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नक्सली हमले में दोआबा का सपूत शहीद
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sun, 28 Dec 2014 12:34 AM IST
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मंझनपुर/चरवा (कौशाम्बी)। छत्तीसगढ़ में शनिवार को हुए नक्सली हमले में
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कौशाम्बी के सीआरपीएफ जवान चंद्रमणि यादव (30) शहीद हो गया। देर शाम जैसे
ही उसके शहादत की खबर गांव आई, परिवार में कोहराम मच गया। बूढ़े मां-बाप के
साथ पत्नी, बच्चे सभी बिलखने लगे। घटना से पूरा गांव स्तब्ध रह गया।
बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाने वाले भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
बता दें कि कौशाम्बी के चरवा कोतवाली के पूरे अयोध्या गांव निवासी चंद्रमणि यादव पुत्र मान सिंह वर्ष 2004 में सीआरपीएफ में बतौर रेडियो आपरेटर भर्ती हुआ था। पिछले पांच साल से उसकी ड्यूटी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ही रही है। इन दिनों वह छत्तीसगढ़ के जसपुर इलाके में तैनात था। जवान के पिता मानसिंह ने बताया कि उन्हें सीआरपीएफ कमांडेंट ने फोन करके बेटे के शहीद होने की सूचना दी। उनके मुताबिक अपराह्न करीब दो बजे नक्सलियों ने जसपुर स्थित सीआरपीएफ कैंप में हमला कर दिया।
हमले में चंद्रमणि शहीद हो गया। चंद्रमणि के शहीद होने की जानकारी घरवालों को हुई तो परिवार में कोहराम सा मच गया। बूढ़े मां-बाप के साथ पत्नी, बच्चे, भाई-बहन सिसकने लगे। कुछ देर में यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। बड़ी संख्या में लोग ढांढस बंधाने घर पर पहुंच गए। बता दें कि मान सिंह के तीन बच्चों में चंद्रमणि सबसे बड़ा था। वर्ष 2007 में उसकी शादी साखा (सिराथू) गांव की रहने वाली साधना से हुई थी। चंद्रमणि और साधना के दो बच्चे सुजल (5) और छह माह का दुधमुंहा मासूम बेटा शौर्य है।
नक्सली हमले में शहीद होने वाला चरवा का चंद्रमणि दो महीने पहले माहभर के अवकाश पर घर आया था। परिवार संग महीनेभर तक हंसी-खुशी गुजारने के बाद करीब 28 दिन पहले ही वह ड्यूटी पर वापस जसपुर (छत्तीसगढ़) लौटा था। जवान बेटे के हमेशा के लिए जुदा होने के गम में आंसू बहा रहे मानसिंह ने बताया कि अभी दो दिन पहले ही फोन पर उससे बात भी हुई थी।
बता दें कि कौशाम्बी के चरवा कोतवाली के पूरे अयोध्या गांव निवासी चंद्रमणि यादव पुत्र मान सिंह वर्ष 2004 में सीआरपीएफ में बतौर रेडियो आपरेटर भर्ती हुआ था। पिछले पांच साल से उसकी ड्यूटी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ही रही है। इन दिनों वह छत्तीसगढ़ के जसपुर इलाके में तैनात था। जवान के पिता मानसिंह ने बताया कि उन्हें सीआरपीएफ कमांडेंट ने फोन करके बेटे के शहीद होने की सूचना दी। उनके मुताबिक अपराह्न करीब दो बजे नक्सलियों ने जसपुर स्थित सीआरपीएफ कैंप में हमला कर दिया।
हमले में चंद्रमणि शहीद हो गया। चंद्रमणि के शहीद होने की जानकारी घरवालों को हुई तो परिवार में कोहराम सा मच गया। बूढ़े मां-बाप के साथ पत्नी, बच्चे, भाई-बहन सिसकने लगे। कुछ देर में यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। बड़ी संख्या में लोग ढांढस बंधाने घर पर पहुंच गए। बता दें कि मान सिंह के तीन बच्चों में चंद्रमणि सबसे बड़ा था। वर्ष 2007 में उसकी शादी साखा (सिराथू) गांव की रहने वाली साधना से हुई थी। चंद्रमणि और साधना के दो बच्चे सुजल (5) और छह माह का दुधमुंहा मासूम बेटा शौर्य है।
नक्सली हमले में शहीद होने वाला चरवा का चंद्रमणि दो महीने पहले माहभर के अवकाश पर घर आया था। परिवार संग महीनेभर तक हंसी-खुशी गुजारने के बाद करीब 28 दिन पहले ही वह ड्यूटी पर वापस जसपुर (छत्तीसगढ़) लौटा था। जवान बेटे के हमेशा के लिए जुदा होने के गम में आंसू बहा रहे मानसिंह ने बताया कि अभी दो दिन पहले ही फोन पर उससे बात भी हुई थी।