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Kaushambi News: पराली से उठीं लपटें, 13 किसान भरेंगे 30 हजार
Tue, 28 Oct 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 28 Oct 2025 01:26 AM IST
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लाख समझाने के बावजूद किसान मान नहीं रहे हैं। खेतों में पराली से लपटें उठ रही हैं। सैटेलाइट से मिली रिपोर्ट के आधार पर 13 किसानों पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह किसान मंझनपुर, सरसवां और सिराथू ब्लॉक के हैं।
पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिले की तीन तहसीलों, आठ विकासखंडों के साथ ही जनपद स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। कृषि, राजस्व, पंचायतीराज व पशुपालन विभाग के अधिकारियों से डीएम मधुसूदन हुल्गी लगातार अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने किसानों से पराली न जलाकर गोशालाओं में दान करने की अपील की है। पशुपालन और डीपीआरओ कार्यालय प्रधानों को गोशालाओं तक पराली पहुंचाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी सुरुचि कुशवाहा ने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों की पीएम किसान सम्मान निधि रोकी जाएगी। सरकारी क्रय केंद्रों पर उनके धान की खरीद नहीं होने दी जाएगी। अब तक जो भी कार्रवाइयां की गई हैं, सभी सैटेलाइट से मिली जानकारी के आधार पर हुई है। बीते साल दिवाली के बाद पराली जलाने के 17 मामले सामने आए थे। उन्होंने बताया कि बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के काम कर रहे तीन कंबाइन हार्वेस्टर भी सीज किए गए हैं।
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हैसियत के हिसाब से जुर्माना
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि दो एकड़ तक की भूमि वाले किसानों पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ के बीच वालों पर 5000 और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15,000 रुपये प्रति घटना के हिसाब से जुर्माना तय किया गया है। उन्होंने बताया कि जुर्माना वसूली से पहले नोटिस भी जारी किया रहा है।
बेलर मशीन से राहत
जिले में 20 बेलर मशीनें सक्रिय हैं, जो खेतों में पराली के डंठलों का बंडल बना रही हैं। इससे किसानों को खेत साफ करने में राहत मिल रही है और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। इन बंडलों का उपयोग बायोफ्यूल तैयार करने में किया जा रहा है।
इन गांवों में ज्यादा जलती है पराली
मंझनपुर। सरसवां, बरौली, कुम्हियावां, हिनौता, महेवा, शाहपुर, सिराथू ब्लॉक के अनेठा, कैमा, जलालपुर टेंगाई, चायल के इच्छना, मिनहाजपुर सिहोरवा, चक पिनहा, पुरखास, यूसुफपुर, उस्मानपुर, नेवादा के कटइया और भखंदा गांव में ज्यादा पराली जलाई जाती हैं। संवाद
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पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिले की तीन तहसीलों, आठ विकासखंडों के साथ ही जनपद स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। कृषि, राजस्व, पंचायतीराज व पशुपालन विभाग के अधिकारियों से डीएम मधुसूदन हुल्गी लगातार अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने किसानों से पराली न जलाकर गोशालाओं में दान करने की अपील की है। पशुपालन और डीपीआरओ कार्यालय प्रधानों को गोशालाओं तक पराली पहुंचाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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जिला कृषि अधिकारी सुरुचि कुशवाहा ने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों की पीएम किसान सम्मान निधि रोकी जाएगी। सरकारी क्रय केंद्रों पर उनके धान की खरीद नहीं होने दी जाएगी। अब तक जो भी कार्रवाइयां की गई हैं, सभी सैटेलाइट से मिली जानकारी के आधार पर हुई है। बीते साल दिवाली के बाद पराली जलाने के 17 मामले सामने आए थे। उन्होंने बताया कि बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के काम कर रहे तीन कंबाइन हार्वेस्टर भी सीज किए गए हैं।
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हैसियत के हिसाब से जुर्माना
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि दो एकड़ तक की भूमि वाले किसानों पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ के बीच वालों पर 5000 और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15,000 रुपये प्रति घटना के हिसाब से जुर्माना तय किया गया है। उन्होंने बताया कि जुर्माना वसूली से पहले नोटिस भी जारी किया रहा है।
बेलर मशीन से राहत
जिले में 20 बेलर मशीनें सक्रिय हैं, जो खेतों में पराली के डंठलों का बंडल बना रही हैं। इससे किसानों को खेत साफ करने में राहत मिल रही है और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। इन बंडलों का उपयोग बायोफ्यूल तैयार करने में किया जा रहा है।
इन गांवों में ज्यादा जलती है पराली
मंझनपुर। सरसवां, बरौली, कुम्हियावां, हिनौता, महेवा, शाहपुर, सिराथू ब्लॉक के अनेठा, कैमा, जलालपुर टेंगाई, चायल के इच्छना, मिनहाजपुर सिहोरवा, चक पिनहा, पुरखास, यूसुफपुर, उस्मानपुर, नेवादा के कटइया और भखंदा गांव में ज्यादा पराली जलाई जाती हैं। संवाद