाने पर प्लाटिंग कर रखी है। ग्रामीणों में चर्चा रही कि कवि का अक्सर इटैला आना-जाना होता था। 24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड के बाद से यह मददगार भी भूमिगत हो गया है। ग्रामीणों की मानें तो उसका मोबाइल भी स्वीच ऑफ है।