{"_id":"ca71db24ecaa09f9907407d0be5da512","slug":"the-water-problems-deepened-in-kaushambi-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कौशाम्बी में गहराने लगी पानी की समस्या ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कौशाम्बी में गहराने लगी पानी की समस्या
ब्यूरो/अमर उजाला, कौशाम्बी
Updated Sun, 22 Mar 2015 12:08 AM IST
विज्ञापन
गर्मी के दस्तक देते ही कौशाम्बी में पानी की समस्या गहराने लगी है। सबसे ज्यादा परेशानी यमुना के तराई गांवों में है। जहां गिरते जलस्तर के कारण हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। चायल और नेवादा ब्लाक के तमाम गांव में एक माह में ही सैकड़ों हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। वहीं जलनिगम के ही आंकड़ों को देखें तो सालभर से करीब तीन हजार हैंडपंप खराब पड़े हैं। एक्सईएन जेएन उपाध्याय का कहना है कि बजट नहीं मिलने से हैंडपंपों को रिबोर नहीं कराया जा सका है।
कौशाम्बी में गर्मी के दिनों में पानी का संकट एक बड़ी समस्या बनकर उभरती है। दशकभर से गहराती इस समस्या से निपटने की तैयार नहीं की गई। अभी गरमी की सिर्फ शुरूआत ही हुई है। मार्च में ही यमुना की तराई में बसे चायल-नेवादा ब्लाक के गांवों का जलस्तर 70 से 100 फिट के आसपास पहुंच गया है। इसके कारण नेवादा ब्लाक के भगवानपुर, बसुहार, चायल ब्लाक के रसूलपुर ब्यूर, चायल, सेउथा आदि गांवों में सैकड़ों हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। इसी तरह और सिराथू तहसील के पइंसा, अफजलपुर वारी, मधवामई, इचौली, बसोहनी, खोराव, बालकमऊ, मंझनपुर के भेलखा, टेनशाह आलमाबाद, मूरतगंज के नसीरपुर, शोभना, चरवा, सैयदसरावां आदि गांवों में लगे सैकड़ों हैंडपंप शोपीस बन गए हैं।
वहीं जलनिगम के ही आंकड़ों को देखें तो सालभर से करीब तीन हजार हैंडपंप खराब पड़े हैं। इसके कारण सौ से भी ज्यादा पुरवों के हजारों लोगों को घर से दूर हैंडपंप से पानी भरकर लाना पड़ता है। नेवादा के रहने वाले रमेश कुमार, राजेश कुमार, रज्जन, सूरजबली, हरिओम, मेवालाल, अनिल कुमार, मानसिंह, महाजन, आदि ने बताया कि समस्या से अवगत कराने के बाद भी प्रधान, बीडीओ और जलनिगम के अधिकारी हैंडपंपों की मरम्मत अथवा रिबोर कराने में कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। मामले में एक्सईएन जलनिगम जेएन उपाध्याय का कहना है कि रिबोर के लिए करीब दो साल से बजट नहीं मिला है। बताया कि जिलाधिकारी के माध्यम से कई बार उच्चाधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कौशाम्बी में गर्मी के दिनों में पानी का संकट एक बड़ी समस्या बनकर उभरती है। दशकभर से गहराती इस समस्या से निपटने की तैयार नहीं की गई। अभी गरमी की सिर्फ शुरूआत ही हुई है। मार्च में ही यमुना की तराई में बसे चायल-नेवादा ब्लाक के गांवों का जलस्तर 70 से 100 फिट के आसपास पहुंच गया है। इसके कारण नेवादा ब्लाक के भगवानपुर, बसुहार, चायल ब्लाक के रसूलपुर ब्यूर, चायल, सेउथा आदि गांवों में सैकड़ों हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। इसी तरह और सिराथू तहसील के पइंसा, अफजलपुर वारी, मधवामई, इचौली, बसोहनी, खोराव, बालकमऊ, मंझनपुर के भेलखा, टेनशाह आलमाबाद, मूरतगंज के नसीरपुर, शोभना, चरवा, सैयदसरावां आदि गांवों में लगे सैकड़ों हैंडपंप शोपीस बन गए हैं।
विज्ञापन
वहीं जलनिगम के ही आंकड़ों को देखें तो सालभर से करीब तीन हजार हैंडपंप खराब पड़े हैं। इसके कारण सौ से भी ज्यादा पुरवों के हजारों लोगों को घर से दूर हैंडपंप से पानी भरकर लाना पड़ता है। नेवादा के रहने वाले रमेश कुमार, राजेश कुमार, रज्जन, सूरजबली, हरिओम, मेवालाल, अनिल कुमार, मानसिंह, महाजन, आदि ने बताया कि समस्या से अवगत कराने के बाद भी प्रधान, बीडीओ और जलनिगम के अधिकारी हैंडपंपों की मरम्मत अथवा रिबोर कराने में कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। मामले में एक्सईएन जलनिगम जेएन उपाध्याय का कहना है कि रिबोर के लिए करीब दो साल से बजट नहीं मिला है। बताया कि जिलाधिकारी के माध्यम से कई बार उच्चाधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जा चुका है।
विज्ञापन