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स्टाफ नर्सों के लिए आफत बनी गुमनाम शिकायत
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Thu, 21 May 2015 02:23 AM IST
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मंझनपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत संविदा पर चयनित हुई 32 स्टाफ नर्सों के लिए एक गुमनाम शिकायत आफत बन गई है। गुमनाम शिकायतकर्ता ने नर्सों की चयन प्रक्रिया में खेल की शिकायत डीएम से की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जांच के आदेश दिए थे। दरअसल, शिकायत करने वाला व्यक्ति अभी तक खुलकर सामने नहीं आया है। लिहाजा डीएम ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का साक्ष्य देने के लिए 13 जुलाई तक का समय दिया है। कहाकि इस अवधि तक कोई साक्ष्य अथवा शिकायत नहीं मिलती है, तो दोबारा किसी भी शिकायत पर विचार नहीं किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पिछले दिनों संविदा पर 32 स्टाफ नर्सों का चयन किया गया था। चयन के बाद किसी ने डीएम को शिकायती पत्र देकर बताया कि चयन प्रक्रिया में अनियमितता की गई है। शिकायत करने वाले ने अपना नाम शिकायती पत्र में नहीं लिखा था। बहरहाल, इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य महकमा हैरान है। साथ ही नौकरी पाने वाली नर्सों की भी नींद उड़ी हुई है। उधर, इस गुमनाम शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम राजमणि यादव ने चयन प्रक्रिया की जांच शुरू करवा दी। सीएमओ डॉ राजकुमार मिश्र ने बताया कि शिकायतकर्ता ने कोई साक्ष्य नहीं दिया है।
इसकी वजह से निर्णय लेने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि साक्ष्य देने के लिए पहले चार मई की तारीख तय की गई थी, लेकिन इस दिन राजकीय अवकाश पड़ गया। अगली तारीख 13 जुलाई निर्धारित की गई है। 13 जुलाई को कोई भी व्यक्ति डीएम कोर्ट में उपस्थित होकर चयन प्रक्रिया में हुई अनियमितता का सबूत दे सकता है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। आरोप सही पाए गए तो चयन रद्द भी कर दिया जाएगा। डीएम की इस सख्ती को लेकर चयनित स्टॉफ नर्सों के होश उड़े हुए हैं। उन्हें नौकरी जाने की चिंता सताने लगी है। हालांकि सीएमओ ने चयन प्रक्रिया बिल्कुल साफ सुथरी होने का दावा किया है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पिछले दिनों संविदा पर 32 स्टाफ नर्सों का चयन किया गया था। चयन के बाद किसी ने डीएम को शिकायती पत्र देकर बताया कि चयन प्रक्रिया में अनियमितता की गई है। शिकायत करने वाले ने अपना नाम शिकायती पत्र में नहीं लिखा था। बहरहाल, इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य महकमा हैरान है। साथ ही नौकरी पाने वाली नर्सों की भी नींद उड़ी हुई है। उधर, इस गुमनाम शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम राजमणि यादव ने चयन प्रक्रिया की जांच शुरू करवा दी। सीएमओ डॉ राजकुमार मिश्र ने बताया कि शिकायतकर्ता ने कोई साक्ष्य नहीं दिया है।
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इसकी वजह से निर्णय लेने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि साक्ष्य देने के लिए पहले चार मई की तारीख तय की गई थी, लेकिन इस दिन राजकीय अवकाश पड़ गया। अगली तारीख 13 जुलाई निर्धारित की गई है। 13 जुलाई को कोई भी व्यक्ति डीएम कोर्ट में उपस्थित होकर चयन प्रक्रिया में हुई अनियमितता का सबूत दे सकता है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। आरोप सही पाए गए तो चयन रद्द भी कर दिया जाएगा। डीएम की इस सख्ती को लेकर चयनित स्टॉफ नर्सों के होश उड़े हुए हैं। उन्हें नौकरी जाने की चिंता सताने लगी है। हालांकि सीएमओ ने चयन प्रक्रिया बिल्कुल साफ सुथरी होने का दावा किया है।
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