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Kaushambi News: महिलाओं को साधने की कोशिश कर गए डिप्टी सीएम
Mon, 02 Feb 2026 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:25 AM IST
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नीरज सिंह
विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश कार्यक्रम के जरिये उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जिले में महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश की। भाषण में उनका सारा फोकस महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों पर रहा, जिनकी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा भी रही कि बिहार चुनाव में भाजपा की जीत में सामने आए महिला फैक्टर का असर है।
कौशाम्बी जिले में वर्तमान में करीब साढ़े आठ हजार महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। प्रत्येक समूह से करीब 10 महिलाएं जुड़ी हैं। इस हिसाब से इनकी संख्या 80 हजार से ज्यादा है। यदि प्रत्येक महिला के साथ परिवार के तीन अन्य सदस्यों को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब ढाई लाख पहुंच जाता है।
ऐसे में समूहों के माध्यम से बड़ी आबादी को डिप्टी सीएम के साधने की रणनीति साफ नजर आई। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले के स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न स्तरों पर करीब तीन करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की संख्या बढ़ाने की योजना है। साथ ही प्रत्येक ब्लॉक में 100 दिनों के भीतर पांच-पांच करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लगाने की बात भी कही। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की नीतियों और योजनाओं का केंद्र महिलाएं। यह कहीं न कहीं बिहार चुनाव में भाजपा की जीत में सामने आए फैक्टर को प्रभावी करने की रणनीति लगी। संवाद
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विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश कार्यक्रम के जरिये उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जिले में महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश की। भाषण में उनका सारा फोकस महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों पर रहा, जिनकी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा भी रही कि बिहार चुनाव में भाजपा की जीत में सामने आए महिला फैक्टर का असर है।
कौशाम्बी जिले में वर्तमान में करीब साढ़े आठ हजार महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। प्रत्येक समूह से करीब 10 महिलाएं जुड़ी हैं। इस हिसाब से इनकी संख्या 80 हजार से ज्यादा है। यदि प्रत्येक महिला के साथ परिवार के तीन अन्य सदस्यों को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब ढाई लाख पहुंच जाता है।
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ऐसे में समूहों के माध्यम से बड़ी आबादी को डिप्टी सीएम के साधने की रणनीति साफ नजर आई। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले के स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न स्तरों पर करीब तीन करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की संख्या बढ़ाने की योजना है। साथ ही प्रत्येक ब्लॉक में 100 दिनों के भीतर पांच-पांच करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लगाने की बात भी कही। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की नीतियों और योजनाओं का केंद्र महिलाएं। यह कहीं न कहीं बिहार चुनाव में भाजपा की जीत में सामने आए फैक्टर को प्रभावी करने की रणनीति लगी। संवाद