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कौशाम्बी के शिक्षित युवाओं को नहीं मिली नौकरी तो बन गए मजदूर

Wed, 12 Jan 2022 12:51 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 12:51 AM IST
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The educated youth of Kaushambi did not get jobs and became laborers
नौकरी मिली नहीं, पांच सौ के भत्ते के लिए 93 हजार ने कराया पंजीकरण
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सेवायोजन विभाग भी पांच साल में सिर्फ 1867 लोगों को दिला सका रोजगार
मंझनपुर। भावी सरकार को लेकर एक बार फिर जिले के शिक्षित बेरोजगार तमाम सपने देख रहे हैं। जिले में बढ़ती बेरोजगारी की तरफ किसी भी राजनीतिक दल का ध्यान नहीं है। हालांकि भाजपा सरकार में भी अपेक्षाकृत रोजगार नहीं मिलने के कारण ग्रेजुएट लोगों ने भी पांच सौ के भत्ते के लिए ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन कराकर खुद को श्रमिक साबित कर दिया। अब तक 93 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है।
जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर इस बार 11 लाख 82 हजार 518 मतदाता मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। खास बात यह है कि इन वोटरों में छह लाख 31 हजार 27 मतदाताओं की उम्र 18 से 39 वर्ष है। इससे यह साफ है कि जिले की सभी सीटों पर युवा मतदाता निर्णायक की भूमिका में होंगे। इसके बाद भी यहां लोगों को रोजगार दिए जाने के लिए पहल नहीं हो सकी। सेवा योजन कार्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले पांच साल में करीब 16 हजार 85 बेरोजगारों ने रोजगार के लिए पंजीकरण कराया। जिसके सापेक्ष पांच साल में तकरीबन 1867 लोगों को ही रोजगार मिल सका। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए पांच सौ रुपये प्रतिमाह भत्ता देने का एलान किया। इसके लिए ई-श्रम पोर्टल पर 31 दिसंबर तक पंजीकरण कराने वाले लोगों को योजना का लाभ दिया जाना था। इसका असर रहा कि अब तक 93 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। श्रम विभाग के सूत्रों की मानें तो पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों की शिक्षा का कोई कॉलम भरने के लिए नहीं था, लेकिन जिस तरह से आवेदन हुए उसमें पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या अधिक है।
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परीक्षाओं के पेपर लीक होने से बढ़ी समस्या
मंझनपुर। पिछले दिनों शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। करीब दो साल पहले बीटीसी (अब डीएलएड) की परीक्षा का भी पेपर लीक हो गया। इसके अलावा तमाम सरकारी विभागों की भर्तियां नहीं हो सकीं। इसकी वजह से बेरोजगारों की फौज बढ़ती जा रही है।
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असलहा बना जीविका का साधन
मंझनपुर। जिले में करीब 15 हजार शस्त्रधारक हैं। इसमें से करीब 20 प्रतिशत लोगों ने इसलिए असलहा खरीदा है, जिससे कि परिवार का खर्च चल सके। नौकरी नहीं मिलने पर आत्मरक्षा के लिए कहकर लिए जाने वाले शस्त्र के लाइसेंस से युवा गैर प्रांतों में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने के लिए विवश हैं।

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इनका कहना है
ई-श्रम पोर्टल पर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण होना था। श्रमिक की उम्र क्या है और उसकी कितनी शिक्षा है, इसके लिए अलग से कोई मानक नहीं निर्धारित किया गया। जिन लोगों ने पंजीयन कराया, उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है।-शक्ति राय, जिला श्रम अधिकारी
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