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Kaushambi News: गैंगस्टर के तीन दोषियों को पांच साल की सजा, जुर्माना भी लगाया
Fri, 19 Jan 2024 04:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 19 Jan 2024 04:18 AM IST
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अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट आभा पाल की अदालत ने गैंगस्टर एक्ट के तीन दोषियों को पांच-पांच साल की कैद व 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। मुकदमे के विचारण के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी है। पुरामुफ्ती पुलिस ने सभी के खिलाफ 14 साल पहले गैंगस्टर के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
वादी अभियोजन के अनुसार 10 जून 2009 को पुरामुफ्ती के तत्कालीन थानाध्यक्ष राधा चरण सिंह ने असरौली निवासी मासूक उद्दीन उर्फ मासूक, उसके भाई महबूब उद्दीन, चचेरे भाई असलूब व बेटे शाहेजमन के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने 15 जून 2009 को अनुमोदन देकर पुलिस को विवेचनात्मक का निर्देश दिया।
विवेचना के बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। राज्य सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश केसरवानी ने वादी थानाध्यक्ष समेत कुल 11 गवाह कोर्ट में बुलाकर गवाही कराई।
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दौरान विचारण आरोपी महबूब उद्दीन की मौत हो जाने पर कोर्ट ने उसका नाम कार्रवाई से हटा दिया था। दोनों ओर से की गई बहस को सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य का मूल्यांकन कर कोर्ट ने मासूक उद्दीन उर्फ मासूक, असलूब व शाहेजमन को समाज विरोधी क्रिया-कलाप में लिप्त होने का दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास व 25-25 हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
शीतलहरी के चलते वकीलों ने किया नो-एडवर्ड्स प्रस्ताव
मंझनपुर। बृहस्पतिवार को शीत-लहरी के चलते माडल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने पुनः नो-एडवर्ड्स का प्रस्ताव पारित किया है। विगत तीन दिन से लगातार पड रही कडाके की ठंड के चलते अधिवक्ताओं और वादकारियों की निरंतर कम होती उपस्थिति के मद्देनजर एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार जायसवाल व महामंत्री लच्छ्मीकांत त्रिपाठी ने संगठन के लोगों के साथ बैठक कर सर्व सम्मति से नो-एडवर्ड्स का प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव की प्रति जिला जज अनुपम कुमार को देने के बाद जिला न्यायालय समेत सभी न्यायालयों में वकीलों ने कोई भी काम-काज नहीं किया। इसके चलते अदालत परिसर में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा।
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वादी अभियोजन के अनुसार 10 जून 2009 को पुरामुफ्ती के तत्कालीन थानाध्यक्ष राधा चरण सिंह ने असरौली निवासी मासूक उद्दीन उर्फ मासूक, उसके भाई महबूब उद्दीन, चचेरे भाई असलूब व बेटे शाहेजमन के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने 15 जून 2009 को अनुमोदन देकर पुलिस को विवेचनात्मक का निर्देश दिया।
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विवेचना के बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। राज्य सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश केसरवानी ने वादी थानाध्यक्ष समेत कुल 11 गवाह कोर्ट में बुलाकर गवाही कराई।
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दौरान विचारण आरोपी महबूब उद्दीन की मौत हो जाने पर कोर्ट ने उसका नाम कार्रवाई से हटा दिया था। दोनों ओर से की गई बहस को सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य का मूल्यांकन कर कोर्ट ने मासूक उद्दीन उर्फ मासूक, असलूब व शाहेजमन को समाज विरोधी क्रिया-कलाप में लिप्त होने का दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास व 25-25 हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
शीतलहरी के चलते वकीलों ने किया नो-एडवर्ड्स प्रस्ताव
मंझनपुर। बृहस्पतिवार को शीत-लहरी के चलते माडल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने पुनः नो-एडवर्ड्स का प्रस्ताव पारित किया है। विगत तीन दिन से लगातार पड रही कडाके की ठंड के चलते अधिवक्ताओं और वादकारियों की निरंतर कम होती उपस्थिति के मद्देनजर एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार जायसवाल व महामंत्री लच्छ्मीकांत त्रिपाठी ने संगठन के लोगों के साथ बैठक कर सर्व सम्मति से नो-एडवर्ड्स का प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव की प्रति जिला जज अनुपम कुमार को देने के बाद जिला न्यायालय समेत सभी न्यायालयों में वकीलों ने कोई भी काम-काज नहीं किया। इसके चलते अदालत परिसर में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा।