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सुस्त हुई यमुना की रफ्तार, गंगा का जलस्तर घटा

Thu, 12 Aug 2021 07:30 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Thu, 12 Aug 2021 07:30 PM IST
सार

यमुना नदी की रफ्तार में अचानक कमी आई है। बुधवार को दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच यमुना नदी में सिर्फ एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्घि हुई।

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The speed of Yamuna slowed down, the water level of Ganga decreased
The speed of Yamuna slowed down, the water level of Ganga decreased - फोटो : KAUSHAMBI

विस्तार

हफ्ते भर बुधवार को यमुना की रफ्तार सुस्त हुई। हालांकि जलस्तर में वृद्घि लगातार जारी है। चार घंटे में यमुना जहां केवल एक सेमी बढ़ी हैं वहीं गंगा का जलस्तर एक सेमी घटा है। गंगा-यमुना के रौद्र रूप से बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है। नदियों की बाढ़ के साथ ही बारिश तराई के बासिंदों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोग परेशान हैं। घरों में पानी घुसने से उनके रातों की नींद उड़ी हुई है। आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के मुख्य मार्ग अभी डूबे हुए हैं। लोग जान पर खेलकर नाव से सफर करने को मजबूर हैं।
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यमुना नदी की रफ्तार में अचानक कमी आई है। बुधवार को दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच यमुना नदी में सिर्फ एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्घि हुई। सिंचाई विभाग के एक्सईएन जगदीश लाल के मुताबिक शाम चार बजे नैनी में यमुना का जलस्तर 85.77 मीटर रिकार्ड किया गया। जबकि फाफामऊ में गंगा का 86.03 मीटर रिकार्ड किया गया। जो एक सेमी घटा हुआ पाया गया। हालांकि दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से क्रमश: एक और 1.3 मीटर ऊपर बह रही हैं। जबकि किशुनपुर पंप कैनाल में यमुना का जलस्तर 20 सेमी घटा है।
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आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि अगले 24 घंटे के भीतर यमुना का जलस्तर घटने लगेगा। इससे अफसर राहत महससू कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जनपद में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बाढ़ ग्रस्त इलाकों की मुसीबतें और बढ़ा दी है। नाला के जरिए आ रहा पानी तो थम चुका है, लेकिन अब बारिश का पानी नहीं निकल पा रहा है।
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ऊपरी इलाकों में रह रहे लोग भी इससे हलाकान हैं।बारिश का पानी गलियों में घुटनों तक भर गया है। पिपरहटा, चकपिन्हा, भवनसुरी, शाहपुर आदि गांव अभी भी टापू बने हुए हैं। बाढ़ के पानी से बुधवार को सदर तहसील के पाली गांव का भी संपर्क कट गया। बाढ़ प्रभावित इलाके में जलीय जंतुओं का खतरा बढ़ गया है। लोग समूह में रतजगा करने को मजबूर हैं।

तराई क्षेत्र में महंगे हो गए जरूरी समान
मंझनपुर। यमुना के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण आधा दर्जन गांवों के संपर्क मार्ग डूब गए हैं। लोग नाव से जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। हफ्ते भर से बनी समस्या के कारण रोजमर्रा के जरूरी समानों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसके चलते गंवई दुकानदार महंगे दाम पर समान बेच रहे हैं। इससे बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।

प्रभावित हुई पुलिस गश्त, बाधित हो रहा नेटवर्क
चायल। मल्हीपुर, कटैया, पिपरहटा आदि गांवों की गश्त करने में मौजूदा समय पुलिस को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बीट के सिपाही नाव से उस पार जाते हैं। नाव में वह अपनी बाइक भी लादकर ले जाते हैं ताकि संबंधित गांवों तक वह आसानी से पहुंच सके, लेकिन मुसीबत यह है कि वह बाढ़ के पानी से गांव घिरे होने के कारण वह गांव से पहले ही रुक जाते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में अचानक नेटवर्क की भी समस्या आ गई है।

बाढ़ की रफ्तार सुस्त पड़ने के साथ ही बीमारी का खतरा बढ़ा
चायल। बाढ़ से चायल तहसील के आधा दर्जन से अधिक गांव पिछले करीब एक सप्ताह से प्रभावित हैं। गांवो के आपसी सम्पर्क मार्ग कटे हैं। नाव के सहारे लोगों का आवागमन हो रहा है। लगातार बढ़ रही यमुना के पानी से घिरे नंदा का पूरा, मल्हीपुर, कटैया, भखन्दा, पिपरहटा, उमरवल आदि गांवों के लोग भयभीत है। गांवो में बाढ़ के पानी से किसानों की फसलें डूबी हुई है। मवेशियों के लिए चारे के संकट छाया हुआ है।


बाढ़ के पानी से भरे गांवों में अब बीमारी के बढ़ने की जबरदस्त आशंका है। इसे लेकर बाढ़ प्राभवित गांव के लोग परेशान है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई खास इंतजाम नहीं किए गए है। गांवो में कैम्प नहीं लगाया जा रहा है। ग्रामीणों ने इसको लेकर स्थानीय अधीकरियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दौरान इलाकाई गांवो में कैंप लगाकर चिकित्सीय सुविधाएं दी जाती थी लेकिन इस वर्ष कोई खास इंतजाम नहीं किये गए है।
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